
ऑडियंस वही, नाटक बदले, पहली बार एक मंच पर हिंदी और मराठी नाटक का मंचन
ग्वालियर.
नाट्य मंदिर में शनिवार को एक साथ दो अलग-अलग भाषाओं के नाटक हुए। इसे देखने के लिए शहर एवं बाहर के लोगों में काफी उत्सुकता रही। पहला नाटक मराठी ‘जीर्णोद्धार’ था, जिसे अभिनय कल्याण मुंबई की ओर से किया गया। इसके लेखक अभय नवाथे एवं निर्देशक अभिजीत झुंजारराव हैं। इसके बाद हिंदी नाटक ‘वेडिंग एनिवर्सरी’ का मंचन हुआ। इसके लेखक विद्या सागर एवं निर्देशक अभिजीत राव हैं। लगभग तीन घंटे चले नाटक को दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह पहला मौका था जब एक ही मंच पर एक साथ हिंदी और मराठी नाटक हुए।
मराठी नाटक ‘जीर्णोद्धार’
देर तक चलता है आस्तिक और नास्तिक विचारों का खेल
वि_ल भगवान के मंदिर के कलश का निर्माण कार्य एक मजदूर स्त्री कर रही होती है। मंदिर के ऊपर ही उसकी झोपड़ी है। वहां से चंद्रभागा नदी का विहंगम दृश्य नजर आता है। झुग्गी तक पहुंचने का मार्ग बहुत छोटा और मुश्किलों भरा है। एक आदमी वि_ल भक्ति में ली होकर मंदिर जाने के बजाए उस झुग्गी पहुंच जाता है। वह मराठी विषय का शिक्षक है। स्त्री से मिलते ही आस्तिक और नास्तिक विचारों का खेल शुरू होता है। शिक्षक और उस औरत के बीच की इस शाब्दिक द्वंद्व में मजदूर स्त्री बहुत सारा जीवन भाष्य करती है, जो चकित कर छोड़ता है।
हिंदी नाटक ‘वेडिंग एनिवर्सरी’
मरीज के साथ डॉक्टर की पत्नी भी अकेलेपन का शिकार
मनोचिकित्सक विनय के शादी की दसवीं वैवाहिक वर्षगांठ होती है। पत्नी सविता घर पर उसकी राह देख रही होती है। विनय क्लीनिक से घर आता है, सविता का अकेलापन कुछ समय के लिए दूर हो जाता है। उसी बीच विनय का दुबे नामक मरीज आ जाता है, जो अकेलेपन के डर का शिकार है। तब विनय को समझ आता है कि इलाज के तरीके डॉक्टर मुझ पर आजमा रहा है। उसी अकेलेपन का शिकार उसकी पत्नी भी है। तब डॉक्टर स्वीकारता है कि हमें दूसरों के मन को पूरे तरीके से समझ नहीं पाते। इसीलिए हम उनकी समस्याओं का हल नहीं निकाल पाते।
मराठी नाटक ‘साम्राज्यम’ का मंचन आज
अभिनय कल्याण मुंबई की ओर से रविवार को मराठी नाटक ‘साम्राज्यम’ का मंचन होगा। इसके लेखक विद्यासागर अध्यापक एवं निर्देशक अभिजीत झुंजार राव हैं।
Published on:
13 Aug 2022 09:50 pm
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