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कलेक्टर ने जिस जमीन में स्टांप शुल्क चोरी बताई उस पर उप पंजीयक का इंकार

करोड़ों रुपए कीमत की कनाडा वाली मैडम भूमि मामले में अब एक नया पैच आया है। कलेक्टर द्वारा इस भूमि को शहरी सीमा में बताते हुए इसमें स्टांप शुल्क चोरी किए जाने का जो प्रतिवेदन लोकायुक्त को दिया गया है।

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Gaurav Sen

Jul 15, 2017

sheopur mews

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श्योपुर। करोड़ों रुपए कीमत की कनाडा वाली मैडम भूमि मामले में अब एक नया पैच आया है। कलेक्टर द्वारा इस भूमि को शहरी सीमा में बताते हुए इसमें स्टांप शुल्क चोरी किए जाने का जो प्रतिवेदन लोकायुक्त को दिया गया है। उस पर पंजीयक कार्यालय ने भेजे अपने जवाब में उक्त जमीन का शहरी सीमा से बाहर बता दिया है। इस संबध में उनके द्वारा नपा के पत्र का हवाला भी दिया गया है। जिससे मामले की लोकायुक्त में चल रही जांच उलझ गई है।

हालांकि नपा के लिहाज से तो कलेक्ट्रेट क्षेत्र भी नगरीय सीमा में नहीं है, लेकिन उसे पंजीयक कार्यालय कभी नहीं मानता है। उप पंजीयक के जवाब बाद महानिरीक्षक पंजीयक द्वारा कलेक्टर को इस बावत एक और पत्र लिखा है, तथा उनसे वस्तु स्थिति नए सिरे से स्पष्ट करने के लिए कहा है। जिससे मामले की लोकायुक्त में चल रही जांच का उचित निराकरण हो सके। याद रहे कि शहर के बायपास रोड के पास ही कनाडा वाली मैडम की 63 बीघा भूमि मौजूद है। इस जमीन में बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ां करते हुए खरीद फरोख्त किए जाने और स्टांप शुल्क की चोरी किए जाने की शिकायत लोकायुक्त में दर्ज हुई।
मामले में लोकायुक्त ने जिला प्रशासन से प्रतिवेदन मांगा। कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने लोकायुक्त को इस भूमि को लेकर जो प्रतिवेदन भेजा, उसमें इसे शहर सीमा में बताया और स्टांप शुल्क की चोरी किए जाने बाबत अपना अभिमत दिया।

जिसके आधार पर लोकायुक्त ने मामले में पंजीयक कार्यालय के महानिरीक्षक से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि इसपर महानिरीक्षक पंजीयक कार्यालय द्वारा पंजीयक कार्यालय श्योपुर से स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए। जिसमें उप पंजीयक द्वारा इस जमीन को शहर सीमा से बाहर ही होना बताया। साथ ही इस बाबत सीएमओ नगर पालिका का पत्र भी भेजा, जिसमें इस जमीन को शहर सीमा से बाहर बताया गया है। यही वजह है कि ऐसे में दो शासकीय एजेंसियों के अलग-अलग अभिमत चले गए हैं, जिससे जांच अटक गई है। अब ऐसे में महानिरीक्षक पंजीयक ने कलेक्टर श्योपुर को पत्र लिखकर नपा की ओर से आए पत्र का हवाला देते हुए स्थिति नए सिरे से पूरी तरह से स्पष्ट करने के लिए कहा है।


यह है मामला
याद रहे कि कनाडा वाली मैडम गुरुशरण कौर की 63 बीघा जमीन बायपास रोड के आगे नहर किनारे है। जो वर्षों पहले 190 में कुछ लोगों के नाम हो गई। लेकिन तात्कालीन एसडीएम आरके दुबे के न्यायालय ने 190 को खारिज करते हुए जमीन को गुरुशण कौर का बेटा बनकर पक्ष रखने वाले खुशवंत सिंह के नाम कर दिया। खुशवंत सिंह के नाम पर आने के बाद जमीन का विक्रय हो गया है। जिन लोगों ने जमीन क्रय की, उन्होंने इसे कलेक्टर गाइड लाइन चार करोड़ की बजाय महज 62 लाख में खरीदा। इस जमीन को लेकर एसडीएम के आदेश में भी कई विसंगतियां थी, जिन्हें राजस्व बोर्ड द्वारा खारिज कर दिया गया।


फिर तो कलेक्ट्रेट क्षेत्र भी शहर से बाहर
कनाडा वाली मैडम की जो 63 बीघा जमीन है, देखा जाए तो वह नहर से इधर ही होकर शहर सीमा में है। लेकिन नगरीय सीमा का विस्तार अब तक नहीं हुआ है, लिहाजा नगर पालिका की सीमाएं इस जमीन से ठीक पहले उसी तरह से खत्म हो जाती हैं, जिस तरह से कलेक्ट्रेट है तो शहर में, लेकिन नगर पालिका की सीमा में न आकर बगवाज पंचायत में आती है। अब ऐसे में कलेक्ट्रेट क्षेत्र की जमीनों को भी ग्रामीण क्षेत्र में करार देकर करोड़ों रुपए के रजिस्ट्री शुल्क को लाखों में करके शासन को खूब चपत लगाई जा सकती है।

मामला बाकई में गंभीर है। श्योपुर में तो अभी कलेक्ट्रेट ही ग्रामीण क्षेत्र में आती है, तो वहां की रजिस्ट्री ग्रामीण क्षेत्र के लिहाज से स्टांप लगाकर थोड़े ही हो जाएगी। इसी तरह जो जमीन है, अगर कलेक्टर यह बता चुके हैं कि वह शहरी सीमा में आती है, तो फिर नवीन प्रतिवेदन भी वही जाएगा और मैं नवागत कलेक्टर के ज्वॉइन करने पर स्वयं उनसे इस संबध में बात करूंगी।
ललिता यादव, प्रभारी मंत्री, श्योपुर