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तहसीलदार और एसडीएम की अध्यक्षता में बनी समिति रोकेगी बाल विवाह

कलेक्टर ने बाल विवाह के संबंध में ली अधिकारियों की बैठककहा, बाल विवाह होते मिला तो आयोजकों के साथ बैंड वाले, हलवाई, टेंट हाउस वालाें पर भी कार्रवाई

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तहसीलदार और एसडीएम की अध्यक्षता में बनी समिति रोकेगी बाल विवाह

तहसीलदार और एसडीएम की अध्यक्षता में बनी समिति रोकेगी बाल विवाह

गुना। अक्षय तृतीया व अन्य विवाह समारोह में बाल विवाह रोकने के लिए कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान बाल विवाह रोकने के लिए विकासखण्ड स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में एवं शहरी क्षेत्र में एसडीएम की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया गया है। उक्त समिति में एसडीओपी, जनपद सीईओ, परियोजना अधिकारी आईसीडीएस, बीआरसी, बीएमओ एवं समिति में थाना प्रभारी शामिल है।
कलेक्टर द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि जिले में कोई बाल विवाह न हो इसके लिए दलों द्वारा नियमित भम्रण किया जाए तथा ग्राम स्तर के अमले को सक्रिय किया जाए। बाल विवाह रोकने के लिए पुलिस का भी सहयोग लिया जाए। साथ ही विवाह समारोह आयोजित करने वाले आयोजकों से अनुविभागीय अधिकारियों द्वारा इस आशय का शपथ पत्र लिया जाए कि सामूहिक विवाह समारोह से कोई भी बालक जिसकी आयु 21 वर्ष से कम है तथा बालिका की आयु 18 वर्ष से कम है, समारोह में शामिल न किया जाए। आयोजक बालक-बालिकाओं के आयु संबंधी प्रमाण पत्र लेना सुनिश्चित करें।
यदि समारोह में बाल विवाह पाया जाता है तो आयोजकों पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी, साथ ही सेवाप्रदाताओं से अपील की कोई भी सेवा प्रदाता बैंड वाला, हलवाई, लाइट, टेट हाऊस, पंडित, मौलवी आदि बाल विवाह कार्यक्रम में अपनी सेवाएं न दें अन्यथा नियमानुसार उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह होने पर आयोजको के विरूद्व 2 वर्ष की सजा एवं एक लाख रुपए के अर्थदण्ड का प्रावधान है। कलेक्टर नोबल ए. ने अपील करते हुए कहा कि बाल विवाह न करें। बच्चों को पढाएं, लिखाएं सक्षम बनाएं तथा कानूनी उम्र प्राप्त करने के पश्चात ही विवाह कराएं।