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निरीक्षण में खुली बीएड कॉलेजों की पोल, कहीं अधूरा भवन, कहीं स्टाफ कम-प्रयोगशाला गायब

18 मार्च को स्थायी समिति में तय होगा संबद्धता का भविष्य
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ग्वालियर

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Rahul Adityarai Shrivastava

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Updated: 15 Mar 2026, 5:43 PM IST

निरीक्षण में बीएड कॉलेजों की खुली पोल, कहीं अधूरा भवन, कहीं स्टाफ कम-प्रयोगशाला गायब

निरीक्षण में बीएड कॉलेजों की खुली पोल, कहीं अधूरा भवन, कहीं स्टाफ कम-प्रयोगशाला गायब

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएड कॉलेजों के निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होते ही कई संस्थानों की हकीकत सामने आने लगी है। शनिवार को गठित 11 निरीक्षण दलों ने गुना, शिवपुरी, अशोकनगर और श्योपुर जिलों के कुल 34 बीएड कॉलेजों का औचक दौरा किया। इस दौरान कई कॉलेजों में भवन अधूरा मिला, तो कहीं शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय स्टाफ की भारी कमी सामने आई। प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी कई संस्थानों में देखा गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जानकार सूत्रों के अनुसार निरीक्षण दलों को अधिकांश कॉलेजों में कमियां मिली हैं। यह निरीक्षण विश्वविद्यालय के परिनियम 27 की धारा 10 के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संबद्ध संस्थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है।

निरीक्षण की प्रक्रिया और टीम
शनिवार सुबह करीब 8 बजे सभी 11 दल जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर से रवाना हुए। इन दलों में विश्वविद्यालय के डीन, शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य और वरिष्ठ शिक्षक शामिल थे। टीमों ने जिन ङ्क्षबदुओं पर बारीकी से जांच की उनमें भवन की स्थिति और निर्माण की प्रगति,शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय स्टाफ की उपलब्धता, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य आवश्यक संसाधन, दस्तावेजों की सत्यता शामिल है। जियो टैङ्क्षगग के माध्यम से कॉलेजों के फोटो और वीडियो भी लिए गए, ताकि रिपोर्ट में कोई विवाद न रहे। निरीक्षण गोपनीय रखा गया और कॉलेजों को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई, जिससे वास्तविक तस्वीर सामने आई।
रिपोर्ट और आगे की प्रक्रिया
डीसीडीसी प्रो. शांति देव सिसौदिया के अनुसार सभी दल संभवत: सोमवार तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप देंगे। इन रिपोर्टों के आधार पर 18 मार्च को स्थायी समिति की बैठक होगी। समिति की अनुशंसा के बाद प्रस्ताव कार्यपरिषद के समक्ष रखा जाएगा, जहां संबंधित कॉलेजों की संबद्धता जारी रखने या निरस्त करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

अन्य जिलों में भी निरीक्षण:

विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अगले चरण में दतिया, मुरैना, ग्वालियर और ङ्क्षभड जिलों के बीएड कॉलेजों में भी इसी तरह औचक निरीक्षण किया जाएगा। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा जा रहा है, ताकि कॉलेज प्रबंधन को तैयारी का मौका न मिले।
कॉलेज संचालकों में हलचल
विश्वविद्यालय के इस सख्त रवैये से बीएड कॉलेज संचालकों में खलबली मची हुई है। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कई कॉलेजों की संबद्धता खतरे में पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन जिन संस्थानों में कमी मिली है, उनके लिए यह बड़ा संकट साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें 18 मार्च की स्थायी समिति की बैठक पर टिकी हैं, जहां बीएड कॉलेजों के भविष्य का फैसला होगा।