
साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में बिल्डर गिरफ्तार, PC- Police
ग्रेटर नोएडा : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। अभय कुमार एमजेड विजटाउन का मालिक है। उसकी गिरफ्तारी नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने की है। इससे पहले शासन ने कार्रवाई करते हुए नोएडा प्राधिकरण सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है
पुलिस के मुताबिक युवराज की मौत में अभय कुमार की भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। इस मामले में पहले ही लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और विजटाउन प्लानर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। जानकारी के अनुसार विजटाउन ने साल 2020 में यह संपत्ति लोटस ग्रीन्स से खरीदी थी।
विजटाउन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने साल 2020 में ‘अर्थम’ नाम से एक कमर्शियल प्रोजेक्ट शुरू किया था। वर्ष 2021 में इस प्रोजेक्ट की बैरिकेडिंग का काम पूरा हुआ। आरोप है कि विज़टाउन ने परियोजना शुरू होने से पहले ही निर्माण स्थल पर खुदाई कर दी थी, लेकिन वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
यह दर्दनाक हादसा 16 जनवरी को नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ। घने कोहरे के कारण युवराज मेहता की कार अनियंत्रित हो गई और निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी। यह गड्ढा एक मॉल के बेसमेंट निर्माण के लिए खोदा गया था, लेकिन वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत मौजूद नहीं थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार युवराज करीब 80 मिनट तक कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च जलाते हुए मदद की गुहार लगाते रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर रोते हुए कहा, 'पापा, मुझे बचा लो… मैं मरना नहीं चाहता।'
हालांकि ठंडे पानी और कम दृश्यता का हवाला देकर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम पानी में नहीं उतरी। करीब साढ़े चार घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान युवराज का शव बरामद किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
युवराज की मौत के मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच शुरू कर दी है। यह टीम मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर के नेतृत्व में काम कर रही है। टीम में मेरठ के मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अजय वर्मा भी शामिल हैं। जांच समिति ने सबसे पहले नोएडा विकास प्राधिकरण के दफ्तर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की और मृतक के परिजनों से भी मुलाकात की।
इस पूरे मामले में नोएडा अथॉरिटी की गंभीर लापरवाही सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। हैरानी की बात यह है कि घटना के चार दिन बाद भी कार को गड्ढे से बाहर नहीं निकाला जा सका।
Updated on:
20 Jan 2026 04:50 pm
Published on:
20 Jan 2026 04:49 pm
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