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ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में नहीं लग रहे एंटी रेबीज इंजेक्शन

इंजेक्शन लगवाने 60 से 80 किमी दूर आना पड़ रहा जिला अस्पताल

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ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में नहीं लग रहे एंटी रेबीज इंजेक्शन

ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में नहीं लग रहे एंटी रेबीज इंजेक्शन

गुना. सरकारी अस्पतालों के माध्यम से सरकार हर जरुरतमंद को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर साल करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर रही है। लेकिन इसके बाद भी आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। फिर चाहे सड़क दुर्घटना में घायलों को प्राथमिक उपचार मिलना हो या फिर डॉग बाइट के शिकार को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना हो। ग्रामीण अंचल के स्वास्थ्य केंद्रों पर यह दोनों सुविधाएं नहीं मिल रही है। जिसके कारण लोगों को इलाज कराने 60 से 80 किमी की दूरी तय कर जिला अस्पताल आना पड़ रहा है। जिससे मरीज को आवागमन के साथ साथ आर्थिक परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। यह परेशानी जिला अस्पताल में दूरस्थ ग्रामीण अंचल से आए मरीजों ने पत्रिका को बताई है। यही नहीं पड़ताल करने पर पता चला कि जिले के आरोन, फतेहगढ़, झागर सहित अन्य प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं।
जानकारी के मुताबिक सरकार ने जब से सरकारी अस्पतालों में सभी तरह की दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध करवाना शुरू किया है तब से ही अधिकांश प्राइवेट मेडीकल स्टोर्स ने एंटी रेबीज इंजेक्शन रखना या तो बंद कर दिया है या फिर बहुत कम संख्या में रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के मेडीकल स्टोर्स पर तो लगभग मिलना बंद हो गए हैं। ऐसे में जब यह इंजेक्शन सरकारी अस्पताल में भी जरुरत के समय उपलब्ध नहीं हो पाता है तो मरीज की परेशानी बढ़ जाती है। यहां बता दें कि डॉग बाइट के पश्चात मरीज को 5 इंजेक्शन का डोज निर्धारित अंतराल में लगाया जाता है। इस पूरे डोज की कीमत 1750 के करीब है। जिसे हर ग्रामीण मरीज नहीं खरीद पाता है। इसीलिए ग्रामीण क्षेत्र के प्राइवेट मेडीकल स्टोर संचालक एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं रख रहे। जिला अस्पताल में इन दिनों प्रतिदिन 40 से 50 एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।
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इसलिए एंटी रेबीज इंजेक्शन जरूरी
विशेषज्ञ चिकित्सक के अनुसार कुत्ता चाहे पालतू हो या फिर जंगली, अगर काट ले तो 72 घंटे के अंदर एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन लगवाना जरूरी है। यदि 72 घंटे के अंदर मरीज इंजेक्शन नहीं लगवाता है तो वह रेबीज रोग की चपेट में आ सकता है।
ऐसा होने के बाद रेबीज का कोई भी इलाज उपलब्ध नहीं हैं। मरीज इस बात का भी ध्यान रखें कि जंगली जानवर के काटे जाने के बाद यदि घाव अधिक गहरा नहीं हो, तो उसको साबुन से कम से कम पंद्रह मिनट तक अवश्य धोएं। इसके बाद बीटाडीन से उसकी ठीक तरह से सफाई करें व घाव को कभी भी ढके नहीं। अगर घाव अधिक गहरा हो तो तुरंत ही चिकित्सक की सलाह लें और उसकी साफ -सफाई का धयान दे।
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मुझे कल गांव में एक कुत्ते ने काट लिया था। जिसके बाद नजदीकी सरकारी अस्पताल
में गया तो वहां इंजेक्शन नहीं लगा। प्राइवेट मेडीकल पर भी नहीं मिला। मजबूरी में गुना जिला अस्पताल आकर ही लगवाना पड़ा।
सेवकराम, ग्रामीण
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गांव में इन दिनों कुत्तों की संख्या काफी बढ़ गई है। जो आए दिन न सिर्फ इंसानों को बल्कि जानवरों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। ग्रामीण अंचल के सरकारी अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन न लगने से बहुत परेशानी आ रही है।
विजय, ग्रामीण
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यह बोले जिम्मेदार
हमारे पास एंटी रेबीज इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। मुख्यालय से सभी अस्पतालों को डिमांड के अनुसार दवा उपलब्ध करवाई जाती है। जिन अस्पतालों पर एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं हैं वे हमारे यहां से ले जाएं।
डॉ पुरुषोत्तम बुनकर, सीएमएचओ
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फैक्ट फाइल
कुल पीएससी : 14
कुल सीएससी : 05

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