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Gorakhpur News : शहादत दिवस पर याद किये गये बलिदानी गौतम गुरुंग

Gorakhpur News: कारगिल युद्ध में अद्भुत शौर्य कर प्रदर्शन करने वाले बलिदानी लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग को आज कूड़ाघाट स्थित उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके 24 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई।

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Sacrifice Gautam Gurung remembered on Martyrdom Day gorakhpur news

Gorakhpur News: कारगिल युद्ध में अद्भुत शौर्य कर प्रदर्शन करने वाले बलिदानी लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग को आज कूड़ाघाट स्थित उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके 24 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान बलिदानी के माता, पिता , GRD
स्टेशन कमांडर व स्टेशन अफसर, मेजर जनरल शिव जसवाल( रिटा), ब्रिगेडियर गोबिंदजी मिश्रा( रिटा) , गोरखपुर वीर सेनानी कल्याण संस्थान के अध्यक्ष अनिरुद्ध शाही, ओंकार नाथ मिश्रा, रामराज प्रसाद, आर एस यादव, बीएन पोद्दार, पीके पांडेय,आर् एन पांडेय, ओम गूरूंग सहित बड़ी संख्या में भूतपूर्व सैनिक उपस्थित थे।


5 अगस्त 1999 को मुठभेड़ में बलिदान हुए थे गौतम
कारगिल युद्ध में अपने अदम्य साहस का परिचय देने वाले शहीद गौतम गुरुंग का आज बलिदान दिवस था।कारगिल के तंगधार सेक्टर में अपनी रेजीमेंट के जवानों के साथ देश की रक्षा करते हुए 4 अगस्त 1998 को गौतम गुरुंग गंभीर रूप से घायल हो गये थे। अगले दिन यानि कि 5 अगस्त की सुबह उनके शहादत की सूचना आई। जब गौतम गुरूंग शहीद हुए तब वो उस वक्त गोरखपुर के जीआरडी में तैनात थे। उनके शहीद होने के बाद जीआरडी के पास कूंडाघाट चौराहे पर उनकी मूर्ति लगायी गयी ,जहां पर आज बड़ी संख्या में लोगों ने शहीद गौतम गुरुंग को श्रद्धांजलि दी।


बलिदानी गौतम के पिता भी सेना में दे चुके हैं सेवा
आज उन्होंने अपने बेटे को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हमें गर्व है कि हमारे बेटे ने देश के लिए जान दी है. मेरे बेटे की उम्र जब पारिवारिक सांसारिक मौज मस्ती करने की थी तब देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। उसकी शहादत पर देश को गर्व है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटे के पेंशन का पैसे से ट्रस्ट चला कर के लोगों की सेवा कर रहा हूं। ट्रस्ट के माध्यम से युवाओं को लड़कियों को गोरखा रेजीमेंट के बारे बताने का भी काम करता हूं।


बलिदानी का जन्म भी अगस्त माह में ही हुआ था
बता दें कि 23 अगस्त 1973 को गौतम गुरुंग का जन्म देहरादून में हुआ था। शहीद गौतम गुरुंग के पिता रिटायर्ड ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग का कहना है की उनमें बचपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने का जूनून था। इनका परिवार मूलरूप से नेपाल का रहने वाला है लेकिन इनकी कई पीढ़ी करीब 100 साल से देहरादून में ही रहती है। गौतम ने एमबीए करने के बाद भी सेना में जाने का फैसला किया था 3/4 गोरखा रायफल्स में कमीशन और पहली तैनाती जम्मू कश्मीर में मिली थी।

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