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जल जीवन मिशन और अमृत सरोवर योजना जिले में बढ़ाएगी भू-जल स्तर

-अब हर साल नहीं करने होंगे नए ट्यूबवैल उत्खनितसरकारी और निजी बोरों की संख्या भी घटेगी, पानी के अपव्यय में आएगी कमीजिन क्षेत्रों में पिछले कई सालों से जल स्तर गिर रहा वहां बनाए जा रहे तालाबपीएचई विभाग हर साल गर्मी में जल संकट दूर करने कराता है 100 से 150 नवीन बोर

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जल जीवन मिशन और अमृत सरोवर योजना जिले में बढ़ाएगी भू-जल स्तर

जल जीवन मिशन और अमृत सरोवर योजना जिले में बढ़ाएगी भू-जल स्तर

गुना. जल संकट के मामले में गुना जिला सरकारी आंकड़ों में भले ही पिछले काफी समय से ग्रीन जोन में चल रहा है। लेकिन पीएचई विभाग द्वारा हर साल दर्ज किए जा रहे भू-जल स्तर के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। जिसमें साफ नजर आ रहा है जिले के बमोरी ब्लॉक में तेजी से भू-जल स्तर घट रहा है। इसके अलावा अन्य ब्लॉक में भी कई ऐसे इलाके चिन्हित किए गए हैं, जहां भू-जल स्तर की स्थिति चिंताजनक है। इसी तरह का डेटा जब हर जिले से सरकार के पास गया तब शासन हरकत में आया और जल संवर्धन के लिए जल जीवन मिशन और अमृत सरोवर योजना चालू करनी पड़ी हैं। इन दोनों योजनाओं में प्रदेश के अन्य जिलों के साथ गुना भी शामिल है। जहां अमृत सरोवर योजना के तहत कुल 84 तालाब बनाए जाने हैं। इनमें सबसे अधिक बमोरी क्षेत्र में 25 तालाब हैं। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत जिले के प्रत्येक ग्राम में नलजल योजना के माध्यम से हर घर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन दोनों ही योजनाओं पर जिले में काम शुरू हो चुका है। कई तालाब बारिश से पहले पूर्ण हो जाएंगे। इस तरह यह दोनों ही योजना जिले के भू-जल स्तर को बढ़ाने तथा जल संरक्षण में बेहद मददगार साबित होंगी।
यहां बता दें कि पीएचई विभाग के आंकड़े बताते हैं कि गुना जिले में बीते दो सालों में ही बड़ी तेजी से भू-जल स्तर में गिरावट आई है। जिसके कारण सबसे ज्यादा हैंडपंपों ने दम तोड़ा है। एक समय था जब ग्रामीण अंचल की आधी से ज्यादा आबादी हैंडपंप पर ही निर्भर थी। गर्मी के दिनों में जिन हैंडपंपों का पानी नीचे चला जाता था उनमें पाइपों की संख्या बढ़ा दी जाती थी। लेकिन जिस तेजी से जल स्तर काफी नीचे गया है उस स्थिति में हजारों हैंडपंप अनुपयोगी होकर रह गए हैं। फिर चाहे आबादी वाला क्षेत्र हो या फिर स्कूल और आंगनबाड़ी परिसर में लगे हैंडपंप। पेयजल संकट को दूर करने के लिए विभाग ने सभी जगह नए ट्यूबवैल लगवाए। इसी तरह शहर से लेकर गांव में जहां भी जल संकट उपजा वहां उसे दूर करने नए-नए बोर करवाए गए। यह सिलसिला पिछले काफी समय से जारी है। पीएचई विभाग का कहना है कि उन्हें हर साल 100 से 150 बोर करवाना पड़ते हैं। लेकिन जैसे ही जिले के प्रत्येक ग्राम में जल जीवन मिशन के तहत नलजल योजना शुरू हो जाएंगी। साथ ही कम जल स्तर वाले गांवों में अमृत सरोवर बन जाएंगे तो यह समस्या नहीं आएगी।
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अभी इस तरह हो रहा पानी का दोहन
गर्मी का सीजन शुरू होते ही प्र्रशासन भले ही नवीन बोर उत्खनन पर रोक लगा देती है लेकिन गर्मी बीतने के बाद जैसे ही प्रतिबंध हटता है तो नए बोर होना शुरू हो जाते हैं। लोग अपने घरों में निजी बोर तथा किसान अपने खेतों पर ट्यूबवैल लगवाते हैं। चूूंकि यह बोर निजी होते हैं इसलिए वे पानी का जमकर दोहन करते हैं। वर्तमान में शहर से लेकर गांव में ऐसे हर घर में बोर हैं जो बोर उत्खनित कराने में आर्थिक रूप से सक्षम हैं।
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ुगुना विकासखंड के इन गांवों में गिर रहा जल स्तर
मझोला, मुसरेडी, चकदेवपुर, उदयपुरी, जालमपुर, सिरसी, लाड़ाखेड़ा, पुरापोसर, बिनख्याई, बिलोनिया, पाज, कंचनपुरा, गढ़लागिर्द, जैतपुरा, सतनपुर, ढुरढुरू, लोहपाल, सिरसी, भिलेरा आदि गांव में अक्टूबर 2020 तक औसत जल स्तर 28.7 मीटर था जो मार्च 2022 में 42.6 मीटर तक पहुंच गया।
चांचौड़ा विकासखंड के यह गांव
भमावद, सानई, ऊपरी, बरखेड़ाकला, घोरलाखेड़ी, बडागांव, पाखरियापुरा, लखनवास, अरन्या, वटावदा, मोरियाखेड़ी आदि गांव में जल स्तर 38.10 मीटर तक पहुंच चुका है।
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सिंचाई से लेकर पेयजल संकट होगा दूर
बमोरी और राजस्थान सीमा से सटे जिन गांवों में तालाब निर्माण कराया जा रहा है। यहां के ग्रामीणों ने हाल ही में कलेक्टर को बताया था कि गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि वे चाहकर भी न तो खेती कर पाते हैं और न ही उन्हें पीने का पानी आसानी से मिल पाता है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में उन्हें रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में जाना पड़ता है। लेकिन तालाब निर्माण का काम शुरू होने से उन्हें सबसे पहला फायदा मनरेगा के तहत रोजगार मिलने का हुआ। वहीं दूसरा फायदा तालाब पूर्ण होने के बाद पानी की कमी दूर होगी, जिससे वे खेती कर पाएंगे।
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विकासखंड बमोरी में जल स्तर चिंताजनक
ग्राम अक्टूबर 2021 मार्च 2022 मई 2022
कर्राखेड़ा 60 80 90
देहरी 49 69 75
ेगेहूंखेड़ा 38 70 72
चीतोड़ा 51 81 90
काबर 29 59 66
भिंडरा 52 90 96
भैंसाटोरी 30 52 59
झिरी 28 59 68
खुटियारी 60 79 82
बांसखेड़ी 31 57 62
झागर 32 56 70
भटोदिया 34 51 58
ेबेरखेड़ी 49 65 66
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फैक्ट फाइल
जिले में 84 अमृत सरोवर बनाए जाने हैं
जिले के 216 ग्रामों में जल जीवन मिशन के तहत नलजल योजना चालू होनी है