
सम्राट मिहिर भोज सबके हैं, इन्हें जाति में नहीं बांट सकते, नाम ऐसा होना चाहिए, जिसे पूजने में किसी को दिक्कत न हो
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के विवाद को सुलझाने के लिए संभागायुक्त को क्षत्रीय व गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि भगवान सबके हैं, वैसे ही सम्राट मिहिर भोज भी सबके हैं। उन्होंने समाज के लिए जो किया, उसकी वजह से सम्राट सबके लिए पूज्यनीय हैं। नाम ऐसा होना चाहिए कि जिसे पूजने में किसी को दिक्कत न हो। हमारा मानना है कि सम्राट मिहिर भोज के सामने यदि गुर्जर नहीं लिखा जाए या हटा दिया जाए तो प्रतिमा नहीं बदल जाएगी। प्रतिमा तो सम्राट की रहेगी। सिर्फ सम्राट मिहिर भोज लिखने में किसी को दिक्कत नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने संभागायुक्त को आदेश दिया है कि क्षत्रीय व गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करें। विवाद को सुलझाने का प्रयास करें। उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करें। कोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने संभागायुक्त को कोर्ट की आदेश के संबंध में पत्र लिखा है।
क्या है मामला
ग्वालियर निवासी राहुल साहू ने सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर उपजे विवाद को लेकर जनहित याचिका दायर की है। याचिका में तर्क दिया है कि क्षत्रीय व गुर्जर समाज के बीच प्रतिमा को लेकर विवाद हो रहा है। इससे शहर में ला एंड आर्डर की स्थिति बिगड़ रही है। इसके बाद कोर्ट ने 29 सितंबर 2021 को एक अंतरिम आदेश दिया था। प्रतिमा पर यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। चिरवाई नाके पर लगी प्रतिमा के शिलालेख को ढंक दिया गया। संभागायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी को तीन महीने में रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन अबतक रिपोर्ट नहीं आ सकी। हाईकोर्ट ने विवाद को खत्म करने नई पहल की है। दोनों पक्षों से वार्ता कर बीच का रास्ता निकाला जाएगा।
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Published on:
04 Jan 2024 11:39 am
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