
11 तालाबों की मरम्मत पर हर वर्ष 50 लाख खर्च, मुरार के 7 तालाबों पर 4 करोड़, पानी फिर भी नहीं
ग्वालियर. जिले की 263 पंचायतों में 400 तालाब हैं, इनमें से 11 बड़े तालाबों पर हर वर्ष 50 लाख रुपए सिर्फ मरम्मत पर खर्च होते हैं। जबकि अन्य छोटे तालाबों पर मनरेगा सहित अन्य मदों से लाखों रुपए के काम कराए जा रहे हैं। मुरार के सात तालाबों को बनाने पर 4 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च हो रही है। इसके बाद भी इन सभी तालाबों में पूरे वर्ष पानी नहीं रहता। अधिकतर तालाब अक्टूबर में होने वाली गेहूं की बोवनी के समय खाली कर दिए जाते हैं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारी गांव के तालाबों में पानी रोकने में सफल नहीं रहे हैं।
ये बड़े तालाब, जिनको बचाना जरूरी
पारसेन : ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा की पारसेन पंचायत में इस तालाब एतिहासिक जल ग्रहण क्षमता को 2010 में सही किया गया था। इसके पास ही काला पत्थर निकाला जा रहा है।
अमरोल : शीतला माता मंदिर से कुछ ही दूरी पर मौजूद इस तालाब की मरम्मत पर अभी तक 1 करोड़ 40 लाख रुपए खर्च हुए हैं। तालाब के आसपास ग्यारहवीं शताब्दी का इतिहास बिखरा है।
उर्वा : चीनोर से कुछ ही दूरी पर मौजूद इस तालाब की बंड 2016-17 में टूट चुकी है। इसके बाद तालाब की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए खर्च हुए लेकिन देखरेख अभी भी नहीं है।
पानी पर अब तक इतना खर्च
नहरों की मरम्मत पर करीब 55 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
जल संरक्षण और संवर्धन के कामों पर 23 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
पेयजल उपलब्धता पर 29 करोड़ 90 लाख रुपए खर्च कर चुके हैं।
इन कमियों की वजह से नहीं भरते तालाब
- तालाबों की मरम्मत करते समय ओवर फ्लो बेहद नीचे कर दिया गया है।
- बारिश का पानी भरने पर अधिकतर पानी ओवर फ्लो के जरिये बह जाता है।
- मरम्मत की गुणवत्ता अच्छी न होने से तालाबों की बंड टूटने का खतरा बना रहता है।
मुरार के इन तालाबों पर खर्च हो रहे सरकारी रुपए
बहांगी खुर्द तालाब पर 13.18 लाख, बड़ेरा तालाब पर 15 लाख, टिहौली तालाब पर 19.27 हजार, बिजौली तालाब पर 50.20 लाख, जखारा तालाब पर 25.30 लाख, बिल्हारा तालाब पर 1 करोड़ 11 लाख 50 हजार, जलालपुर पिकअप बियर पर 2 करोड़ 32 लाख 12 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं।
Published on:
07 Aug 2022 06:41 pm
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