
उत्पन्ना एकादशी 2018: जानिए उत्पन्ना एकादशी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
ग्वालियर। देवोत्थान एकादशी सोमवार को है। इस दिन तुलसी और भगवान सालिगराम का विवाह घरों और मंदिरों में धार्मिक रीति-रिवाज से कराया जाएगा। देवोत्थान एकादशी को लेकर शहर में बड़ी संख्या में गन्ना बेचने वाले आ गए हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के विश्राम के बाद नींद से जागते हंै। इसी दिन भगवान विष्णु (सालिगराम) और तुलसी के विवाह के आयोजन शुरू हो जाते हैं।
भगवान विष्णु के जागने के बाद चातुर्मास का समापन होता है। भगवान विष्णु के जागने के बाद ही शादियों का सिलसिला शुरू होता है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। इस दिन गन्ने का मंडप बनाकर पूजा की जाती है, इसलिए शहर में बड़ी संख्या में गन्ने बेचने वाले आए हैं।
दिसंबर में दो दिन ही होंगी शादियां
दिसंबर में दो दिन विवाह का मुहूर्त रहेगा। ६ दिसंबर को गुरु ग्रह का उदय हो जाएगा। कृष्ण पक्ष में तारा बल की प्रधानता नहीं होने से शादी व मांगलिक कार्य नहीं होंगे। पंडित नरेंद्र नाथ पांडेय का कहना है कि पहला मुहूर्त १२ दिसंबर को रहेगा। इस महीने में दो मुहूर्त ही हैं। इसके बाद शादियों पर फिर बे्रेक रहेगा। मकर संक्रांति के बाद ही शादियों होगा। शादियों का मुहूर्त २३ जनवरी के बाद शुरू होगा।
23 दिन बाद शुरू होंगे विवाह
हर बार देव जागने के बाद ही शादी का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस बार गुरु ग्रह और तारा बल अस्त रहने की वजह से २३ दिन कोई शादी नहीं होंगी। पहली शादी दिसंबर महीने में होने की बात पंडितों एवं ज्योतिषियों द्वारा कही जा रही है।
पंडित जीएम हिंगे के मुताबिक वर और कन्या के विवाह के समय गुरु ग्रह, शुक्र ग्रह और कृष्ण पक्ष में तारा बल और शुक्ल पक्ष में चंद्र बल की प्रधानता देखी जाती है। इस बार शुक्र ग्रह देवोत्थान से पहले उदय हो जाएगा, लेकिन गुरु ग्रह और तारा बल अस्त होने से शादी, विवाह व मांगलिक कार्य संपन्न नहीं हो सकेंगे।
Updated on:
19 Nov 2018 06:17 pm
Published on:
19 Nov 2018 06:07 pm
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