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बच्चों को सुविधाओं के साथ संस्कार दें : राघव ऋषि

- ऋषि सेवा समिति की श्रीमद्भागवत कथा का सप्तम दिवस

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बच्चों को सुविधाओं के साथ संस्कार दें : राघव ऋषि

बच्चों को सुविधाओं के साथ संस्कार दें : राघव ऋषि

ग्वालियर. ऋषि सेवा समिति की ओर से सहयोग गार्डन में की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस कथाचार्य राघव ऋषि ने कहा कि हम बच्चों को संस्कार नहीं भोग देते हैं, ऐसे में जब उन पर थोड़ा सा कष्ट आता है तो वे दु:खी और परेशान हो जाते हैं। लेकिन बच्चों को यदि हम संस्कारित करेंगे तो वे जीवन की हर कठिनाई का सामना हंसते-हंसते कर सकेंगे। इस कथा प्रवाह का विश्राम शुक्रवार को भंडारे के साथ होगा। इससे पूर्व सुबह 9 से 12 बजे तक विविध प्रसंगों की कथा होगी।

गुरूवार की कथा का सबसे प्रमुख आकर्षण सुदामा चरित्र की कथा थी। राघव ऋषि ने कहा कि सुदामा की पत्नी सुशीला अपने दरिद्र पति की पूरी निष्ठा से सेवा करती थी। पति यदि धनवान और सुख सुविधा का भोग कराने वाले हैं ऐसे पति की सेवा तो सब करते हैं, लेकिन वो पत्नी धन्य हैं जो अपने दरिद्र पति की सेवा पूरी तन्मयता से करती है। पति-पत्नी साथ-साथ रहकर प्रभु सेवा करते रहें तो ऐसा गृहस्थ आश्रम संन्यास से भी श्रेष्ठ कहा गया हैं, ऐसे घर में कभी तनाव और क्लेश नहीं होता है।

भगवान के मंदिर में खाली हाथ न जाएं
सुदामा चरित्र की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि सुदामा ने तन मन से तो भगवान की सेवा की लेकिन धन से नहीं की जिसकी वजह से उन्हें दरिद्रता का अभिशाप मिला। इसलिए कभी भी भगवान के मंदिर और गुरू के पास जाएं तो खाली हाथ न जाएं, कुछ न कुछ साथ लेकर अवश्य जाएं। भगवान उससे कई गुना आपको वापस देगा। जिसकी इच्छाएं बहुत ज्यादा हैं, वह भी दरिद्र है। ईश्वर ने हमें तीन चीजें दी हैं-तन, मन, धन जो भगवान को नहीं देता वह दरिद्र होता है।

भगवान की ओर दो कदम बढ़ाकर देखो
राघव ऋषि ने कहा कि द्वारिका जाते समय कमजोरी की वजह से सुदामा को रास्ते मेें मूर्छा आ गई तो भगवान ने उन्हें गरूण के माध्यम से द्वारिका पहुंचाया। अर्थात मनुष्य यदि दो कदम प्रभु की ओर बढ़ाए तो वह सौ कदम उसे अपने ओर खींच लेते हैं। सुदामा जब द्वारिका पहुंचे तो सौरभ ऋषि ने अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो...भजन से समूचे पांडाल में मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने आगे बताया कि भगवान ने सोलह हजार उपासना रूपी वेद की ऋचाओं से विवाह किया। गृहस्थ आश्रम धर्म का वर्णन वेद के 16 हजार मन्त्रों में किया गया जो कृष्ण की सोलह हजार रानियां कही गई हैं।