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एमपी में अनूठी पहल : पेड़ों को बचाने तैयार हो रही गोबर की लकडिय़ां

वृक्षों को बचाने प्रदूषण की मात्रा को कम करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर से इको-फ्रैंडली ईंधन बनाने का एक विकल्प खोजा है।

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एमपी में अनूठी पहल : पेड़ों को बचाने तैयार हो रही गोबर की लकडिय़ां

एमपी में अनूठी पहल : पेड़ों को बचाने तैयार हो रही गोबर की लकडिय़ां

गुना. इंसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। एक सर्वे के अनुसार एक तिहाई लकड़ी का इस्तेमाल अंतिम संस्कार ईंट भट्टा आदि के लिए किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक साल भर में शव जलाने और ईंट भट्टों में तकरीबन कई टनों लकड़ी लगती है। जिससे कई वृक्ष काटे जाते हैं। वृक्षों को बचाने प्रदूषण की मात्रा को कम करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर से इको-फ्रैंडली ईंधन बनाने का एक विकल्प खोजा है।

बेहद सस्ता ईंधन है गोबर की लकड़ी

यह ईंधन बेहद सस्ता है और इससे वायु प्रदूषण भी नहीं होगा। आमतौर पर एक शव को जलाने के लिए 4-5 क्विंटल लकड़ी की आवश्यकता होती है, लेकिन गाय के गोबर से तैयार 2 से ३ क्विंटल फ्यूल स्टिक्स एक शव को जलाने के लिए काफी है। जलाऊ लकड़ी, ईंधन के लिए सर्वाधिक सुलभ साधन था, लेकिन अब यह नहीं है।

गौ काष्ठ से गोपालकों को मिलेगी मदद
पर्यावरण को संतुलित करने की दृष्टि से ईंधन के स्रोत के रूप में वृक्षों पर यह निर्भरता घटाने में गौ काष्ठ हमें मदद कर सकता है। गाय यहां-वहां भटक रही हैं, उनको भी आश्रय मिलेगा और गोपालकों को भी आय होगी। घरेलू और औद्योगिक दोनों प्रकार की जरूरतों के लिए प्राकृतिक गैस, पेट्रोल तथा कोयले पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों की तलाश में सौर ऊर्जा के साथ-साथ गाय के गोबर को ईंधन के एक नए विकल्प के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

लकड़ी से सस्ता ईंधन गोबर की लकड़ी
500 किलो लकड़ी के लिए दो बड़े पेड़ काटने पड़ते हैं, जिसका खर्च करीब 4000 रुपए आता है। वहीं 500 किलो लकड़ी के स्थान पर गौ काष्ठ का प्रयोग किया जाए तो 300 किलो गौ काष्ठ में ही काम हो जाता है। पारंपरिक तरीके से गोबर से कंडे बनाए जाते रहे हैं। कंडों के आकार में परिवर्तन कर लकड़ी के आकार में बना कर वेल्यू एडिशन किया जाता है। सूखे गोबर को जो लकड़ी के आकार में होता है, गौ काष्ठ कहा जाता है।

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10 रुपए किलो पड़ती है गोबर की लकड़ी
गौ काष्ठ विद्युत मशीन से तैयार किया जा रहा है। मशीन में गोबर को डाला जाता है। इसे 2 से 3 फीट लंबे लकड़ी के आकार में ढाला जाता है। 8 से 10 दिन तक सुखाया जाता है। गौ काष्ठ की लागत करीब 10 रुपए प्रति किलो पड़ती है।

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