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सोच पानी भी मुश्किल मासूम ने कितना दर्द सहा होगा, बलात्कारी को फांसी की दोहरी सजा, सुनाया ऐतिहासिक फैसला

सोच पानी भी मुश्किल मासूम ने कितना दर्द सहा होगा, बलात्कारी को फांसी की दोहरी सजा, सुनाया ऐतिहासिक फैसला

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rape accused

सोच पानी भी मुश्किल मासूम ने कितना दर्द सहा होगा, बलात्कारी को फांसी की दोहरी सजा, सुनाया ऐतिहासिक फैसला

ग्वालियर। बच्चियों के साथ घिनौने अपराध के दो मामले में आरोपियों को कोर्ट ने फांसी की सजा दी है। कटनी में महज 5 दिन की सुनवाई में फैसला सुनाया गया। इतने कम समय में फांसी का प्रदेश का यह संभवत: पहला मामला है। ग्वालियर में वारदात के 37वें दिन दुष्कर्मी-हत्यारे को दोहरी फांसी दी गई।

ग्वालियर में माता-पिता के साथ विवाह समारोह में शामिल होने आई छह साल की बच्ची का अपहरण कर दरिंदे जितेन्द्र कुशवाह ने दुष्कर्म किया और नृशंसतापूर्वक हत्या कर दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अर्चना सिंह ने सजा सुनाते हुए कहा कि जिस तरह अबोध बालिकाओं से निर्ममतापूर्वक दुष्कृत्य के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे मामलों में कठोर से कठोर दंड दिया जाना जरूरी है अन्यथा एक दिन दहेज जैसी कुरीति की तरह ऐसे अपराध कन्या भू्रण हत्या की नींव बनने लगेंगे। न्यायाधीश ने जेल में बंद आरोपी को वीडियो कान्फे्रंसिंग से दो अलग-अलग धाराओं में दोहरी फांसी और 24 साल कारावास की सजा सुनाई।


वारदात से अंजाम तक

12 दिन में चालान
11 दिन में 33 गवाही
37वें दिन हुई सजा


वारदात : दिनांक 20-21 जून दरमियानी रात

सामुदायिक भवन न्यू विजयनगर आमखो में आयोजित विवाह समारोह में परिवार के साथ शामिल होने आई 6 साल की मासूम गायब

फुटेज में दिखा था: सुबह राहुल यादव के यहां लगे कैमरे में 1.21 बजे बच्ची को आरोपी कैंसर पहाडिय़ा ले जाते दिखा, रात 2.48 बजे वापस आ गया, पर बच्ची नहीं दिखी।

ठंडे दिमाग से दिया घटना को अंजाम
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने घटना को अंजाम देने के बाद उस पर कोई शक न करे, इस कारण से बिना डर, निर्भीकतापूर्वक घटनास्थल से वापस आकर सामुदायिक भवन में जाकर उसका फिर विवाह समारोह में शामिल होना, यह दर्शाता है कि उसे न तो अपने किए का कोई पछतावा था, और न ही उस पर इतने गंभीर अपराध का कोई प्रभाव था, जो यह दर्शाता है कि उसने बेहद ठंडे दिमाग से अपराध को अंजाम दिया।

यह सोच पाना भी मुश्किल है कि बच्ची ने कितनी पीड़ा सही
न्यायाधीश अर्चना सिंह ने कहा कि आरोपी को सामुदायिक भवन चांदबाड़ी कंपू में आमंत्रित नहीं किया था फिर भी वह वहां बिना बुलाए गया था। इसके बाद अपने भाई को ढूंढने बाहर आई बालिका को वह अपने साथ ले गया। वह मासूम इस विश्वास के साथ उसके साथ गई कि आरोपी उसे उसके परिवार के पास पहुंचा देगा लेकिन आरोपी ने बालिका के विश्वास के छल किया और दरिंदगी के साथ उसे अपना शिकार बनाया। उसने इस बालिका को न केवल पीड़ा पहुंचाई बल्कि उसे गंभीर चोटे भी पहुंचाईं। यह सोच पाना भी मुमकिन नहीं है कि उस मासूम बच्ची ने कितनी पीड़ा सही होगी। आरोपी की पाश्विकता के कारण उस निसहाय बालिका की पसलियां भी टूट गई और उसने अपने दुष्कृत्य को छिपाने व दंड से बचने के लिए बालिका की निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी।


