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एसी में ड्यूटी, स्लीपर में छुट्टी… बिना टीटीई के चल रही ट्रेनें, गर्मी में अपनी ही सीट के लिए जूझ रहे यात्री

गर्मी के इस मौसम में रेलवे का सुविधाजनक सफर का दावा खोखला साबित हो रहा है। ग्वालियर से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों का बुरा हाल है। हालात यह हैं कि 22 कोच की पूरी ट्रेन को संभालने की जिम्मेदारी महज एक या दो टीटीई के कंधों पर डाल दी गई है।

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गर्मी के इस मौसम में रेलवे का सुविधाजनक सफर का दावा खोखला साबित हो रहा है। ग्वालियर से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों का बुरा हाल है। हालात यह हैं कि 22 कोच की पूरी ट्रेन को संभालने की जिम्मेदारी महज एक या दो टीटीई के कंधों पर डाल दी गई है।

गर्मी के इस मौसम में रेलवे का सुविधाजनक सफर का दावा खोखला साबित हो रहा है। ग्वालियर से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों का बुरा हाल है। हालात यह हैं कि 22 कोच की पूरी ट्रेन को संभालने की जिम्मेदारी महज एक या दो टीटीई के कंधों पर डाल दी गई है।

ग्वालियर . गर्मी के इस मौसम में रेलवे का सुविधाजनक सफर का दावा खोखला साबित हो रहा है। ग्वालियर से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों का बुरा हाल है। हालात यह हैं कि 22 कोच की पूरी ट्रेन को संभालने की जिम्मेदारी महज एक या दो टीटीई के कंधों पर डाल दी गई है। स्टाफ की इस भारी कमी का खामियाजा उन यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने महीनों पहले अपनी कंफर्म सीट बुक कराई थी। इसके चलते हर दिन यात्री काफी परेशान हो रहे है।

18 टीटीई की कमी

ग्वालियर स्टेशन पर टीटीई की कमी अब एक गंभीर संकट बन चुकी है। यहां स्वीकृत पदों से करीब 18 टीटीई कम हैं। ट्रेनों में चलने वाले टीटीई के साथ प्लेटफार्म चेङ्क्षकग और ऑफिस के कामों के बाद स्टाफ बचता ही नहीं है। यही कारण है कि 100 से 150 किलोमीटर तक यात्रियों को कोई टिकट चेक करने वाला नहीं मिलता।

एसी में आराम, स्लीपर में कोहराम

रेलवे की कार्यप्रणाली में भेदभाव का आलम यह है कि ट्रेनों में उपलब्ध टीटीई अपनी पूरी ड्यूटी केवल एसी कोचों की ठंडी हवा में बिता रहे हैं। वहीं स्लीपर कोचों को पूरी तरह उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। इस गर्मी और पसीने से तरबतर यात्री जब अपनी सीट पर किसी अनाधिकृत व्यक्ति को बैठा देखते हैं, तो वे मदद के लिए टीटीई को ढूंढते हैं, लेकिन पूरी ट्रेन छान मारने के बाद भी कोई जिम्मेदार रेलकर्मी नजर नहीं आता।

यह बोले यात्री… सीट के लिए छिड़ रही जंग

उत्कल एक्सप्रेस में 27 अप्रेल को ग्वालियर से सागर की यात्रा के दौरान झांसी के बाद टीटीई ने टिकट चेक किया। हमारी सीट पर एक यात्री और बैठा रहा, टीटीई सीट चेक करके चला गया।
दीपिका ठाकुर, यात्री
चंबल एक्सप्रेस से 5 मई को ग्वालियर से चित्रकूट की यात्रा की। झांसी तक सीट चेक करने कोई नहीं आया। ऐसे में हमारी सीट एम-1 की 58 पर कई यात्री आते जाते रहे। लेकिन कोई चेक करने वाला नहीं आया ।
प्रशांत, यात्री

इनका कहना

ट्रेनों में टीटीई की कमी है। इसी को देखते हुए इन दिनों ड्राइव चलाई जा रही है। जिससे यात्रियों को परेशानी कम हो। लेकिन यह बात सही है कि स्लीपर कोच में टीटीई कम ही पहुंच पाते हैं।
अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम झांसी