
सदाबहार गीतों के साथ महक उठा सुरों की गुलदस्ता
मेले में श्रीरंग द्वारा ठुमरी, दादरा, होरी, गजल, कालजयी बंदिशों की प्रस्तुति
ग्वालियर व्यापार मेला स्थित फैसिलिटेशन सेंटर का नजारा शनिवार को बदला-बदला सा था। एक ही मंच से ठुमरी, दादरा, होरी, गजल, कालजयी बंदिशों की प्रस्तुति अलग ही एहसास करा रही थी। मेले में यह पहली बार था जब रसिकों ने आरकेस्ट्रा जैसी प्रस्तुति के साथ सुरों के गुलदस्ते का लुत्फ उठाया। मौका था श्रीरंग संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम का। इसमें शहर के वरिष्ठ कला साधकों ने एक के बाद एक प्रस्तुति देकर रसिकों को देर रात तक जोड़े रखा।
कार्यक्रम का संचालन संस्था के सचिव अशोक आनंद ने किया।
सुर संगीत की चली बयार
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. रंजना टोणपे ने झीनी-झीनी अचरवा के पार गौरिया... के साथ किया। पंजाबी दादरा-राग मिश्र रचना प्रस्तुत कर सभागार को शास्त्रीय संगीत की महक से महका दिया। बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में राग सरस्वती में पंडित उमेश कंपूवाले ने सुर सरस्वती से मांगू मैं हाथ जोड़ विनती करत... सरस्वती आराधना से कार्यक्रम का आगाज किया। डॉ. पारुल दीक्षित ने बनारस घराने की पारम्परिक होरी श्रंग डारुंगी नंद के लाल पे सांवरा रंग लाल कर दूंगी... की प्रस्तुति से रंगत बिखेरी। होरी की रंगत को बदलते हुए नवनीत कौशल ने बड़े गुलाम अली की कालजयी रचना ठुमरी याद पिया की आए, ये दु:ख सहा न जाए... से मोहब्बत की खूशबू और दर्द का अहसास करा दिया।
संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं...
अब बारी थी शरद ऋ षि जैन ने की, जिन्होंने मीराबाई की अमर कृति सांसों की माला में सिमरू मैं पी का नाम... की प्रस्तुति दी। शास्त्रीय और सुगम संगीत के बाद नवनीत कौशल ने राष्ट्रभक्ति का अलख जगाते हुए मातृभूमि की सेवा में समर्पित सैनिकों के लिए संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं... की प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। गायक कलाकरों के साथ विकास विपट, शशिकांत गेवराइकर एवं हरिओम गोस्वामी ने संगत की।
मेले में आज
मेले में रविवार को शाम 7.30 बजे परंपरागत नौटंकी का आयोजन किया जाएगा। रफ ीक भारती व इशाक भारती अपने फ न की प्रस्तुति देंगे।
Published on:
10 Feb 2019 12:14 pm
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