
भैरव नाथ मंदिर से नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में काले कुत्ते की एक मूर्ति बनी हुई है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 70 साल पुराना है। आज भी इस मंदिर में शनिवार और रविवार को दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं।
क्या है कुत्ते के मंदिर की कहानी?
करीब 70 साल पहले चिपियाना गांव के लक्खा बंजारे नाम के व्यक्ति ने मंदिर के अंदर कुत्ते की समाधि बनवाई थी। इसके पीछे एक बहुत ही रोचक कथा है। गांववालों के मुताबिक, लक्खा के पास एक कुत्ता था। उसने गांव के सेठ से कुछ कर्ज लिए थे। जब वह समय से कर्ज नहीं चुका पाया तो उसने सेठ के पास अपना कुत्ता गिरवीं रख दिया।
कुछ दिन बाद सेठ के घर डाकू आए। उन्होंने सेठ के घर का सारा खजाना लूट लिया पर कुत्ते ने एक बार भी नहीं भौंका। सुबह होने पर कुत्ता सेठ की धोती पकड़कर उस जगह ले गया, जहां लुटेरों ने सारा खजाना दबाया था। सेठ को जब अपना सारा खजाना सामने दिखा तो वह बहुत खुश हो गया। उसने कुत्ते को कर्ज से मुक्त कर दिया और वापस उसके मालिक के पास भेज दिया।
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कैसे बनी कुत्ते की समाधी?
कुत्ता जब लक्खा बंजारे के पास आया तो उसने ये सोचकर कि वह भागकर आया है, उसे गोली मार दी। हकीकत पता चली तो उसे अपने किए हुए पर बहुत पछतावा हुआ। कुत्ते को मारने के पाप से मुक्त होने के लिए, उसने गांव के भैरव बाबा मंदिर में कुत्ते की समाधि बनवा दी।
गांव निवासी अंबा प्रसाद शर्मा ने बताया, “ रैबीज के मरीज यहां मूर्ति पर प्रसाद चढ़ाते ही ठीक हो जाते है। मंदिर के बाहर बने तालाब में नहाने से कुत्ते के काटने का असर समाप्त हो जाता है।” उन्होंने यह भी बताया कि पहले यहां कोई मूर्ति नहीं थी। बाद में गांव वालों ने यहां कुत्ते की समाधि बनवा दी।
Published on:
20 Mar 2023 06:31 pm

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