पुलिस की भूमिका रही महत्वपूर्ण
इस मामले में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर बीएल यादव ने 12 दिन में जांच पूरी कर न्यायालय में चालान पेश कर दिया था, केवल डीएनए रिपोर्ट ही ट्रायल के दौरान आई थी, बाकी सभी जांच रिपोर्ट पहले ही जुटा ली गई थीं। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी अनिल कुमार मिश्रा तथा लड़की के पिता की ओर से एडवोकेट सोमवीर सिंह यादव ने पैरवी की, जिन्होंने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को श्रृंखलाबद्ध किया।

ये था मामला: आमखो से 6 साल की बच्ची 20-21 जून की दरमियानी रात गायब हो गई थी। सीसीटीवी कैमरे में बच्ची को ले जाते युवक जितेंद्र कुशवाह कैद हुआ था। अगले दिन बच्ची का शव कैंसर पहाडिया पर मिला था। उसकी दुष्कर्म कर हत्या की गई थी। पुलिस ने आरोपी को 22 जून को ही दबोच लिया था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

बालिकाओं के साथ निर्ममतापूर्वक दुष्कृत्य के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे मामलों पर रोकथाम के लिए आवश्यक है कि ऐसे अपराधियों को कठोर से कठोर दण्ड दिया जाए, अन्यथा एक दिन दहेज जैसी कुरीतियों के समान इस प्रकार के अपराध कन्या भू्रण हत्याओं की नींव बनने लगेंगे...

यह भी कहा...

1.न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि आरोपी के कृत्य से संपूर्ण समाज की सामूहिक आत्मा कांप गई

2.न्यायालय से समाज की अपेक्षा है कि जघन्य एवं घृणित अपराधों में अधिकतम दण्ड दिया जाए।

अर्चना सिंह, सजा सुनाने वाली न्यायाधीश

24 घंटे जेल पुलिस की निगरानी में रहेगा जितेन्द्र
छह साल की मासूम को अगवा कर दुष्कर्म कर उसकी नृशंस हत्या करने वाले दरिंदे जितेन्द्र कुशवाह को फांसी की सजा होने के बाद जेल में उसकी सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। उसे दूसरे कैदियों के साथ नहीं रखा जाएगा, बल्कि सेपरेट सेल में उसके रहने की व्यवस्था हुई है। जहां 24 घंटे जेल पुलिस उसकी निगरानी रखेगी।


अन्य कैदियों से अलग सेल
जेल अधिकारियों ने उस सेल के बाहर ड्यूटी देने वाले प्रहरियों को हिदायत दी है कि किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। सजा होने से पहले जितेन्द्र को बाकी कैदियों के साथ रखा गया था। दोपहर को सजा होने क बाद उसे अन्य कैदियों के साथ नहीं रखा गया, बल्कि कड़ी सुरक्षा में उसे सेपरेट सेल पहुंचाया गया।


हवालाती की जगह दंडित बंदी बना
सजा होने के बाद जितेन्द्र अब दंडित बंदी बन गया है। अभी तक उसे जेल में हवालाती बंदी की तरह रखा गया था। अगर उससे परिवार का कोई सदस्य जेल में मिलाई करने आता है तो उनकी मुलाकात अन्य बंदियों की तरह नहीं होती, बल्कि परिजन को उसके सेल के पास ले जाकर मिलाई कराई जाती है।

भावुक हुए पिता, बोले सजा से बेटी की आत्मा को मिला न्याय
आरोपी को सजा सुनाए जाते समय अदालत में मौजूद मृतक बालिका के पिता भावुक हो गए और हुए रो पड़े। बाद में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुझे पूरा विश्वास था कि मेरी बेटी के साथ न्याय होगा। आरोपी को जो सजा हुई है, उससे निश्चित रूप से बालिका की आत्मा को न्याय मिला है।