
गुना. जिले में थैलेसीमिया से पीड़ित 58 मरीज हैं। इनमें सभी छोटे बच्चे हैं। जिन्हें महीने में 10 दिन से लेकर 30 दिन के बीच रक्त चढ़ता है। बच्चों को बार-बार रक्त चढ़वाने के लिए जिला अस्पताल लाना परिजनों के लिए नियमित दिनचर्या जैसी बन चुकी है। लेकिन उन्हें तब बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है जब उन्हें ब्लड बैंक में वह रक्त नहीं मिलता जो बच्चे को चढ़ना है। जबकि उनके पास एक्सचेंज के लिए व्यक्ति भी मौजूद रहता है। इस तरह के हालात महीने में एक या दो बार नहीं बनते बल्कि कई बार ऐसे मौके आते हैं। इस विकट स्थिति में परिजनों को अपने छोटे बच्चों के साथ बहुत ज्यादा कष्टदायक स्थिति का सामना करना पड़ता है। खासकर उन परिजनों को जो जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचल से अपने बच्चे को लेकर गुना आते हैं।
शनिवार को जब पत्रिका टीम जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंची तो परिजनों और बच्चों का दर्द देखने को मिला। शहर की राधा कॉलोनी निवासी राखी सेलर अपने बच्ची तपस्या को लेकर आई थीं। उन्होंने बताया कि तपस्या को बचपन से ही थैलेसीमिया है। शुरूआत में हर 15 दिन में ब्लड चढ़वाने आना पड़ता था। लेकिन पिछले एक साल से महीने मेें एक बार आना पड़ता है। इसी क्रम में वह आज यहां आईं तो पता चला कि ब्लड ैबैंक में ओ पॉजिटिव ब्लड नहीं है। स्टाफ का कहना है कि थोड़ी देर इंतजार करो, कोई डोनर आएगा तो दे दिया जाएगा। राखी ने बताया कि वह सुबह 11 बजे से अपनी बच्ची को लेकर बैठीं हैं लेकिन 2 बजे तक कोई नहीं आया।
इसी तरह जिले की सबसे दूरस्थ तहसील मधुसूदनगढ़ के ग्राम बरखेड़ी से आई ऊषा ने बताया कि उनके बच्चे को भी ओ पॉजिटिव खून चढ़ना है लेकिन ब्लड बैंक वालों का कहना है कि अभी ब्लड नहीं है। थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। इसी तरह की परिस्थिति का सामना थैलेसीमिया के अलावा अन्य मरीजों के परिजनों को भी करना पड़ रहा था।
ब्लड बैंक के बाहर चस्पा सूचना को देखा तो पता चला कि ब्लड बैंक में ओ पॉजिटिव रक्त की कमी नहीं है फिर परिजनों से ऐसा क्यों कहा गया। जानकारी लेने पर बताया गया कि उनके पास जो रक्त स्टॉक में है, उसे वह गंभीर मरीजों के लिए बचाकर रखते हैं। यदि जरूरत नहीं होती तो फिर थैलेसीमिया के पीड़ित मरीजों को दे देते हैं। क्योंकि थैलेसीमिया के मरीज को एक दिन बाद भी रक्त चढ़ाया जा सकता है लेकिन ऑपरेशन वाले मरीज को तत्काल जरूरत होती है।
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7 मई ब्लड बैंक की स्थिति
ब्लड ग्रुप/यूनिट
ओ पॉजिटिव : 17
ए पॉजिटिव : 44
बी पॉजिटिव : 59
एबी पॉजिटिव : 06
ओ निगेटिव : 00
ए निगेटिव : 05
बी निगेटिव : 05
एबी निगेटिव : 02
कुल : 137 यूनिट
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आखिर क्या है थैलेसीमिया
विशेषज्ञ चिकित्सक के मुताबिक थैलेसीमिया यह एक अनुवांशिक रक्त रोग हैं। इसके कारण रक्त या हीमोग्लोबिन निर्माण के कार्य में गड़बड़ी होने के कारण रोगी को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता हैं। इस स्थिति की वजह से यह रोग न केवल रोगी के लिए कष्टदायक होता है बल्कि सम्पूर्ण परिवार के लिए कष्टों का सिलसिला लिए रहता हैं। यह रोग अनुवांशिक होने के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार में चलता रहता है। इस रोग में शरीर में लाल रक्त कण/ रेड ब्लड सेल (आर.बी.सी.) नहीं बन पाते है। यही नहीं जो थोड़े बनते है वह केवल अल्प काल तक ही रहते हैं। इसी वजह से थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसा न करने पर बच्चा जीवित नहीं रह सकता हैं। गौर करने वाली बात है कि इस बीमारी की सम्पूर्ण जानकारी और विवाह के पहले विशेष एहतियात बरतने पर इसे आनेवाले पीढ़ी को होने से कुछ प्रमाण में रोक सकते हैं
इसलिए होता है थैलेसीमिया
