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शिकारियों का एनकाउंटर किया लेकिन 15 दिन बाद भी नहीं मिले काले हिरण के धड़

मध्यप्रदेश के गुना जिले में हुए काले हिरण शिकार मामले को 15 दिन बीत गए हैं, लेकिन पुलिस शिकार में मारे गए काले हिरण के धड़ नहीं ढूंढ पाई है.

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शिकारियों का एनकाउंटर किया लेकिन 15 दिन बाद भी नहीं मिले काले हिरण के धड़

शिकारियों का एनकाउंटर किया लेकिन 15 दिन बाद भी नहीं मिले काले हिरण के धड़

गुना. मध्यप्रदेश के गुना जिले में हुए काले हिरण शिकार मामले को 15 दिन बीत गए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी शिकारियों का एनकाउंटर करने वाली पुलिस शिकार में मारे गए काले हिरण के धड़ नहीं ढूंढ पाई है, हैरानी की बात तो यह है कि शिकारियों ने पुलिस को कोई सुराग नहीं लगे, इस कारण फरारी काटने ही दौरान ही मोबाइल भी पानी में फेंक दिए थे।

पुलिस हत्याकांड मामले में जिन दो आरोपियाें ने न्यायालय में जाकर सरेंडर किया था, उन्होंने पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। जिसके बाद इस घटनाक्रम से जुड़े कई राज सामने आ सकते हैं। उल्लेखनीय है कि मामले में फरार चल रहे दो आरोपियाें ने 23 मई को गुना न्यायालय में अचानक पहुंचकर सरेंडर कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर गहनता से पूछताछ की। जिसमें घटना वाले दिन से ही गायब पुलिस की 20 कारतूसों की मैगजीन का पता चल गया है। आरोपियों द्वारा बताए गए स्थान से पुलिस ने शिकार में इस्तेमाल किया गया बका जप्त कर लिया है।

आरोपियों ने यह दी महत्वपूर्ण जानकारी

आरोपी विक्की उर्फ दिलशाद और गुल्लू ने पुलिस को बताया है कि घटना के बाद वह जंजाली, पाटन के जंगल में भाग गए थे। फरारी के दौरान वे संजय सागर बांध के आसपास काफी समय तक रहे। पुलिस ने उन कपड़ों को भी जब्त किया है जो वे घटना के समय पहने हुए थे। इसके अलावा आरोपियों के कब्जे से एक बंदूक, लोहे का बका और 20 राउंड की सरकारी मैगजीन भी बरामद की है।

सबूत मिटाने डैम में फेंक दिए मोबाइल

घटना से जुड़े अहम सबूतों में आरोपियोें के मोबाइल हैं। जिन्हें आरोपियाें ने फरारी के दौरान डैम में फेंक दिए। पुलिस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने इन मोेबाइलों को डेम में खोजने का प्रयास किया, लेकिन वहां इतना ज्यादा पानी है कि उन्हें ढूंढा नहीं जा सका। पुलिस का मानना है कि आरोपियों के मोबाइल से बहुत कुछ ऐसी जानकारी मिल सकती थी जो अन्य सबूतों से नहीं मिल पाएगी।

सरेंडर करने से पहले आरोपियाें ने बनाए थे वीडियो

पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिन आरोपियाें ने अचानक न्यायालय में जाकर सरेंडर किया था, उन्होंने सरेंडर से पहले दो वीडियो बनाए हैं। जिनमें एक वीडियो 24 सेकंड का दूसरा 57 सेकंड का है। इनमें से 24 सेकंड का वीडियो सरेंडर के बाद सामने आ गया था लेकिन 57 सेकंड वाला वीडियो अभी सामने नहीं आया है। अब पुलिस वीडियो के साथ-साथ वीडियो बनाने वाले की तलाश कर रही है।

