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सीएम योगी आदित्यनाथ के जिले में पीएम मोदी के इज्जतघर बने स्टोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार चला रही स्वच्छता अभियान, लेकिन कागजों तक सिमटी जागरूकता

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Toilets use as store

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गोरखपुर. 'तुम्हारी फाइलों में मेरे गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी हैं।' अदम गोंडवी की यह कविता सरकार के स्वच्छता अभियान के तहत बनने वाले शौचालयों (प्रधानमंत्री के शब्दों में 'इज्जत घरों') का सच बयां करता हैं। प्रधानमंत्री मोदी के इस अहम अभियान को कागजी बाजीगरी से सफल दिखाया जा रहा है जबकि सच तो यह है कि जिन गांवों को खुले में शौच मुक्त कर दिया गया है उन गांवों में भी बहुत से लोग शौचालय के अभाव में बाहर जाने को मजबूर हैं। जिनके शौचालय बने भी हैं उनमें भी अधिकतर उसका उपयोग नहीं करते।


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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिला इस वक़्त शौचालय निर्माण व ओडीएफ के मामले में प्रदेश में अव्वल है। सरकारी आंकड़ों की माने तो प्रतिदिन 1500 शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इस साल 4.72 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य है। केवल अक्टूबर माह में 60 हजार शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकारी अधिकारियों का दावा है कि दिसंबर तक जिले का हर गांव खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर जाएगा। लेकिन कागजों के उलट जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरकारी फाइलों में ओडीएफ घोषित किसी भी गांव में सुबह या शाम को पहुंचने पर हक़ीक़त से रूबरू हुआ जा सकता है। गांव के बाहर हाथ में खाली डिब्बा या लोटा लिये लोग अभियान व साहबानों के दावों की सच दिखाते मिल जाएंगे। ऐसा नहीं है कि गांव में शौचालय एकदम से बने ही नहीं हैं। काफी शौचालय बने भी हैं लेकिन उनका उपयोग अन्य कामों के लिये यथा चारा रखने, पुआल या गोहरा रखने जैसे काम में आ रहे हैं।


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चरगांवा ब्लाक के जंगल छत्रधारी गांव में ढेर सारे शौचालय बने हैं। लेकिन अधिकतर गांववाले बाहर ही नित्यक्रिया को जाते हैं। ग्रामीण अपने अपने शौचालयों का उपयोग स्टोर के रूप से करते हैं। किसी के शौचालय में पुआल रखा है तो किसी में बोरियां, कहीं गोहरा (कंडी) तो कहीं कोई सामान रखा गया है। गांव के रामा बताते हैं कि गांव के शौचालय तो बन रहे लेकिन उसके निर्माण में काफी अनियमियता बरती गई है। शौचालय भी सबके नहीं बने है। जिनके बने भी हैं उनमें भी अधिकतर उपयोग नहीं करते हैं। रामसूरत, संजय, अख्तर आदि भी शौचालय केवल कोरमपूर्ति के लिए बनने की बात कहते हैं। यह आलम जंगल छत्रधारी का ही नहीं जिले व मंडल के कमोवेश हर ओडीएफ या अन्य गांवों का है। नेशनल हाईवे के किनारे बसे गांवों की हकीकत शाम होते ही हाईवे किनारे झुण्ड में दिखती महिलाएं व युवतियां बयां कर देती हैं। हालांकि, जिलाधिकारी दावा करते हैं कि प्रदेश में इस समय सबसे अधिक शौचालय गोरखपुर में बन रहे। नगर क्षेत्रों को दिसंबर तक ओडीएफ कर दिए जाने का लक्ष्य है जबकि नवम्बर तक ग्रामीण इलाकों के करीब एक हज़ार गांव को ओडीएफ करने का लक्ष्य है।

by Dheerendra V Gopal