ग्वालियर। करीब सात शताब्दी पहले बने मान महल की खूबसूरती को दमकाने और उसे बनाए रखने में सूरज का भी योगदान है। ये महल रोजाना सूर्य स्नात करता है। मान महल ग्वालियर शहर का सबसे ऊंचा महल है, जहां सूर्य की रोशनी सबसे पहले पड़ती है।
रोजाना सूर्य स्नान के चलते आज भी सात शताब्दी पहले बने इस महल के योजनाकार महाराजा मान सिंह तोमर के खूबसूरत मस्तिष्क का पता चलता है। ये बात किसी से छिपी नही है कि ग्वालियर किला और उसके राज्य के निर्माता के यप में सूरज सेन विख्यात हैं।
इसके बाद विख्यात कुषाण शासक महिर कुल ने यहां सूर्य मंदिर 500 ईस्वी सन में बनवाया। इतिहासकार कहते हैं कि ग्वालियर के निर्माता के रूप में सूर्य की दिव्यता विशेष रही है। यही वजह है कि मराठा शासक महादजी ङ्क्षसधिया ने भी अपने राज्य के प्रतीकों में सूर्य को सर्वोच्य स्थान दिया।
मान महल किले के ऊपर साठ फीट चौड़ा, साठ फीट लम्बा और साठ फीट ऊंचा है और इतना ही गहरा है। सूर्य की रोशनी से किले की छवि कैसे भव्य हो उठती है, इसका सुंदर विवरण विख्यात इतिहासकार हरिहरनिवास द्विवेदी ने दिया है,
उन्होंने लिखा है कि आज से सात शताब्दी पहले किसी प्रभात वेला में जब किसी सुंदर यात्री ने पूर्व की ओर मरी-चिमाली यानी सूर्य की भव्य प्रथम रौशनी को गोपाचल पर्वत के मस्तक पर गिरते देखा होगा...इंद्र धनुष के र ंगों में रंजित आभा सौंदर्य और विलासिता देखी होगी..। दरअसल रोजाना सूर्य की रोशनी अब मान महल को टकराकर इंद्रधनुष बनाती है। जिसे देखने रोजाना सेंकड़ों पर्यटक या स्थानीय सैलानी पहुंचते हैं।
मान महल की खूबसूरती से जुड़ी खास बातें............
महल की दीवारों में सबसे नीचे मकर पंक्तियों के सामने कमल बना है। उसके सामने हंस की पांत उकेरी गई है। जो उस समय की जीवन की सौम्यता, पवित्रतता और खूबसूरती का परिचायक है।
महल में जालीदार झरोखे हैं। पत्थरों पर लाल नीले,हरे और पीले रंग से लेप किया गया है। ये किसी को नहीं पता कि ये अभी तक अमिट क्यों हैं।
ये रंग किस चीज से बने हैं। इसकी प्रमाणिक वजह अभी तक अज्ञात है। हालांकि कवि नारायण दास ने अपने काव्य में लिखा है कि बावन वस्तु मलई कर तानी अति अनूप आरसी समानी। जाहिर है कि 52 वस्तुओं को मिलाकर कोई लेप बनाया गया होगा।महल के सबसे ऊपर सिंह, गज और कदली की आकृतियां बड़ी खूबसूरती से उकेरी गई हैं।मान महल विशुद्ध हिन्दू स्थापत्य कला का अद्तीय नमूना है।
राजा मान सिंह तोमर ने इसका सबसे पहला नाम चित्र महल दिया था। इसकी अंदरूनी खूबसूरती भव्यतम है। जिसका मुकाबला दूसरा कोई महल नहीं कर सकता है।