
ग्रेटर नोएडा। जीवनभर की कमाई लगाकर शाहबेरी में एक अदद आशियाना बनाने वाले अब अपने उसी आशियाने को बचाने के लिए आमरण अनशन कर रहे हैं। इमारतों को अवैध बताकर उसे गिराने का नोटिस मिलने के बाद वहां के लोग11अक्टूबर से आमरण अनशन पर हैं। अनशन के तीसरे दिन रविवार को दो अनशनकारियों की हालत बिगड़ गई। उन्हें आनन फानन में पास के अस्पताल पहुंचा गया। इसके बावजूद प्राधिकरण या प्रशासन ने उनकी कोई सुध नहीं ली।
दो इमारत गिरने के बाद ही प्रशासन ने अवैध फ्लैटों को तोडऩे का दिया था नोटिस
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी में हजारों की संख्या में फ्लैटों का निर्माण हुआ है। हजारों लोग उसमें रह रहे हैं, लेकिन, बीते वर्ष वहां दो इमारतों के धाराशायी होने और उसमें नौ लोगों की मौत के बाद से ही वहां बनी इमारतों में रहने वालों की मुसीबतें बढ़ गईं। जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने वहां की तमाम इमारतों को अवैध बताते हुए उन्हें गिराने का नोटिस जारी कर दिया। हालांकि वहां रहने वाले लोग प्राधिकरण के फैसले का विरोध करते रहे। वे दलीलें भी देते रहे कि पूरे मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। बैंक से लोन लेकर उन्होंने अपना आशियाना बनाया है, लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती ही साबित हुई। इस पूरे मामले में अपने को ठगा महसूस कर रहे
नोटिस मिलने के बाद से धरने पर बैठे है बायर्स
हाल ही में बायर्स11अक्टूबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। वह अपना अनशन जारी रखेंगे। आमरण अनशन के दौरान रविवार को धरने पर बैठे 60 वर्षीय भूपेंद्र सिंह की हालत बिगड़ गई। उन्हें पास के अस्पताल में दिखाने ले जाया गया, लेकिन वह न्याय के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष की बात कह रहे हैं। अनशन पर बैठे अनिल ने भी कहा कि जब तक उनके शरीर में सांस है। वह न्याय के लिए जूझते रहेंगे। वह कहते हैं कि उनकी गलती सिर्फ इतनी है कि उन्होंने और उनके जैसे हजारों लोगों ने अपने जीवनभर की कमाई देकर एक अदद आशियाना बनाया है। उन्होंने तो पैसे दिए,आखिर इसमें उनका क्या दोष है।
Published on:
13 Oct 2019 07:50 pm

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