
पत्रिका स्पॉट लाइट : स्कूल परिसर में जर्जर भवन बने परेशानी का कारण
गुना . सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था में तरह-तरह की खामियां उजागर हो रही हैं। अंचल में कई गांव ऐसे हैं जहां वर्षों बाद भी स्कूल भवन तक नहीं बन सका है। वहीं जिला मुख्यालय पर तीन ऐसे स्कूल हैं जहां भवन ही स्कूल प्रबंधन केे लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। क्योंकि यह भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैंं। खंडहर अवस्था में पिछले कई सालों से यह परिसर में खड़े हैं लेकिन इन्हें गिराने की कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है। वहीं विभाग इन्हें इंजीनियर की रिपोर्ट पर उपयोगविहीन घोषित कर खतरनाक बता चुका है। इनमें प्रवेश रोकने के लिए दीवार पर प्रतिबंधित क्षेत्र तो लिख दिया लेकिन प्रवेश रोकने से लेकर सुरक्षा के कोई भी इंतजाम नहीं किए हैं। जिससे यह भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गए हैं। सुबह जब बच्चे व स्टाफ स्कूल पहुंचता है तो उन्हें परिसर में काफी संदिग्ध सामग्री दिखाई देती है। इसके अलावा इनके बेरोकटोक प्रवेश से स्कूल की संपूर्ण सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वे लगातार अपने विभाग के आला अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत करा रहे हैं। लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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किस स्कूल के क्या हालात
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प्राथमिक विद्यालय मातापुरा कैंट
स्थिति : यह स्कूल गुना-अशोकनगर रोड पर हवाई अड्डा के सामने विवेक कालॉनी और मातापुर कालोनी के बीच स्थित है। परिसर में एक भवन पिछले तीन साल से बेहद जर्जर अवस्था में खड़ा है। आए दिन छत और दीवार का कुछ न कुछ हिस्सा गिरता रहता है। भवन के पीछे की बाउंड्री असामाजिक तत्वों ने तोड़ दी है। हद तो यह है कि आसपास रहने वाले लोगों ने स्कूल परिसर के बीच से ही आने जाने का रास्ता तक बना लिया है। स्टाफ का यदि कोई सदस्य रोकटोक करता है तो विवाद करने पर आमदा हो जाते हंै। रात के समय तो स्कूल परिसर में अवैध गतिविधि बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।
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नानाखेड़ी प्राथमिक विद्यालय
स्थिति : यह स्कूल कृषि उपज मंडी की दीवार से लगा हुआ है। तीन ओर से रिहायशी इलाके से घिरा है। स्कूल परिसर की बाउंड्रीवॉल 5 साल से अधूरी है। आसपास रहने वाले लोग स्कूल परिसर के अंदर से ही आने जाने का रास्ता बनाए हुए हैं, जो बाउंड्रीवॉल नहीं बनने दे रहे। इसी का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व परिसर में $खड़े उपयोगविहीन भवन का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। जानवरों का प्रवेश भी जारी है। जिसके कारण न सिर्फ बच्चों की सुरक्षा खतरे में है बल्कि प्रबंधन चाहकर भी परिसर में पौधरोपण तक नहीं कर पा रहा है। इसी असुरक्षा की भावना के चलते प्रबंधन को वाटर कूलर स्कूल परिसर की बजाए पास स्थित मंदिर पर लगवाना पड़ा है।
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माध्यमिक विद्यालय जाटपुरा
स्थिति : यह स्कूल चारों तरफ से रिहायशी इलाके से घिरा है। बाउंड्रीवॉल कई जगह से टूटी है। ऊंचाई भी कम है। परिसर में एक नहीं बल्कि दो भवन जर्जर हालत मेें खड़े हैं। इनमें बच्चों का प्रवेश रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। लंच के समय बच्चे पूरे परिसर में खेलते हैं। बाहरी लोगों के प्रवेश की वजह से ही स्कूल का हैंडपंप तक कई बार खराब हो चुका है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह स्कूल नोडल सेंटर है। जहां सभी स्कूलों को वितरित करने वाली पुस्तकें व अन्य जरूरी सामान रखा जाता है। जिनकी सुरक्षा को लेकर प्रबंधन काफी चिंतित रहता है। पहले कई बार चोरी हो चुकी हैं। जर्जर भवनों में लगी लोहे की जाली, किबाड़ चोरी होने का सिलसिला जारी है। उपयोगविहीन भवनों में बड़ी मात्रा में खरपतवार उगने से जहरीले कीड़ों का खतरा भी बढ़ गया है। शिक्षकों का कहना है कि कई परिसर में सांप व अन्य जहरीले जानवर देखे भी गए हैं। हर समय बच्चों की निगरानी संभव नहीं हो पाती।
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इनका कहना है
आप जिन स्कूलों के बारे में बता रहे हैं, उनके भवन पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर द्वारा जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। एसडीएम स्तर से की जाने वाली कार्रवाई भी हो चुकी है। लेकिन बजट के अभाव में इन्हें अब तक नहीं गिराया गया है। नए भवन निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद ही इन्हें गिराया जा सकेगा। क्योंकि नए भवन निर्माण के बजट में ही गिराने के लिए राशि दी जाती है। जहां तक असामाजिक तत्वों के प्रवेश से असुरक्षा का सवाल है तो इसके लिए स्थानीय स्तर पर ही प्रयास करने होंगे।
ऋषि शर्मा, डीपीसी
Published on:
30 Jul 2023 09:48 pm
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