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चातक के दिखने से खुश हुए पक्षी जानकार, बोले- ग्वालियर में नहीं रहेगी पानी की कमी

जहां मानसून रहता है उसी दिशा में रहते हैं यह पक्षी.......

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chatak bird couple seems in gwalior area

चातक के दिखने से खुश हुए पक्षी जानकार, बोले- ग्वालियर में नहीं रहेगी पानी की कमी

ग्वालियर. अच्छी बारिश की निशानी माने जाने वाला चातक पक्षी इन दिनों ग्वालियर के आसपास के जंगलों में नजर आ रहा है। वन्य पक्षी के जानकार इसे देखकर उत्साहित हैं। इसके दिखने से अच्छी बारिश की उम्मीद बंधी है। ये पक्षी तब तक ही नजर आएगा जब तक मानसून रहेगा। मानसून के विदा होने के साथ ही ये प्रवासी पक्षी भी विदा हो जाता है।

प्री-मानसून की काली घटा छाने के साथ ही तिघरा जलाशय पर चातक (पपीहा) पक्षी नजर आने लगा है। इसके सिर पर कलगी होती है और शरीर श्याम रंग का होता है। यह उड़ान बादलों की दिशा के अनुसार भरते हैं। ये पक्षी जिस दिशा में मानसून होता है, उसी दिशा में रहते हैं। पूर्व काल में किसान इस पक्षी को देखकर ही मानसून की आहट का अंदाजा लगाते थे। चातक के आने के साथ ही वे खेतों में बुवाई की तैयारी कर घरों में फसल के बीज तैयार कर लेते थे। जैसे ही पहली बारिश होती बीज की बुवाई खेतों में करने लगते थे।

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वर्षा की पहली बूंदों को ही पीते हैं
वनजीव प्रेमियों के अनुसार यह पक्षी वर्षा की पहली बूंदों को ही पीता है। अगर यह पक्षी बहुत प्यासा है और इसे एक साफ पानी की झील में डाल दिया जाए तब भी यह पानी नहीं पीता है और अपनी चोंच बंद कर लेता है, ताकी झील का पानी इसके मुंह में न जा सके।

ये है विशेषता
चातक अर्थात पपीहा पक्षी लगभग 15 इंच लंबा, काले या श्याम रंग का होता है। इसका नीचे का भाग सफेद होता है, सिर पर चोटीनुमा रचना होती है। स्वाति नक्षत्र में बारिश की बंूदों को पीने की लालसा रखता है। भारतीय जीव वैज्ञानियों ने भी इस पक्षी का वर्षा की बूंदों से अटूट रिश्ता बताया है।

नर-मादा का जोड़ा दिखा
तिघरा जलाशय पर बीते दिनों वन विभाग की टीम को नर-मादा चातक पक्षी का जोड़ा दिखा है। ये पक्षी मूल रूप से एशिया और अफ्रीका महाद्वीप में पाया जाता है। इसे स्थानीय बोलचाल की भाषा में मेकेवा और पपीहा भी कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चातक पक्षी कुक्कू कुल का प्रसिद्ध पक्षी है।

वन जीव विशेषज्ञ संजय दत्त शर्मा ने बताया की चातक पक्षी उन्हीं जगहों पर जाता है जहां अच्छी बारिश होती है। मानसून की निशानी माना जाता है। ये बारिश की पहली बूंद को ग्रहण करता है। जिसे शहर में अच्छी बारिश होने का संकेत माना जा रहा है।