
Galgotias University CEO का पुराना केस Source- X
Who is CEO of Galgotias University Dhruv Galgotia: ग्रेटर नोएडा की Galgotias University इन दिनों काफी चर्चा में है। हाल ही में India AI Impact समिट में रोबोटिक डॉग को अपना आविष्कार बताने और भारी निवेश के दावों को लेकर विवाद हुआ है। यूनिवर्सिटी के CEO ध्रुव गलगोटिया भी पुराने एक मामले की वजह से सुर्खियों में हैं। साल 2014 में उन्हें जेल जाना पड़ा था। यह सब एक लोन न चुकाने के केस से जुड़ा था।
ध्रुव गलगोटिया ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी के CEO हैं। यह यूनिवर्सिटी उनके पिता सुनील गलगोटिया ने शुरू की थी। सुनील गलगोटिया चांसलर हैं और परिवार की एजुकेशन सोसाइटी चलाते हैं। ध्रुव यूनिवर्सिटी के रोजमर्रा के काम, विकास, इंडस्ट्री से जुड़ाव और भविष्य की प्लानिंग देखते हैं। परिवार की शुरुआत दिल्ली में किताबों की दुकान से हुई थी। बाद में उन्होंने एजुकेशन में बड़ा नाम कमाया। आज गलगोटिया ग्रुप कई संस्थान चलाता है और हजारों छात्र पढ़ते हैं। ध्रुव को डॉक्टरेट डिग्री भी है और वे यूनिवर्सिटी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
साल 2014 में ध्रुव गलगोटिया को बड़ा झटका लगा। अखिलेश यादव की सरकार के समय आगरा की एक इन्वेस्टमेंट कंपनी (एसई इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड) से लिया गया करीब 120 करोड़ रुपये का लोन नहीं चुकाया गया। कंपनी ने धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का आरोप लगाया। इस केस में ध्रुव गलगोटिया, उनकी मां पद्मिनी गलगोटिया और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। वहीं 13 अक्टूबर 2014 को गुड़गांव से पुलिस ने ध्रुव और उनकी मां को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें आगरा जेल भेज दिया गया। वे करीब एक सप्ताह (लगभग 7 दिन) जेल में रहे। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया और उन्हें जमानत मिल गई। इस दौरान उनके पिता सुनील गलगोटिया को अग्रिम जमानत मिली थी, इसलिए वे गिरफ्तारी से बच गए। यह मामला लोन चुकाने में चूक और कुछ दस्तावेजों से जुड़ा था। कोर्ट में कई साल चला और अंत में राहत मिली।
Galgotias University हाल ही में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल हुई। वहां यूनिवर्सिटी ने एक रोबोटिक डॉग दिखाया, जिसका नाम 'ओरियन' रखा गया। एक प्रोफेसर ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित किया गया है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग पहचान गए कि यह चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का 'गो2' मॉडल है। यह रोबोट भारत में 2-3 लाख रुपये में मिल जाता है। यह दावा गलत निकला तो विवाद फैल गया। यूनिवर्सिटी को समिट से स्टॉल हटाना पड़ा। यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी और कहा कि यह छात्रों की पढ़ाई के लिए खरीदा गया था। प्रतिनिधि की गलती से ऐसा हुआ, कोई जानबूझकर दावा नहीं किया। लेकिन सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी की काफी आलोचना हुई। कुछ ने पुराने 2014 के केस को भी जोड़कर बात की।
ध्रुव गलगोटिया एक सफल एजुकेटर के बेटे हैं, जो यूनिवर्सिटी को बड़ा बनाने में लगे हैं। लेकिन 2014 का जेल कांड और हाल का रोबोट विवाद उनकी छवि पर असर डाल रहा है। यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी है और कहा है कि गलती सुधार ली गई।
Published on:
20 Feb 2026 10:38 am
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