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रमजान में बढ़ी खजूर की डिमांड, दो हजार रुपए किलो तक बिक रहा, 55 टन तक खपत

इस्लामिक परंपरा : खजूर से रोजा इफ्तार किया करते थे पैगंबर हजरत मोहम्मद

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रमजान में बढ़ी खजूर की डिमांड, दो हजार रुपए किलो तक बिक रहा, 55 टन तक खपत

रमजान में बढ़ी खजूर की डिमांड, दो हजार रुपए किलो तक बिक रहा, 55 टन तक खपत

ग्वालियर. माहे रमजान में शहर के बाजारों में खजूर की जबरदस्त मांग है। रोजा इफ्तार की परंपरा के कारण इस सीजन में खजूर की खपत कई गुना बढ़ जाती है। व्यापारियों का अनुमान है कि रमजान में शहर में करीब 50-55 टन खजूर की खपत हो सकती है। खजूर की विभिन्न किस्में आकर्षक पैङ्क्षकग में उपलब्ध हैं।
इफ्तार दावतों में अब खजूर दस्तरखान का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। इस्लामिक परंपरा के अनुसार पैगंबर हजरत मोहम्मद खजूर से रोजा इफ्तार किया करते थे। इसी कारण रमजान में खजूर से रोजा खोलना सुन्नत माना जाता है। जानकारों का कहना है कि पूरे दिन रोजा रखने के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा की आवश्यकता होती है। खजूर में प्राकृतिक शर्करा, फाइबर और आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

ये हैं खजूर की खास किस्में
ड्रॉयफ्रूट कारोबारी मनीष जैन और रौनक जैन ने बताया कि बाजार में 200 से लेकर 2 हजार रुपए तक के खजूर मौजूद हैं। अरब के आसपास की जगहों से खजूर ग्वालियर पहुंचता है। पहले खजूर सिर्फ सर्दी में ही उपयोग किया जाता था, पर अब सेहत के चलते लोगों ने इसका 12 महीने उपयोग करना शुरू कर दिया है। रमजान के इस पूरे महीने में शहर में 50 से 55 टन खजूर की खपत हो जाती है। वहीं सालभर में करीब 400 टन खजूर की खपत होती है। बाजार में फर्द, कलमी, ट््यूनेशियन जैसी किस्में मौजूद हैं। चॉकलेट खजूर बच्चों की पहली पसंद हैं।