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सीएम राइज स्कूल में व्यवस्थाएं बेहतर लेकिन परिवहन सुविधा के अभाव में चाहकर भी नहीं भेज पा रहे बच्चे

पत्रिका स्पॉट लाइट : अधिकारी बोले, हम कर रहे पूरा प्रयासजिले में 6 सीएम राइज स्कूल हैं संचालित, गुना को छोड़ अन्य स्कूलों में नहीं हैं पर्याप्त शिक्षक व अन्य जरूरी व्यवस्थाएंपुराने भवनों को ही रंग रोगन कर दे दिया सीएम राइज नामनिजी स्कूलों की तरह सुविधा उपलब्ध कराने के दावे किए थेबस संचालन के लिए निर्धारित नियम शर्ते बस ऑपरेटरों के लिए चिंता का विषय

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सीएम राइज स्कूल में व्यवस्थाएं बेहतर लेकिन परिवहन सुविधा के अभाव में चाहकर भी नहीं भेज पा रहे बच्चे

सीएम राइज स्कूल में व्यवस्थाएं बेहतर लेकिन परिवहन सुविधा के अभाव में चाहकर भी नहीं भेज पा रहे बच्चे

गुना . दिल्ली के सरकारी स्कूलों की तर्ज पर सरकार ने प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही गुना जिले में 6 सीएम राइज स्कूल खोले हैं। इन स्कूल का संचालन तो शुरू हो गया है। लेकिन गुना को छोड़ अन्य स्कूलों में न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही जरूरी सुविधाएं। ऐसे में यह स्कूल सिर्फ नाम के सीएम राइज कहला रहे हैं। सबसे बड़ी कमी इन स्कूलों में परिवहन सुविधा का अभाव है। जिसके कारण जो अभिभावक इन स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, वे चाहकर भी नहीं भेज पा रहे हैं। बता दें कि शासन ने जब सीएम राइज स्कूल खोलने की घोषणा की थी तब तरह-तरह के सब्जबाग और दावे किए गए थे। यहां तक कहा गया था कि बड़े निजी स्कूलों से भी अच्छे होंगे। जहां पढ़ाई के अलावा खेल, मनोविज्ञान, संगीत से लेकर विद्यार्थी के लिए हर जरूरी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। खास बात यह है कि यह स्कूल केजी से लेकर 12 वीं तक हैं। जहां बच्चों को घर से स्कूल तक लाने ले जाने के लिए बस सुविधा भी उपलब्ध होगी। लेकिन पूरा सत्र खत्म होने को है अब तक प्रशासन की ओर से टैंडर प्रक्रिया तक नहीं हो सकी है। इसकी वजह शासन द्वारा निर्धारित वे शर्तें हैं जो बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी हैं तथा उनका हर हाल में बस ऑपरेटर्स को पालन करना होगा।
बता दें कि सीएम राइज स्कूलों में बस सेवा चालू कराने को लेकर कलेक्टर के आदेश के बाद हाल ही में एक बैठक हो चुकी है। जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी, आरटीओ के अलावा कुछ स्थानीय बस ऑपरेटर्स मौजूद थे। जिसमें अधिकारियों ने बस संचालकों को शासन के नियम निर्देशों से अवगत कराते हुए टैंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कहा। सूत्रों का कहना है कि बस ऑपरेटर्स ने कई शर्तों का पालन न होने की बात कही। जिसमें प्रमुख मुद्दा वह शुल्क था जो बच्चों से लिया जाना है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना था कि शासन ने अधिकतम एक हजार रुपए प्रति बच्चा ही लेने के लिए निर्धारित किया है। ऐसे में बस ऑपरेटर्स का तर्क था कि इतने कम पैसे में कैसे बस संचालन हो पाएगा। क्योंकि एक तरफ बस स्टाफ का खर्चा और दूसरी तरफ डीजल का खर्चा कैसे निकल पाएगा। वहीं वे जिस बस को स्कूल मेंं लगाएंगे उसका दूसरा कोई उपयोग नहीं हो पाएगा। इस तरह से कोई भी बस ऑपरेटर स्कूल में बस लगाने को लेकर तैयार नहीं हुआ।
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5 महीने पहले निकाली थी विज्ञप्ति, तब भी नहीं आया था कोई भी ऑपरेटर
स्कूल के बच्चोंं को घर से लाने ले जाने की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। इसमें बच्चों की सुरक्षा बहुत मायने रखती है। खासकर छोटे बच्चों के अलावा लड़कियों की सुरक्षा। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने न सिर्फ मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों को पूरी तरह से पालन करने पर जोर दिया है बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बस में सभी इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध होना तथा स्टाफ में महिला का होना तथा यूनिफार्म को अनिवार्य किया गया है। इन सभी शर्तों के अलावा बच्चों से लिए जाने वाले शुल्क कम बताकर ऑपरेटर नहीं आना चाहते हैं। इसके अलावा 5 महीने पहले यह अनुबंध सिर्फ एक साल के लिए था, जिस पर ऑपरेटर राजी नहीं थे। लेकिन इसे संशोधित करते हुए अब 5 साल का अनुबंध कर दिया है। लेकिन फिर भी बस ऑपरेटर स्कूलों में बस लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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किसी भी सामान्य बस को नहीं बनाया जा सकता स्कूल बस
ट्र्रांसपोर्ट विशेषज्ञ का कहना है कि किसी भी सामान्य बस को स्कूल बस का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। पहली बात तो स्कूल बस का साइज अन्य यात्री बस से थोड़ा छोटा होता है ताकि वह बच्चों को लेने कॉलोनी की गलियों में प्रवेश कर सके। वहीं बच्चों की सुरक्षा के लिए महिला स्टाफ का होना जरूरी है। जो फुल यूनिफार्म में हो। गति को नियंत्रित करने स्पीड गर्वनर का होना चाहिए। दुर्घटना के समय मदद के लिए पैनिक बटन सहित अन्य सुरक्षा के इंतजाम बेहद जरूरी हैं।
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सुविधाओं के मामले में सबसे बेहतर लेकिन स्टूडेंट की संख्या मात्र 500
जिले के कुल 6 सीएम राइज स्कूलों में सबसे बेहतर गुना का स्कूल है। यह पहले मॉडल स्कूल कहलाता था। जिसे शासन ने जैसे ही सीएम राइज का दर्जा दिया तो इसके पूरे हालात ही बदल गए। मॉडल स्कूल का भवन रंग रोगन के बाद किसी बड़े निजी विद्यालय से कम नहीं लगता। शिक्षण व्यवस्थाएं भी काफी आधुनिक हो गई हैं। बायोमैट्रिक अटैंडेंस लेकर स्मार्ट क्लासेस तथा खेलकूद, संगीत, मनोविज्ञान के भी यहां विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध हैं। इतनी सुविधाओं के बावजूद कुल विद्यार्थियों की संख्या मात्र 500 ही है। जो अन्य सरकारी हासे स्कूल से कम है। हालांकि इतनी सुविधाएं जिले के अन्य सीएम राइज में नहीं है। वहां तो विषयवार पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक तक उपलब्ध नहीं है।
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अब तक सिर्फ 4 स्कूलों को ही नया भवन निर्माण की स्वीकृति
जानकारी के मुताबिक गुना जिले में कुल 6 सीएम राइज स्कूल हैं। इनमें से एक के पास भी खुद का अलग से भवन नहीं है। वर्तमान में गुना का सीएम राइज स्कूल पुराने मॉडल स्कूल के भवन में संचालित है। वहीं अंचल के राघौगढ़, आरोन, बमोरी, फतेहगढ़ तथा चांचौड़ा में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल भवन को ही सीएम राइज बना दिया गया है। वहीं इनमें 4 स्कूलों के लिए नया भवन बनाने की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इनमें गुना, राघौगढ़, चांचौड़ा, बमोरी मेें पीआईयू भवनों का निर्माण करेगी।
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सीएम राइज स्कूलों मेें यह सुविधाएं देना है
शिक्षा की गुणवत्ता को और ज्यादा बेहतर करने के लिए सीएम राइज स्कूल खोले गए हैं। यहां केजी से 12 वीं तक के बच्चों को पढ़ाने उच्च शिक्षा वाले शिक्षकों को रखा जाना है। 4 से 15 किमी तक की दूरी तक बसें चलाई जाना हैं।
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गुना जिले में 6 स्थानों पर हैं सीएम राइज स्कूूल
गुना में 1, बमोरी में 2, आरोन मेें 1, राघौगढ़ और चांचौड़ा में एक-एक
शासकीय उत्कृष्ट उमावि बमोरी
शासकीय उत्कृष्ट उमावि फतेहगढ़
शासकीय बालक उमावि चांचौड़ा
शासकीय मॉडल बालक उमावि गुना
शासकीय उत्कृष्ट उमावि आरोन
शासकीय उत्कृष्ट उमावि राघौगढ़
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धीरे-धीरे सुधार हो रहा है
जिले में इस समय कुल 6 सीएम राइज स्कूल संचालित हैं। इनमें से 4 के लिए नए भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। भवन बनने में समय लगेगा तब तक जो भवन उपलब्ध हैं उन्हीं में यह संचालित होंगे। जहां तक स्टाफ और अन्य सुविधाओं की कमी की बात है तो धीरे-धीरे सब कुछ बेहतर हो रहा है। परिवहन सुविधा के लिए भी हम लगातार प्रयास कर रहे हैं।
चन्द्रशेखर सिसौदिया, डीईओ

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