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एक ऐसा मंदिर जहां घंटा चढ़ाने आते थे डकैत

300 साल पहले सिरसी के महाराज निहाल सिंह ने जंगल में बनवाया था निहाल देवी मंदिर

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एक ऐसा मंदिर जहां घंटा चढ़ाने आते थे डकैत

एक ऐसा मंदिर जहां घंटा चढ़ाने आते थे डकैत

गुना. चारों तरफ से घने जंगलोंं से घिरा निहाल देवी मंदिर की अपनी ही अलग बात है। इसके बारे में यह बात बहुत ज्यादा प्रचलित है कि आज से करीब 22 साल पहले तक यहां नवरात्र के दिनों में डकैत घंटा चढ़ाने जरुर आते थे। उल्लेखनीय है कि इस मंदिर के आसपास का जंगल शिवपुरी तक फैला हुआ है। जिससे डकैतों को आने जाने में ज्यादा परेशानी नहीं आती थी।
यहां बता दें कि गुना जिले में मातारानी के दो प्रमुख स्थलों में से निहाल देवी की अपनी अलग पहचान है। यह मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बमोरी तहसील के गांव सिरसी के पास है। इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल से जुड़े कई रोचक तथ्य लोगों को सुनने पर रोमांचित कर देते हैं। इस मंदिर की खास विशेषता है कि यह मंदिर ऐसे स्थान पर है, जहां से चंबल का इलाका बहुत ज्यादा दूर नहीं रहता। चारों ओर से घना जंगल है। करीब 22 साल पहले तक इस मंदिर में डकैतों की आवाजाही के किस्से खूब चर्चा में रहे हैं। कहा जाता है कि नवरात्र के दौरान डकैत हर हाल में यहां आकर माता रानी के सामने सिर झुकाते थे। इस बात की जानकारी पुलिस को भी लग गई थी, इसके बावजद डकैत कभी भी इस स्थान से पकड़ में नहीं आए।
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दस्यु इमरत ने चढ़ाया था घंटा
निहाल देवी मंदिर के बाहर एक काफी बड़ा घंटा लटका हुआ है। जिसके बारे में कहा जाता है कि यह घंटा दस्यु इमरत लाल ने मातारानी को समर्पित किया था। इसके अलावा कुख्यात डकैत रमेश सिकरवार के भी यहां आने के कई किस्से सुने व सुनाए जाते हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि उन दिनों माताजी का मंदिर बड़ा नहीं था। यह एक मढिय़ा जैसा था। यहां आने वाले दर्जनों घंटों को बाद में बेच दिया जाता था, जिससे मिलने वाली राशि से मंदिर का निर्माण किया जाता रहा। बाद में शासन-प्रशासन ने भी यहां काम करवाए।