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ग्वालियर… संपदा-2 में पहली बार सेंध: नगर निगम की फर्जी प्रॉपर्टी आइडी से 2.06 करोड़ का प्लॉट बेच डाला

रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और फर्जीवाड़ा मुक्त बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए संपदा-2 सॉफ्टवेयर में पहली बार बड़ी सेंध का मामला सामने आया है। जालसाजों ने नगर निगम की फर्जी प्रॉपर्टी ...
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gwalior news

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ग्वालियर. रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और फर्जीवाड़ा मुक्त बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए संपदा-2 सॉफ्टवेयर में पहली बार बड़ी सेंध का मामला सामने आया है। जालसाजों ने नगर निगम की फर्जी प्रॉपर्टी आइडी तैयार कर करीब 2 करोड़ 6 लाख रुपए कीमत का प्लॉट बेच डाला। हैरत की बात यह है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री भी हो गई। पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब खरीदार प्लॉट पर कब्जा लेने पहुंचा और असली मालिक ने जमीन बेचने से ही इनकार कर दिया।

मामला टैगोर नगर के मुख्य मार्ग (कुलपति चौराहा रोड) स्थित सुरेश बनवानी के प्लॉट का है। सुरेश बनवानी के नाम नगर निगम में वैध नामांतरण और मूल प्रॉपर्टी आइडी दर्ज है। पुराने मकान को हटाने के बाद वे प्लॉट की बाउंड्री करा रहे थे और सुरक्षा के लिए गार्ड भी तैनात था। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनकी जमीन की रजिस्ट्री किसी और के नाम हो चुकी है।

25.79 लाख रुपए की स्टांप ड्यूटी जमा कराई

रजिस्ट्री लेखन का कार्य सेवा प्रदाता विवेक शर्मा ने किया, जबकि करीब 25.79 लाख रुपए की स्टांप ड्यूटी जमा कराई गई। यह दस्तावेज 15 मई 2025 को उप-पंजीयक मनोज सिहारे के समक्ष प्रस्तुत हुए। जानकारी के अनुसार रजिस्ट्री पांच दिन तक होल्ड पर रही और एक बार सेवा प्रदाता को वापस भी की गई, लेकिन बाद में उसे मंजूरी दे दी गई। दस्तावेजों में विक्रेता के रूप में जयनारायण ङ्क्षसह का आधार कार्ड लगाया गया और ओटीपी भी उसी के मोबाइल नंबर पर प्राप्त हुई। इतना ही नहीं, रजिस्ट्री के समय पूरी भुगतान राशि भी नहीं दी गई। विक्रेता को अगस्त 2025 के पोस्ट डेटेड चेक सौंपे गए, जिससे पूरे सौदे पर और अधिक संदेह गहरा गया। इस मामले ने नगर निगम की प्रॉपर्टी आइडी सत्यापन प्रणाली, सेवा प्रदाता की भूमिका और रजिस्ट्री प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि पुराने स्वामित्व दस्तावेज और पूर्व रजिस्ट्रियों का सत्यापन किया जाता, तो इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं था।

पहले फर्जी प्रॉपर्टी आइडी बनवाई

जांच में सामने आया कि जालसाजों ने सबसे पहले सुरेश बनवानी के प्लॉट की नगर निगम से प्रॉपर्टी फर्जी आइडी तैयार कराई। इस फर्जी आइडी के आधार पर टैक्स रसीद बनाई गई और उसे रजिस्ट्री के दस्तावेजों के साथ संलग्न कर दिया गया। इसके बाद ङ्क्षभड जिले के लहार निवासी जयनारायण ङ्क्षसह को कागजों में विक्रेता दर्शाकर यमुना नगर निवासी अशोक ङ्क्षसह और नई विवेकानंद कॉलोनी निवासी धर्मेंद्र ङ्क्षसह के नाम 2.06 करोड़ रुपए में प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी गई।

यह बोले… संबंधित थाने में आवेदन भेज रहे हैं

मामला गंभीर है, नगर निगम को सत्यापन के लिए पत्र भेजा जा रहा है और एफआइआर दर्ज कराने के लिए संबंधित थाने में आवेदन भी भेजा जा रहा है।
अशोक शर्मा, जिला पंजीयक

जांच होनी चाहिए

संपदा-2 में आधार आधारित सत्यापन के कारण फर्जी रजिस्ट्री की गुंजाइश नहीं है। यदि नगर निगम की फर्जी प्रॉपर्टी आइडी के आधार पर रजिस्ट्री हुई है तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जानी चाहिए।
मनोज सिहारे, उप-पंजीयक