थैलेसीमिया अनुवांशिक रोग है और माता अथवा पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होता हैं। रक्त में हीमोग्लोबिन दो तरह के प्रोटीन से बनता है। एक अल्फा और दूसरा बीटा ग्लोबिन। इन दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जीन्स में गड़बड़ी होने पर थैलेसीमिया होता हैं। माइनर थैलेसीमिया से पीड़ित मरीज में अक्सर कोई लक्षण नजर नहीं आता हैं। यह रोगी थैलेसीमिया वाहक होते हैं। वहीं मेजर थैलेसीमिया
उन बच्चों को होता है जिनके माता और पिता दोनों के जिंस में गड़बड़ी होती हैं। यदि माता और पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर हो तो होने वाले बच्चे को थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा अधिक रहता है।
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ऐसे पहचानें थैलेसीमिया
थैलेसीमिया माइनर : इसमें अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नजर नहीं आता हैं। कुछ रोगियों में रक्त की कमी या एनीमिया हो सकता हैं।
थैलेसीमिया मेजर : जन्म के 3 महीने बाद कभी भी इस बीमारी के लक्षण नजर आ सकते हैं। बच्चों के नाख़ून और जीभ पिली पड़ जाने से पीलिया या जौंडिस का भ्रम पैदा हो जाता हैं। बच्चे के जबड़ों और गालों में असामान्यता आ जाती हैं। बच्चे का विकास रुक जाता है और वह उम्र से काफी छोटा नजर आता हैं। सूखता चेहरा, वजन न बढ़ना, हमेशा बीमार नजर आना, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ भी इसके लक्ष्ण हैं।
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थैलेसीमिया को आगे बढ़ने से रोकने यह करें
जागरूकता : थैलेसीमिया से पीड़ित लोगो में इस रोग संबंधी जागरूकता फैलानी चाहिए ताकि इस रोग के वाहक इस रोग को और अधिक न फैला सके।
गर्भावस्था : यदि माता-पिता थैलेसीमिया से ग्रस्त है तो गर्भावस्था के समय प्रथम 3 से 4 माह के भीतर परीक्षण करवा कर पता कर सकते हैं कि होने वाले बच्चे को थैलेसीमिया तो नहीं है।
शादी : शादी करने से पहले अक्सर लड़के और लड़की की कुंडली मिलाई जाती है। थैलेसीमिया से बचने के लिए शादी से पहले लड़के और लड़की की स्वास्थ्य कुंडली मिलानी चाहिए, जिससे पता चल सके की उनका स्वास्थ्य एक दूसरे के अनुकूल है या नहीं। स्वास्थ्य कुंडली में थैलेसीमिया , एड्स, हेपेटाइटिस बी और सी, आरएच फैक्टर आदि की जांच कराना चाहिए।
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पीजी कॉलेज में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आज
गुना. विश्व रेडक्रॉस दिवस के उपलक्ष्य में 8 मई को कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए ने विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया है। यह शिविर पीजी कॉलेज एवं रेडक्रास भवन में लगाया जाएगा। जिसमें जिला प्रशासन सहित समाजसेवी, स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी व सदस्य भागीदारी करेंगे। बताया गया है कि रक्तदान शिविर का मुख्य उद्देश्य गुना जिले में 58 थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की मदद करना है। बीमारी से पीड़ित रोगियों को रक्त की आवश्यकता को देखते हुए इस शिविर को विशेष तौर पर आयोजित किया गया है। उल्लेखनीय है कि विश्व रेडक्रॉस दिवस पर रक्तदान शिविर एक सेमिनार के रूप में आयोजित किया जाएगा। जिसमें डॉ. विनोद धाकड़ ओनाकोसर्जन इंदौर अपनी सेवाएं देंगे। साथ ही कार्यक्रम में थैलेसीमिया रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं थैलेसीमिया रोग पर परिचर्चा भी करेंगे। उक्त कार्यक्रम जिला चिकित्सालय स्थित रेडक्रॉस भवन में सुबह 10 बजे से किया जाएगा। कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए ने बताया कि उक्त कैंप का मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया से पीड़ित रोगियों को रक्त की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित कराना है।
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Published on:
08 May 2022 01:53 am

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