दूरस्थ शिक्षण संस्थान के 19 कोर्स बंद, नहीं मिली मान्यता

इनके बंद होने से उन छात्रों को नुकसान हुआ है, जो अपने काम के साथ दूरस्थ शिक्षा पद्धति से डिग्री करना चाहते हैं। अब उन्हें किसी अन्य विवि के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर का रुख करना पड़ेगा।

By: Rahul rai

Published: 07 Jul 2019, 07:45 AM IST

ग्वालियर। यूजीसी के मानकों को पूरा नहीं करने के कारण जीवाजी विश्वविद्यालय में संचालित दूरस्थ शिक्षण संस्थान के 19 कोर्स बंद हो गए हैं। इनके बंद होने से उन छात्रों को नुकसान हुआ है, जो अपने काम के साथ दूरस्थ शिक्षा पद्धति से डिग्री करना चाहते हैं। अब उन्हें किसी अन्य विवि के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर का रुख करना पड़ेगा। इसके साथ ही जेयू को हर साल इनसे फीस के रूप में मिलने वाले लगभग एक करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। अब विवि वोकेशनल कोर्सों के जरिए छात्रों को आकर्षित करने की कोशिश में है, लेकिन परंपरागत पाठ्यक्रमों के जरिए डिग्री हासिल करने की सोच रखने वाले छात्र फिलहाल वोकेशनल कोर्सों में रुचि नहीं ले रहे हैं।

 

दूरस्थ शिक्षण संस्थान फेल होने के दो मुख्य कारण
-विभाग के मुखिया को परीक्षा नियंत्रक बना दिया गया, जिससे वे अपना मूल काम जिम्मेदारी से नहीं कर पाए और पाठ्यक्रमों का संचालन सही तरीके से नहीं हो सका।

-समय पर यूजीसी के मानकों पर आधारित औपचारिकताएं पूरी नहीं करवाई गईं, जिसकी वजह से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कोर्सों को मान्यता देने से मना कर दिया।

 

दूरस्थ के अलावा यह भी हैं परेशानियां ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम

-अंचल के 34 विधानसभा क्षेत्रों में खुले 450 कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे स्नातक और परास्नातक के लगभग दो लाख छात्रों में से करीब 40 हजार छात्र विवि द्वारा तय एजेंसी की मनमानी के कारण हर साल परेशान हो रहे हैं।

-बिना ठोस प्लानिंग के लागू किए गए यूएमएस का काम नागपुर की प्राइवेट कंपनी को दिया गया है। यह कंपनी फेल साबित हुई है। कंपनी के पास न तो तकनीकी सपोर्ट है, न प्रशिक्षित मैन पॉवर है। इसकी वजह से हजारों छात्रों की मार्कशीट, रोल नंबर और परिणाम में गड़बड़ी हो रही है।

 

इतने पैसे देता है एक छात्र -
कॉपियां देखने, संशोधन कराने सहित अन्य कामों के लिए छात्रों से कम से कम 150 रुपए वसूले जाते हैं। इसमें 40 रुपए एमपी ऑनलाइन को मिलते हैं, 70 रुपए विवि को मिलते हैं, जबकि 70 रुपए संबंधित कॉलेज का हिस्सा रहता है। यह शुल्क परीक्षा आवेदन और सेमेस्टर फीस के अलावा है।

 

सबसे ज्यादा परेशानी यहां के छात्रों की
-ग्वालियर-चंबल संभाग के गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया जिलों के 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में हर साल परीक्षा देते हैं। इसके बाद अंकसूची, परीक्षा फॉर्म और नामांकन आदि कराने के लिए छात्रों को प्रशासनिक भवन आना पड़ता है।


-जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा तकनीकी रूप से दक्ष एजेंसी रखी जाती तो त्रुटियां होने की आशंका कम रहती। वर्तमान में छात्रों को पढ़ाई के अलावा आने-जाने में समय और पैसा बर्बाद करना पड़ रहा है।

 

यह है छात्रों की परेशानियां
-पिछले तीन महीने में विश्वविद्यालय ने जो परीक्षा परिणाम घोषित किए हैं, उन स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों के 30 से 40 फीसदी छात्र अंकों की गड़बड़ी, नाम आदि त्रुटियों एवं अंकसूची में संशोधन के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पांचवे सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम के समय लगभाग 7 हजार विदहेल्ड और पास होने के बाद भी फेल होने, फाउंडेशन जैसे सब्जेक्ट के नंबर ही नहीं दिए जाने की छात्रों की परेशानी अभी तक दूर नहीं हुई है।

 

शुल्क देने के बाद भी समय पर कॉपियां देखने नहीं मिलीं-
बीएससी के अधिकतम छात्रों ने फेल किए जाने के बाद आपत्ति लगाई थी। इसके बाद सभी छात्रों से 250 रुपए प्रति विषय शुल्क जमा करवाया गया था। इसके बाद भी छात्रों को समय पर कॉपियां देखने को नहीं मिल पाईं।

 

Rahul rai
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