काले हिरणों और मोर के धड़ नहीं मिल पाए हैं

जहां एक और कोर्ट में आरोन में हुए मुठभेड़ का मामला पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर अभी तक वहां मारे गए काले हिरणों और मोर के धड़ न तो पुलिस को मिल पाए हैं और ना ही वन विभाग ढूंढ पाया है। इन जानवरों को मार कर शिकार करके ले जा रहे शिकारियों की पुलिस से मुठभेड़ में 3 जाबांज पुलिस कर्मियों की शहादत के बदले 3 शिकारियों के मुठभेड़ में मार गिराए जाने, 5 को अरेस्ट करने और 2 के सरेंडर के बाद भी एक सवाल जस का तस है। तीन काले हिरणों के धड़ आखिर कहां गायब हो गए? 14 मई को मुठभेड़ स्थल पर पहुंची पुलिस को तीनों शहीद पुलिस कर्मियों के शव के अलावा मौके पर शिकार करके लाये गए 4 हिरणों के सिर, 1 धड़ बिना सिर का एवं 1 सिर लगा हुआ हिरण, 1 मोर मरे मिले थे, लेकिन 3 काले हिरणों के धड़ नहीं मिले थे। जब आस-पास तमाम ढूंढा ढकोरी के बाद भी ये धड़ नहीं मिले और वन विभाग की स्थानीय टीम भी खाली हाथ रही तब नर्मदापुरम और सागर से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जवान और स्नाइफर डॉग स्क्वॉड बुलाए गए। सूत्र बताते हैं कि जमीन में गड़े जानवर को भी सूंघ कर जगह बता देने वाले एक्सपर्ट डॉग ‘गैलीलियो’ और ‘टीना’ भी जंगल में जगह जगह सूंघते सांघते फिरते रहे, लेकिन धड़ नहीं मिलने पर वो भी हार मान गए। इससे यह रहस्य गहरा गया है कि आखिर वो 3 धड़ कौन ले गया? शिकार किस जगह किया गया? शिकार के बाद वन्य प्राणियों को कहां जिवा (धारदार हथियार से गर्दन हलाल करना) किया गया? एफआइआर के मुताबिक मुठभेड़ का घटना स्थल ग्राम फतेहपुर तिराहा, गैलोन-सगाबरखेड़ा रोड है। मुठभेड़ में शहीद एसआइ राजकुमार जाटव को टीआइ से सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ बदमाश भादौर तरफ से हिरणों का शिकार करके मोटरसाइकिलों पर रखकर सगाबरखेड़ा होते हुए फतेहपुर के जंगल तरफ जाएंगे। एफआइआर के इस मजमून से भी जाहिर है कि शिकार भादौर गांव की तरफ या उसके आस पास के इलाके में हुआ, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या बदमाशों की संख्या 8 से भी ज्यादा थी? और क्या बाकी बदमाश मुठभेड़ स्थल से या पहले ही हिरणों के धड़ ले भागे।

मुठभेड़ में सीधे शामिल बताए जा रहे 3 शिकारियों नौशाद किसकी गोली से मरा किसी भी एफआइआर में स्पष्ट नहीं है। शहजाद और जहीर का पुलिस एनकाउंटर कर चुकी है। बाकी के 5 आरोपियों को भी शिकार में शामिल होने का दावा कर जिंदा पकड़ लिया है। शिकारी नौशाद का शव और पुलिस की इंसास राइफल छुपाने के 2 आरोपियों को भी जिंदा पकड़ा है। आरोपियों का रिमांड लेकर पूछताछ भी की जा चुकी है। बावजूद इसके, इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका है कि शिकार किए गए 3 काले हिरणों के धड़ों को जमीन खा गई या फिर आसमान निगल गया, क्योंकि यदि पकड़े गए आरोपी शिकार में शामिल थे तो कम से कम उन्हें तो इस बात का पता होगा ही कि बाकी के तीन धड़ कहां हैं। अभी तक इस बारे में कोई अधिकृत जानकारी भी सामने नहीं आई है। इस संबंध में जानने के लिए डीएफओ हेमंत रायकवार को मोबाइल लगाया तो उनका मोबाइल आउट ऑफ कवरेज एरिया आता रहा। कहीं ऐसा तो नहीं कि शिकारियों की संख्या ही 8 से ज्यादा रही हो और बाकी के शिकारी मुठभेड़ स्थल से पहले ही किसी और रास्ते से 3 धड़ समेत भाग गए हों, क्योंकि सिर्फ 8 शिकारियों के 5 भारी भरकम मरे हिरणों को जिनमें से 4 के सिर और धड़ अलग अलग हों और एक मोर को कुल 4 मोटर साइकिलों पर लेकर जाने वाली बात प्रेक्टिकल नहीं लगती। कहीं ऐसा तो नहीं कि 14 मई की रात के अंधेरे में 03.15 बजे 3 जवानों की शहादत से सन्निपात में आए विभाग का आगे की स्थिति संभालने के फेर में इस और ध्यान ही नहीं गया हो! 14 मई की सीधी मुठभेड़ के बाद बाकी की मुठभेड़ों, कार्रवाई में मुस्तैदी भरपूर दिखाई है।

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3 आरोपियों की मौत, शेष गिरफ्तार

13-14 मई की रात आरोन क्षेत्र में शिकारी और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें तीन पुलिसकर्मी मौके पर ही शहीद हो गए थे। एक शिकारी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। दो एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। वहीं शेष आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। फरार चल रहे दो आरोपियों ने 23 मई को जिला न्यायालय में सरेंडर किया था। अगले दिन आरोन कोर्ट ने दोनों का दो दिन का रिमांड दिया। इसके बाद गुरुवार को दोनों का पुलिस रिमांड खत्म होते ही जेल भेज दिया गया है।

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