heatwave in central and north India: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती प्रणाली के कारण उत्तर और मध्य भारत में गर्मी का असर बढ़ेगा। अगले दिनों में तापमान तेज़ी से बढ़ेगा और लू चलने की संभावना है।
heatwave in central and north India: गर्मी में बदले मौसम का असर मध्य प्रदेश पर पड़ रहा है। इस वजह से रातें और गर्म हो सकती है और दिन भी तेज गर्मी का सामना करना पड़ेगा। दरअसल एक ट्रफ उत्तरी बिहार से लेकर उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश तक झारखंड और ओडिशा होते हुए 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैली हुई है। वहीं दक्षिण मध्यप्रदेश के मध्य क्षेत्रों में भी एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है।
इस चक्रवाती परिसंचरण से एक ट्रफ रेखा विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर आंतरिक कर्नाटक होते हुए दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तक फैली हुई है, जो समुद्र तल से 1.5 किमी ऊपर तक विस्तारित है। इस कारण से दक्षिण पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे तमिलनाडु के ऊपर भी एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके असर से अगले 24 घंटे में पश्चिम मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों मैं रातें सामान्य से ज्यादा गर्म रह सकती हैं।
वहीं बादल बारिश का दौर थमते ही गुना में पारा चढ़ने लगा है और तेज धूप का अहसास होने लगा है। बुधवार के बाद से ही गुना सहित ग्वालियर, चंबल और इंदौर संभाग के जिलों में लू का असर देखने को मिलेगा। दिन का तापमान 40-42 डिग्री और रात का तापमान 20-24 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है।
अप्रैल के तीसरे सप्ताह में गुना में न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिसे व अधिकतम 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। इस दौरान लू चलने और कहीं कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल के चौथे सप्ताह में गुना में पारा 43-45 डिग्री जबकि इंदौर, उज्जैन-भोपाल आदि में 41 से 44 डिग्री तापमान रह सकता है। बंगाल क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के चलते हीटवेव और दिन-रातें भी गर्म रहने का अनुमान है।
वर्तमान में हवा का रुख उत्तरी एवं उत्तर-पूर्वी बना हुआ है। पश्चिमी राजस्थान और उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात और दक्षिण मध्य प्रदेश के मध्य में हवा के ऊपरी भाग में भी एक चक्रवात है। इस चक्रवात से लेकर दक्षिण पश्चिम बंगाल तक एक द्रोणिका बनी हुई है, जो छत्तीसगढ़, ओडिशा से होकर जा रही है। इसी चक्रवात से दूसरी द्रोणिका कर्नाटक तक बनी हुई है। इसके असर से गुना में तापमान बढ़ेगा और 2-3 दिन लू चलेगी। हालांकि एक नए पश्चिमी विक्षोभ के हिमालयीन क्षेत्र में सक्रिय होने की संभावना है। गर्मी बढ़ते ही मौसमी फलों की मांग बढ़ गई है।