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सुविधा बनी असुविधा, जैसे-तैसे एक मात्र पैसेंजर ट्रेन नागदा-बीना चालू हुई लेकिन उसमें भी सफर करना मुश्किल

- स्टेशन पर टिकट वितरण करने एक मात्र विंडो चालू, वह भी ट्रेन आने से कुछ समय पहले ही खुलती है- अधिकांश यात्री चाहकर भी नहीं ले पा रहे टिकट- अन्य ट्रेन न होने व वैकल्पिक आवागमन की सुविधा के अभाव में बिना टिकट यात्रा करने को मजबूर यात्री- स्टेशन पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं का भी अभाव

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सुविधा बनी असुविधा, जैसे-तैसे एक मात्र पैंसेंजर ट्रेन नागदा-बीना चालू हुई लेकिन उसमें भी सफर करना मुश्किल

सुविधा बनी असुविधा, जैसे-तैसे एक मात्र पैंसेंजर ट्रेन नागदा-बीना चालू हुई लेकिन उसमें भी सफर करना मुश्किल

गुना. कोरोना संक्रमण से हर सेक्टर प्रभावित हुआ है। जिसका सबसे पहला प्रभाव आवागमन के साधनों पर पड़ा। यही कारण है कि सरकार ने संक्रमण के फैलाव और उसकी चैन तोडऩे सबसे पहला कदम यातायात व्यवस्था पर ही उठाया था। जिसके तहत रेल आवागमन को बंद कर दिया गया था। जो लगभग तीन साल बाद भी बहाल नहीं हो सका है। जिसका खामियाजा हर वर्ग के यात्रियों को असुविधा और आर्थिक रूप से भुगतना पड़ रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि रेल से कहीं की भी यात्रा न सिर्फ बेहद सस्ती पड़ती है बल्कि परिवार सहित जाने में सुविधाजनक भी है। लेकिन कोविड संकट के बाद से अधिकांश ट्रेनें नहीं चल रही हैं। जो वर्तमान में इक्का दुक्का चालू भी हैं तो उनका लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। इसकी प्रमुख वजह है टे्रनों का सही रुट न होना तथा जरूरी स्टेशन पर ट्रेन का स्टॉपेज न होना। यात्रियों की परेशानी यहीं तक सीमित नहीं है, क्योंकि कुछ समस्याएं तो रेलवे प्रशासन के उदासीन रवैए ने ही पैदा की हैं।
जानकारी के मुताबिक हाल ही में रेलवे ने नागदा-बीना पैसेंजर ट्रेन चालू की है। जो गुना से जाने वाली कुल ट्रेनों में इकलौती पैंसेजर है। जो सुबह 10 बजे गुना से निकलती है। इसके लिए टिकट स्टेशन से लिया जा सकता है लेकिन प्रबंधन ने टिकट वितरण के लिए एक मात्र विंडो ही चालू की है। यही कारण है कि यात्रियों को टिकट लेने में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को बड़ी संख्या में यात्री गुना स्टेशन पहुंचे। लेकिन उन्होंने जब देखा कि टिकट विंडो नहीं खुली है, बताया गया कि ट्रेन आने के कुछ समय पहले ही खोली जाएगी। यह जानकारी लगते ही अधिकांश यात्रियों की धड़कनें बढ़ गईं। क्योंकि यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि लाइन सीढिय़ों तक जा पहुंची। जैसे ही टिकट विंडो ओपन हुई तो टिकट लेने हौंचपौच की स्थिति निर्मित हो गई। आधी लाइन के यात्री ही टिकट ले पाए थे, इसी दौरान नागदा-बीना ट्रेन गुना स्टेशन पर आ गई। यात्रियों की संख्या ज्यादा होने व विंडो एक ही होने के कारण अधिकांश यात्री टिकट नहीं ले पाए। यात्रियों ने बताया कि उन्हें जरूरी काम से जाना है तथा उक्त गंतव्य स्थल तक जाने अन्य कोई आवागमन साधन भी नहीं है। इसलिए उन्हें बिना टिकट के ही ट्रेन में बैठना पड़ेगा। ऐसे में वे कोशिश करेेेंगे कि आगामी जिस स्टेशन पर ट्रेन रुकेगी, वहां से किसी तरह टिकट ले लें। हालांकि उन्हें इस दौरान बिना टिकट पकड़े जाने का डर बना रहेगा।
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स्टेशन पर इन समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा यात्रियों को
कोविड संकट से पहले गुना स्टेशन से करीब 60 ट्रेन चलती थीं। इनमें सुपरफास्ट ट्रेन के अलावा पैसेंजर भी शामिल थी। लेकिन वर्तमान में सिर्फ एक ही पैसेंजर नागदा-बीना ही चालू है। वहीं शेष वीकली एक्सप्रेस ट्रेन चालू तो हैं लेकिन उनका रुट बदल दिया गया है तथा बड़ी संख्या में स्टॉपेज बंद कर दिए हैं। इसी वजह से जो टे्रेनें चालू हैं उनका लाभ भी यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है।
