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Bharat Band : ग्वालियर,भिण्ड व मुरैना में सड़कें सुनसान,हर कोई ले रहा था यह जानकारी

सामाजिक या राजनैतिक संगठन की ओर से १० अप्रैल को बंद का आह्वान नहीं किया गया था

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Bharat Band

ग्वालियर। मंगलवार को कफ्र्यू के चलते जिले में शांति रही। सड़कें और गलियों में पुलिस जवानों के अलावा अन्य कोई नजर नहीं आ रहा था। शहर सहित मेहगांव,गोहद,लहार एवं मछण्ड में मंगलवार को सुबह छह बजे से कफ्र्यू घोषित था। जिसमें शाम छह बजे से रात दस बजे तक की ढील दी गई। वहीं सोमवार को सुबह दस बजे से मंगलवार रात बारह बजे तक के लिए इंटरनेट सेवा ठप कर दी गई। यहां बतादें कि किसी भी सामाजिक या राजनैतिक संगठन की ओर से १० अप्रैल को न तो बंद का आह्वान किया गया था और ना ही इस तरह की अनुमति ली गई थी। बावजूद इसके महज अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए १० अप्रैल को भारत बंद के मदे्देनजर प्रशासन ने कफ्र्यू घोषित कर दिया था।

गत ०२ अप्रैल को भारत बंद के आह्वान को हलके से लिए जाने के कारण उपद्रव के साथ हिंसा भी हुई थी। उसके बाद से ही अफवाहों का बाजार गर्म होना शुरू हुआ कि १० अप्रैल को सामान्य वर्ग की ओर से भारत बंद कराया जाएगा। घटना की पुनरावृत्ति न हो इसलिए प्रशासन न केवल पूरी तरह से चुस्त हो गया बल्कि शहर तथा खास कस्बों में कफ्र्यू घोषित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि पुलिस-प्रशासन ने सोमवार को जिलेभर में शांति व्यवस्थाएं बहाल कराए जाने के लिए फ्लैगमार्च निकाला था।

चप्पे-चप्पे पर रही सशस्त्र बल की तैनाती
शहर के अलावा मेहगांव, गोहद, लहार एवं मछण्ड में मंगलवार को पूरी तरह से कफ्र्यृू रहा। शहरी क्षेत्र के अलावा कस्बाई व ग्रामीण इलाकों में विभिन्न पैराममिलट्री फोर्स की तैनाती के चलते सन्नाटा छाया रहा। ऐसे में लोग अल सुबह से ही घरों में कैद रहे। जो भी नजर आया उसे खदेड़ दिया गया। यहीं नहीं कुछ पुलिस बल को देख खुद ही उल्टे पांव भाग निकला। आमजन को दूध, सब्जी आदि रोजमर्रा की सामग्री की परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं कुछ आवश्यक कार्यों के लिए घरों से निकले लोगों को चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस की कार्रवाई से भी दो-चार होना पड़ा। साथ ही उन्हें आईडी और निकलने की वजह बताने के बाद भी आगे जाने दिया।

१९८४ के बाद दूसरी बार देखा कफ्र्यू
भिण्ड जिले में आजादी के बाद १९८४ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरागांधी हत्या हो जाने के बाद उपजे जातिय दंगे में कफ्र्यू लगाया गया था। उस समय भी लोग घरों में कैद रहकर परेशान हुए थे। इस बार ०२ अप्रैल को हुई हिंसा के कारण जनसाधारण को लगातार कफ्र्यू का सामना करना पड़ा है। हालांकि कलेक्टर की ओर से बीच-बीच में कफ्र्यू में ढील देकर आमजन को राहत देने का भी प्रयास किया।