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5 करोड़ व्यूज का असर: क्या डिजिटल दौर में उभर रहा है सूर्या सोनल सिंह का नया राजनीतिक मॉडल?

डिजिटल युग में राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब प्रभाव केवल पद, चुनाव या सत्ता से नहीं, बल्कि जनता से सीधे संवाद की क्षमता से तय हो रहा है।

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सूर्या सोनल सिंह

सूर्या सोनल सिंह

भारतीय राजनीति में संवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब प्रभाव केवल चुनावी जीत या पद से नहीं, बल्कि विचारों की पहुंच और जनभागीदारी से भी तय होने लगा है। इसी बदलते परिदृश्य में झारखंड के हुसैनाबाद से जुड़े युवा सामाजिक कार्यकर्ता सूर्या सोनल सिंह का गणतंत्र दिवस 2026 पर दिया गया 19 मिनट का संबोधन सोशल मीडिया पर 5 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है। यह आंकड़ा उन्हें राष्ट्रीय स्तर की चर्चा में ले आया है।

26 जनवरी 2026 को अपलोड किए गए इस वीडियो ने मात्र 22 दिनों में 4 लाख से अधिक लाइक्स और 25 हजार से ज्यादा शेयर प्राप्त किए। डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के किसी राजनीतिक भाषण का इतने व्यापक स्तर पर देखा जाना इस बात का संकेत है कि दर्शक गंभीर और विषयपरक संवाद को भी महत्व दे रहे हैं।

भाषण में क्या था खास?

अपने संबोधन में सूर्या सोनल सिंह ने राष्ट्रीय एकता, शिक्षा सुधार, किसानों की समस्याओं और युवाओं की भूमिका जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा। उनका अंदाज़ पारंपरिक राजनीतिक भाषण से अलग और संवादपरक रहा। भाषण का सबसे चर्चित क्षण तब सामने आया जब उन्होंने कहा, “मैं गांव का लड़का हूं।” यह सरल वाक्य सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया गया और युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ।

जमीनी कार्य से राष्ट्रीय पहचान

हुसैनाबाद क्षेत्र में सामाजिक और पर्यावरणीय पहलों से जुड़े रहे सूर्या सोनल सिंह पहले से स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं। ग्राम विकास और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से उन्होंने अपनी पहचान बनाई। अब वही जमीनी जुड़ाव डिजिटल माध्यमों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है।

बिना पद भी प्रभाव संभव

अब तक कोई चुनाव न लड़ने के बावजूद सूर्या सोनल सिंह की डिजिटल उपस्थिति को विश्लेषक बदलती राजनीतिक संस्कृति का संकेत मान रहे हैं। यह घटना दर्शाती है कि आज सोशल मीडिया संवाद का सशक्त मंच बन चुका है, जहाँ विचारों की स्पष्टता और निरंतर संवाद भी व्यापक समर्थन जुटा सकते हैं।

‘जोड़ने की राजनीति’ की चर्चा

भाषण के बाद जारी संदेश में उन्होंने “तोड़ने की नहीं, जोड़ने की राजनीति” पर जोर दिया। सोशल मीडिया पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि लोग सहभागी और संवाद आधारित नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहे हैं। झारखंड के हुसैनाबाद से उठी यह आवाज़ अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। 5 करोड़ व्यूज़ केवल एक संख्या नहीं, बल्कि यह संकेत है कि डिजिटल युग में राजनीति का स्वरूप बदल रहा है—जहाँ संवाद ही सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है।