अशोकनगर के पॉलीटैक्निक कालेज में गुना, मुंगावली तथा आसपास के गांव के युवा प्रतिदिन ट्रेन से पढऩे आते थे। सरकारी और निजी संस्थाओं में कार्यरत नौकरीपेशा लोग प्रतिदिन अपडाउन करते थे। दूसरे जिले में रहने वाले लोग गुना में नौकरी करते हैं, जो अब ट्रेन सुविधा न मिलने से अपने घर महीने में कभी कभार ही जा पा रहे हैं। क्योंकि बस व निजी साधन से किराया बहुत महंगा पड़ रहा है।
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मॉडल स्टेशन का तमगा लेकिन दिव्यांगों के लिए न रैंप व लिफ्ट
कोरोना काल के दौरान गुना रेलवे स्टेशन ने मॉडल स्टेशन का तमगा हासिल कर लिया था। लेकिन आज तक यहां सामान्य यात्रियों तो क्या दिव्यांगों के लिए भी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। इनमें प्रमुख है रैंप व लिफ्ट की सुविधा। यहां बता दें कि इस मुद्दे को सबसे पहले पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया। जिसके बाद रेलवे ने लिफ्ट निर्माण का कार्य तो शुरू कर दिया। यहां तक कि प्लेट फार्म नंबर एक पर काम भी पूरा हो गया लेकिन दूसरे प्लेट फार्म पर काम कई महीनों से अटका हुआ है। वहींं दिव्यांगजनों को एक प्लेट फार्म से दूसरे पर जाने रैंप भी नहीं है। ऐसे में उन्हें न सिर्फ कष्टदायक स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। बल्कि रेलवे कानून का उल्लंघन कर पटरी पार कर दूसरी ओर जाना पड़ता है।
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कौनसी ट्रेन आएगी, कब जाएगी नहीं मिलती जानकारी
गुना स्टेशन पर यात्रियों के लिए सबसे जरूरी चीज ट्रेनों के बारे जानकारी होना है। लेकिन प्रबंधन द्वारा इस काम में लापरवाही बरती जा रही है। पूछताछ काउंटर पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बिठा दिया जाता है, जो यात्रियों को ट्रेनों के संबंध में सही जानकारी नहीं दे पाता। वहीं स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक साइन बोर्ड का अभाव है। जिससे एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होने वाले व उतरने वालों को बोगी की जानकारी नहीं मिल पाती। वर्तमान में कैंटीन भी बंद रहती है। प्लेट फार्म नंबर एक की लंबाई काफी ज्यादा हो गई है। जहां टीनशेड का अभाव है। धूप और बारिश में यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ता है।
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मजदूर वर्ग से रोजगार छिना
गुना जिले के सैकड़ों मजदूर ऐसे थे जो ट्रेन की वजह से दूसरे जिले से लेकर कई राज्यों में मजदूरी करने जाते थे। क्योंकि उन्हें रेल से आने जाने में कोई परेशानी नहीं थी। कई मजदूर सुबह जाते थे और रात में वापस आ जाते थे। लेकिन अब बस में किराया महंगा और जगह न मिल पाने से वह मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे हैं।
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स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यवसाय पर भी असर
इंदौर, भोपाल, कोटा से गुना के लोगों का खास जुड़ाव है। यहां गुना के लोग चिकित्सा, हायर एजूकेशन तथा व्यापार के काम से आते जाते हैं। लेकिन वर्तमान में यहां तक पहुंचने के लिए ट्रेन सही समय पर उपलब्ध नहीं हैं। जिसके कारण इस वर्ग को काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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यात्रियोंं की पीड़ा
मुझे जरूरी काम परिवार सहित सारंगपुर जाना था। जिसके लिए मैं समय से स्टेशन भी पहुंच गया। लेकिन विंडो ओपन नहीं थी। जब इसे खोला गया तो बहुत ज्यादा भीड़ हो गई। जब तक नंबर आया तब तक ट्रेन आ गई, जिसके कारण वह टिकट नहीं ले पाया। यह स्थिति सिंगल विंडो की वजह से बनी। मजबूरी में बिना टिकट यात्रा करना पड़ा। इस दौरान पूरे समय पकड़े जाने का डर लगा रहा।
आशीष, यात्री