
ग्वालियर। किला स्थित गुरुद्वारा पर दाताबंदी छोड़ उत्सव को चार दिन शेष बचे हैं। उत्सव को लेकर सिख समाज तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। उत्सव में सिख समाज के साथ अन्य धर्म के लोग उत्साह से भाग लेते हैं। उत्सव के दौरान गुरुद्वारा पर आने वाले हर व्यक्ति को लंगर प्रसादी दी जाएगी। इन दिनों गुरुद्वारा की ओर से एेसी व्यवस्था की जा रही है कि एक दिन में 35 हजार से अधिक लोग लंगर ले सकेंगे। फिलहाल तैयारियों को अंमित रूप दिया जा रहा है।
गुरुद्वारा समिति की ओर से रोज फ्री लंगर चलाया जाता है। सामान्य दिनों में यहां लंगर खाने वाले लोगों की संख्या 2-3 हजार रहती है। वहीं, रविवार व विशेष दिन पर एेसे लोगों की संख्या 5 हजार तक पहुंच जाती है। दाताबंदी छोड़ उत्सव के दौरान गुरुद्वारा समिति के भोजनालय में एक साथ एक बार में एक हजार लोग लंगर पा सकेंगे।
ग्वालियर का सबसे बड़ा रसोईघर गुरुद्वारे परगुरुद्वारे में सबसे बड़़ा भोजनालय है। रोटियां बनाने के लिए स्वचलित मशीन लगाई गई है। यह मशीन एक घंटे में चार हजार रोटियां बनाकर तैयार कर देती है। इसके अतिरिक्त करीब सौ महिलाएं भोजनालय में मौजूद रहेंगी। यह महिलाएं एक घंटे में एक हजार से अधिक रोटियां बनाएंगी। सब्जी, चावल, दाल व अन्य पकवान बनाने के लिए स्टीम प्लांट लगा है। स्टीम प्लांट में एक साथ पांच क्विंटल सब्जी, दाल, चावल या फिर अन्य पकवान तैयार होंगे। व्यवस्थाओं को मद्देनजर रखते हुए १५ गैस की भट्टी लगाई गई है। गैस की भट्टी पर एक साथ तीन क्विंटल के आस-पास खाना बनाया जा सकेगा। दूध-दही, पनीर व अन्य खाने-पीने के पकवानों को सुरक्षित रखने के लिए 120 वर्ग फीट का कमरानुमा फ्रीज लगा है।
संगत भी लेकर आते हैं लंगर
गुरुद्वारा के सेवादार बाबा देवेंदर सिंह ने उत्सव की तैयारियां बाबा लक्खासिंह एवं बाबा प्रीतम सिंह की देख-रेख में चल रही हैं। उन्होंने बताया कि उत्सव में ग्वालियर-चंबल संभाग के सेवादारों द्वारा चार लंगर चलाए जाते हैं। इसके अलावा पंजाब और दिल्ली से आने वाली संगत भी लंगर लेकर आती है। हरेक लंगर पर २-३ हजार लोगों को प्रसादी वितरित की जाती है। सिंधी समाज की ओर से दाल-ब्रेड का लंगर चलाया जाता है। वहीं पंजाबी समाज की ओर से आईसक्रीम का लंगर चलाया जाता है।
Published on:
15 Sept 2017 09:55 am
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