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अंचल में कॉलेज तो खोल दिए लेकिन विषय और फैकल्टी का अभाव

पत्रिका फोकस : मजबूरी में गांव के बच्चों को शहर में किराए के कमरों में रहकर करनी पड़ रही पढ़ाई- पीजी कॉलेज गुना में क्षमता से अधिक स्टूडेंट, बैठने तक को पर्याप्त जगह नहीं- नई बिल्डिंग बनी लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पा रहावर्तमान में गुना पीजी कॉलेज में 16 हजार 848 स्टूडेंट अध्ययनरत

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अंचल में कॉलेज तो खोल दिए लेकिन विषय और फैकल्टी का अभाव

अंचल में कॉलेज तो खोल दिए लेकिन विषय और फैकल्टी का अभाव

गुना. जिले में तहसील स्तर पर शासन ने कॉलेज तो खोल दिए हैं लेकिन यहां शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। जिसके अभाव में ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी जिला मुख्यालय आकर किराए के कमरों में रहकर पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसे में उन्हें अतिरिक्त खर्चा भी उठाना पड़ रहा है।
वहीं गुना के पीजी कॉलेज में स्टूडेंट की संख्या 16 हजार के पार कर गई है। ऐसे में इतने स्टूडेंट को एक साथ बिठाने के लिए कॉलेज भवन में इतनी जगह तक नहीं बची है। सबसे ज्यादा परेशानी परीक्षा के दौरान आती है क्योंकि सभी विद्यार्थियों को एक साथ बिठाना अनिवार्य हो जाता है। ऐसे समय में गैलरी में बच्चों को बिठाना पड़ता है। इस परेशानी को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने नया भवन भी बनवाया लेकिन वह वर्तमान में कालेज के उपयोग में नहीं आ पा रहा है। क्योंकि प्रशासन ने इस भवन को कोविड अस्पताल के लिए आरक्षित किया है।
जानकारी के मुताबिक सरकार की मंशा थी कि ग्रामीण क्षेत्र के स्टूडेंट को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए ज्यादा दूरी न तय करनी पड़े। इसलिए जिले में तहसील मुख्यालय पर शासकीय कॉलेज खोले गए। जिनके संचालन के लिए भवन भी मुहैया कराए गए हैं। लेकिन चांचौड़ा कुंभराज के कॉलेज भवन काफी छोटे हैं। जिनमें एडमिशन लेने वाले सभी बच्चे एक साथ नहीं बैठ पाते हैं। वहीं 12 वीं के बाद जिन बच्चों को जो विषय लेना होते हैं वह कॉलेज में नहीं हैं। इसके अलावा विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर की भी कमी है। इन सभी कारणों के चलते ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे गुना में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
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अपना घर छोड़ने की यह भी एक मजबूरी
गुना के पीजी कॉलेज में पढ़ने वाले अधिकांश स्टूडेंट ग्रामीण क्षेत्र के हैं। इनसे जब पूछा गया कि आपके गांव के नजदीक में सरकारी कॉलेज है तो है फिर आपने वहां एडमिशन क्यों नहीं लिया। जिसके जवाब में उनका कहना था, यहां के कॉलेज में पहले तो सभी विषय नहीं हैं, जो वे लेना चाहते हैं। दूसरी वजह पीएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए तहसील स्तर पर कोई कोचिंग या अन्य सुविधा नहीं है। इसी वजह से उन्हें गुना में किराए के भवनों में रहकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिसमें उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दो साल पहले जब कोरोना आया था तब मकान खाली करवा लिए थे। अब फिर से कोरोना ने दस्तक दे दी है। ऐसे में उन्हें फिर से कमरा खाली कराने का डर सताने लगा है। वहीं अधिकांश मकान मालिक स्टूडेंट को कमरा नहीं देते हैं। कॉलेज से बहुत दूर मकान लेने पर आने जाने का खर्चा भी बहुत आता है।
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किस कॉलेज में क्या कमी
कुंभराज और चांचौड़ा के कॉलेज में पूरे कोर्स नहीं है। चांचोडा में जहां बीकॉम, एमए, बीएससी और बीए हैं। वहीं कुंभराज में बीए है लेकिन एमए और बीएससी नही है। शासकीय कॉलेज आरोन में बीए है। शासकीय कस्तूरबा गर्ल्स कॉलेज गुना में बीए, एमए ही है। बीएससी बीकॉम नहीं है। ऐसे में छात्राओं को मजबूरीवश पीजी कॉलेज गुना में ही एडमिशन लेना पड़ रहा है। शासकीय डिग्री कॉलेज राघौगढ़ में बीए है। बमोरी में अभी कॉलेज का भवन ही नहीं है।
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जगह के अभाव में निजी कॉलेज में बनाना पड़ा परीक्षा सेंटर
गुना में रहकर बीए की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट की संख्या साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। जिसका नमूना एडमिशन के दौरान कॉलेज प्रांगण में स्टूडेंट की लंबी लाइन के रूप में हम पहले ही देख चुके हैं। वहीं दूसरा उदाहरण हाल ही में बीए के परीक्षा के दौरान सामने आया। जब परीक्षा देने वाले स्टूडेंट की संख्या इतनी ज्यादा हो गई कि अकेले पीजी कॉलेज में परीक्षा कराना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में मजबूरीवश शहर के एक निजी कॉलेज में परीक्षा सेंटर बनाना पड़ा। जहां एक नहीं बल्कि दो बार नकल के प्रकरण सामने आए। जिस स्टूडेंट को परीक्षा देनी थी उसकी जगह दूसरा व्यक्ति पेपर देते पकड़ा गया।
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इनका कहना
तहसील स्तर पर कॉलेज होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश बच्चे गुना के पीजी कॉलेज में ही एडमिशन ले रहे हंै। इसलिए यहां स्टूडेंट की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है। पीजी कॉलेज गुना में जगह के अभाव की वजह से ही नई बिल्डिंग बनवाई है लेकिन बनने के बाद से ही कोविड अस्पताल के लिए आरक्षित है। जहां तक कस्तूरबा गर्ल्स कॉलेज सहित तहसील के अन्य कॉलेज में विषय और फैकल्टी का सवाल है तो उन्हें पूरा करने प्रपोजल ऊपर भेजा है।
बीके तिवारी, प्राचार्य पीजी कॉलेज

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