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नन्हीं उंगलियों की चाल से दुनिया को देगी मात, जॉर्जिया में चमकेगा ग्वालियर की अंशिका का हुनर

अंशिका के पिता जिनेंद्र जैन बताते हैं, पढ़ाई के साथ किसी खेल में रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से कोच ऋषभ जैन की सलाह पर अंशिका ने शतरंज खेलना शुरू किया था।
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ग्वालियर. जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं और कार्टून की दुनिया में खोए रहते हैं, उस उम्र में ग्वालियर की आठ वर्षीय अंशिका जैन शतरंज की बिसात पर अपनी सूझबूझ और शानदार चालों से सभी को हैरान कर रही हैं। महज दो साल पहले शतरंज का पहला मोहरा हाथ में लेने वाली अंशिका अब जून में जॉर्जिया में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित वर्ल्ड कप शतरंज टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। खास बात यह है कि वह मध्यप्रदेश की पहली बेटी होंगी, जिन्हें इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला है। अंशिका की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा ग्वालियर शहर गर्व महसूस कर रहा है।

इन दिनों अंशिका वर्ल्ड कप की तैयारियों में पूरी मेहनत से जुटी हुई हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से वह रोजाना कई घंटों तक अभ्यास करती हैं। छोटी उम्र में ही उनका आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण लोगों को प्रेरित कर रहा है। अंशिका का सपना भविष्य में विश्व चैंपियन और ग्रैंड मास्टर बनने का है। अंशिका कहती हैं, “वर्ल्ड कप में खेलना मेरे लिए सपने जैसा है। मैंने इतनी जल्दी इस स्तर तक पहुंचने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन मुझे हमेशा खुद पर भरोसा था। अब मैं अच्छा प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करना चाहती हूं।”

पहले ही टूर्नामेंट में कर दिया कमाल

अंशिका के पिता जिनेंद्र जैन बताते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ किसी खेल में रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने बेटी को शतरंज से जोड़ा। कोच ऋषभ जैन की सलाह पर अंशिका ने शतरंज खेलना शुरू किया और शुरुआती दिनों से ही उसकी प्रतिभा सभी के सामने आने लगी। पहले ही टूर्नामेंट में अंशिका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने सभी पांच मुकाबले जीत लिए और राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लिया। इसके बाद उड़ीसा में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में भी उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया और 5.5 अंक हासिल कर जॉर्जिया में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पक्की कर ली।

पिता बताते हैं कि अंशिका का शतरंज के प्रति जुनून इतना अधिक है कि वह हर परिस्थिति में अभ्यास और प्रतियोगिता को प्राथमिकता देती हैं। कई बार परीक्षा और टूर्नामेंट की तारीखें एक साथ आईं, लेकिन अंशिका ने पहले परीक्षा दी और उसके तुरंत बाद प्रतियोगिता में खेलने पहुंच गईं। सुबह पांच बजे उठकर नियमित अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। हाल ही में ग्वालियर में आयोजित एक शतरंज प्रतियोगिता में उन्हें “प्रिंसेस ऑफ ग्वालियर” के खिताब से सम्मानित भी किया गया।

अंशिका की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर छोटी उम्र में भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं। अब पूरे ग्वालियर और मध्यप्रदेश की निगाहें जॉर्जिया में होने वाले वर्ल्ड कप पर टिकी हैं, जहां यह नन्हीं खिलाड़ी अपने हुनर से देश का गौरव बढ़ाने के लिए तैयार है।