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लाइफ में रिस्क लेना बहुत जरूरी, तभी अपनी वैल्यू समझ पाओगे

फिल्म फेस्टिवल में एक्टर, डायरेक्टर पियूष मिश्रा ने कहा...

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लाइफ में रिस्क लेना बहुत जरूरी, तभी अपनी वैल्यू समझ पाओगे

लाइफ में रिस्क लेना बहुत जरूरी, तभी अपनी वैल्यू समझ पाओगे

ग्वालियर.

लाइफ में रिस्क लेना जरूरी है, तभी आप अपनी वैल्यू समझ पाओगे और कंफर्ट जोन से बाहर निकलोगे। सफलता के लिए चैलेंजेज फेस करिए। असफलता से घबराइए मत। यह बात एक्टर, डायरेक्टर, राइटर पियूष मिश्रा ने शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के दौरान कही। यह दो दिवसीय कार्यक्रम प्रयान्स डवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से जीवाजी यूनिवर्सिटी के गालव सभागार में किया जा रहा है। फेस्टिवल के दौरान पियूष मिश्रा ने छात्र-छात्राओं के कई सवालों के जवाब दिए। इस दौरान 6 शॉर्ट फिल्म्स का भी प्रदर्शन किया गया। इस दौरान थिएटर डायरेक्टर राजेश तिवारी व रंगकर्मी होजाई गम्बा सिंह उपस्थित रहे।

स्क्रिप्ट राइटिंग के लिए इमेजिनेशन की जरूरत
पियूष मिश्रा ने कहा स्क्रिप्ट राइटिंग के लिए इमेजिनेशन की जबरदस्त जरूरत है। सिनेमा में रियल से हटकर चीजों को लिखा जाता है। एक्टिंग सीखने से पहले आपको दुनिया देखने का अपना नजरिया डवलप करना होगा। पिछले कुछ वर्षों में ग्वालियर के युवाओं में टैलेंट बढ़ा है। वे एक्टिंग की बारीकी समझने लगे हैं। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अच्छे सवाल उनके जेहन में आ रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा मुंबई में कोई एक दम से एक्टर नहीं बन जाता। इसके लिए स्ट्रगल करना पड़ता है। हार्डवर्क करने वाले और पेशेंस रखने वाले ही फिल्म इंडस्ट्री में कॅरियर बनाने की सोंचे।

घर वालों ने साइंस दिला दी, एक्टिंग सीखने घर से भाग गया
पियूष मिश्रा ने अपनी लाइफ के बारे में बताया स्कूल में मुझे साइंस अच्छी नहीं लगती थी, लेकिन घर वालों ने मुझे साइंस दिला दी। मैं बहुत गुस्से में था। मैं एक्टिंग सीखने के लिए घर से भाग गया और लम्बे स्ट्रगल के बाद मैं खुद की पहचान बना पाया। इसलिए जो दिल में है, उसे करिए। कोई आपका रास्ता नहीं रोक सकता।

नाराजगी- जब एक्टिंग करता था तो कोई नहीं बुलाता था
पियूष ने ग्वालियरवासियों से नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब एक्टिंग करता था, तब कोई नहीं बुलाता था। आज सब कुछ हूं तो सभी बोलते हैं आप आते क्यों नहीं। फिरभी मैं साल में दो से तीन बार ग्वालियर आ जाता हूं।

उत्सुकता- मैं अभी अपने आपको 20 साल का मानता हूं
मेरी उम्र 59 साल है, लेकिन मैं अपने आपको 20 साल का मानता हूं। क्योंकि मैं युवाओं की तरह ही सोचता हूं। उनसे बात करना मुझे अच्छा लगता है। उनके सवाल मुझे भी कुछ सिखाते हैं।

सलाह- ग्वालियर के युवाओं में बहुत पोटेंशियल है। यहां सिनेमा से जुड़ीं वर्कशॉप होती रहनी चाहिए। युवाओं के बीच आने के लिए मैं तैयार हूं।

थिएटर आपको देता है अलग नजरिया
थिएटर डायरेक्टर राजेश तिवारी ने कहा सिनेमा की चकाचौंध शायद आपको गुमनाम बना सकती है, लेकिन थिएटर आपको अलग नजरिया देता है। आपमे निखार लाता है। आत्मविश्वास के साथ आप कुछ नया करने के लिए सक्षम बन पाते हैं। सिनेमा का इस्तेमाल समाज में एकता और एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए।