
एक स्टाफ नर्स के भरोसे जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र
गुना. सभी तरह के दिव्यांगों व अस्थि रोग से पीडि़त व्यक्तियों की मदद व उनके उचित उपचार के लिए सरकार ने जिला अस्पताल परिसर में जिला विकलांग एवं पुनर्वास केंद्र के संचालन के लिए नवीन भवन वर्ष 2013 में 10 लाख रुपए की लागत से बनवाया था।
यही नहीं लाखों रुपए के उपकरण भी खरीदकर रख लिए गए। लेकिन भवन लोकार्पण के 6 साल बाद भी जरुरतमंद इसके लाभ से वंचित बने हुए हैं। क्योंकि शासन आज तक यहां आवश्यक स्टाफ की पदस्थापना नहीं करवा सका है। ऐसे में लाखों रुपए की मशीनें शोपीस बनकर रह गई हैं।
जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल परिसर में मेटरनिटी विंग के सामने जिला विकलांग एवं पुनर्वास केंद्र संचालन के लिए 10 लाख रुपए की लागत से नया भवन बनाया गया। जिसका लोकार्पण 9 मई 2013 को तत्कालीन कलेक्टर संदीप यादव ने किया।
लोकार्पण के पश्चात लाखों रुपए की मशीनें भी खरीद कर रख ली गई हैं। लेकिन इन मशीनों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। क्योंकि पुनर्वास केंद्र के संचालन के लिए जरूरी 11 पदों पर आज तक किसी की भी पदस्थापना नहीं हो सकी है। वहीं इसके संचालन के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा बजट भी हर साल लैप्स हो रहा है।
वर्तमान में जिला विकलांग एवं पुनर्वास केंद्र का संचालन सामाजिक न्याय विभाग व रेडक्रास द्वारा किया जा रहा है। जहां जिला अस्पताल प्रबंधन की मदद से एक स्टाफ नर्स ही इस केंद्र को संचालित कर रही है। फिजियोथैरेपिस्ट सहित अन्य विशेषज्ञों के न होने से अस्थि रोग से पीडि़त मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
इसलिए जरूरी है विकलांग पुनर्वास केंद्र
शिविर दृष्टिकोण के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों का सर्वेक्षण एवं उनकी पहचान करना। विकलांगता की रोकथाम, शीघ्र पता लगाना। सहायक उपकरणों की आवश्यकता, सहायक उपकरणों की व्यवस्था, फिटमेंट, सहायक उपकरणों की जांच, मरम्मत, विकलांगता प्रमाण पत्र, बस पास और अन्य रियायत, सुविधाएं सुगम करना।
सरकारी व निजी संस्थाओं से रैफरल और शल्य सुधार की व्यवस्था करना। स्वरोजगार के लिए बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से ऋण की व्यवस्था करना। विकलांग व्यक्तियों, उनके माता पिता एवं परिवार के सदस्यों को सलाह देना।
स्थानीय संसाधन को ध्यान में रखते हुए विकलांग व्यक्तियों के लिए उपयुक्त व्यवसाय की पहचान करना। व्यासायिक प्रशिक्षण का डिजाइन बनाकर उपलब्ध करवाना। उपयुक्त नौकरी की पहचान कर आर्थिक रूप से स्वनिर्भर बनाया जा सके।
6 साल बाद भी यह पद खाली
01. क्लीनिकल साईक्लोजिस्ट
02. सीनियर फिजियोथैरेपिस्ट/आक्यूपेशनल थेरापिस्ट
03. सीनियर प्रौस्थोटिस्ट/आर्थोंटिस्ट
04. सीनियर स्पीच थेरापिस्ट/ऑडियोलॉजिस्ट
05. एडमिनिस्टे्रटिक ऑफिसर
06. प्रौस्थोटिस्ट/आर्थोटिस्ट (टेक्निशियन)
07. ईयर मोल्ड टेक्निशियन
08. मोबिलिटी इन्स्टक्टर
09. मल्टीपरपज रिहेब्लीटेशन
10. विशेष शिक्षक (मेंटल रिटाडेंशन/ऑटिज्म)
11. अटेंडेंट/प्यून/मैसेंजर
Published on:
23 Dec 2019 10:17 am
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