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Gwalior pollution… सड़कों पर उड़ती धूल, बिना ढंके निर्माण कार्यों से खराब हो रही शहर की आबोहवा

सड़कों पर उड़ती धूल, बिना ढंके निर्माण कार्य, वाहन से निकलने वाले धुएं से शहर में फिर प्रदूषण बढ़ने लगा है। इससे ग्वालियर का एक्यूआइ तेजी से बढ़ रहा है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के ..

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Gwalior pollution सड़कों पर उड़ती धूल, बिना ढंके निर्माण कार्य, वाहन से निकलने वाले धुएं से शहर में फिर प्रदूषण बढ़ने लगा है। इससे ग्वालियर का एक्यूआइ तेजी से बढ़ रहा है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के ...

Gwalior pollution

#Gwalior pollution… सड़कों पर उड़ती धूल, बिना ढंके निर्माण कार्य, वाहन से निकलने वाले धुएं से शहर में फिर प्रदूषण बढ़ने लगा है। इससे ग्वालियर का एक्यूआइ तेजी से बढ़ रहा है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के समीर ऐप पर ग्वालियर में एक्यूआइ 157 दर्ज किया गया है। जबकि जबलपुर में एक्यूआइ 164, भोपाल में 113 व इंदौर में 64 है। शहर में प्रदूषण का लेवल बीते दो सप्ताह में ही 80 से बढ़कर 157 पर पहुंच गया है। लेकिन प्रदूषण बढ़ने पर भी जिला प्रशासन, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम, स्मार्ट सिटी, आरटीओ, खाद्य विभाग, यातायात पुलिस, पीडब्ल्यूडी, हाउसिंग बोर्ड, कृषि विभाग व वन विभाग मिलकर भी इसे कंट्रोल करने के लिए सख्त कदम नहीं उठा रहे हैं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ग्वालियर में वायु गुणवत्ता को कम करने निगम, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड सहित अन्य विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं। इन विभागों की ओर से अब तक कोई कड़े कदम नहीं उठाए गए हैं। शहर में प्रदूषण बढऩे से वायु गुणवत्ता भी लगातार खराब होती जा रही है। खास बात यह है कि प्रदूषण की मॉनिंटरिंग के लिए बोर्ड की ओर से महाराज बाड़ा, फूलबाग, सिटी सेंटर व डीडी नगर में प्रदूषण की जांच के लिए ऑनलाइन मशीन लगाई गई हैं, लेकिन यहां भी प्रदूषण का स्तर 100 से अधिक ही जा रहा है।

93 करोड़ खर्च फिर भी सुधार नहीं

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से 15वें वित्त के लिए सभी निगम को राशि दी जाती है। ग्वालियर नगर निगम को बीते तीन साल में वायु प्रदूषण सुधार के लिए 93 करोड़ रुपए मिले हैं और निगम वह राशि भी खर्च कर चुका है। उसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ और प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगली किस्त के रूप में निगम को पैसे कम मिल सकते हैं।

ये विभाग उठाएं सख्त कदम

  • प्रदूषण विभाग : प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती के साथ कार्रवाई करें। वर्तमान में शहर में 200 से अधिक उद्योगों में लकड़ी, कोयला, एग्रो ब्रिकेट का उपयोग हो रहा है।
  • परिवहन विभाग : पुराने वाहन मानक स्तर से अधिक धुआं उगल रहे हैं। वाहनों पर सख्त कार्रवाई करें व इलेक्ट्रिक व्हीकल व सीएनजी वाहनों को बढ़ावा दें।
  • नगर निगम : निर्माण कार्यों व कंडम वाहनों से फैल रही धूल-मिट्टी पर सख्ती, स्मॉग टावर लगाए जाएं, जर्जर सड़क फुटपाथ पर पानी का प्रतिदिन छिड़काव व डस्ट फ्री सड़कें व सभी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य ढंककर किया जाए।
  • स्मार्ट सिटी : स्मार्ट सिटी के शहर में चल रहे प्रोजेक्ट का खुले में निर्माण हो रहा है। इससे आमजन भी परेशान हैं। निर्माण कार्य ढंककर ही किया जाए।
  • बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण : जेएएच, सिविल अस्पताल, हजीरा अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों व नर्सिंग होम से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण किया जाए।

गुणवत्ता का यह है पैमाना

प्रदूषण के लिए एयर क्वॉलिटी इंडेक्स एक्यूआई निर्धारित किया गया है। एक्यूआइ में 0 से 50 तक के बीच होने पर गुड श्रेणी में आता है। 51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 तक मॉडरेट, 201 से 300 में पुअर, 301 से 400 रहने पर सीवर श्रेणी में आता है।

प्रदूषण का बढ़ना चिंताजनक

शहर में प्रदूषण बढ़ना चिंता का विषय है। प्रदूषण अधिक होने से आमजन को हवा में सांस लेने से श्वास संबंधी रोग, ब्रोंकाइटिस, गले का दर्द, निमोनिया, फेंफड़ों का कैंसर, हदय रोग व मधुमेह सहित अन्य बीमारियों का खतरा रहता है।

प्रदूषण बढ़ने का कारण

शहर की सड़कों की खुदाई के बाद समय पर पैचवर्क नहीं करना, बदहाल सड़कें, बिना ढंके निर्माण कार्य, ग्रामीण व शहरी वार्डों में कचरा संग्रहण नहीं होने पर कचरा जलाना, निर्माण कार्य की तोडफ़ोड़, सीएनडी वेस्ट व सड़कों पर पड़े मटेरियल का कलेक्शन नहीं होना, वाहनों के अधिक होने से धूल का लगातार उडऩा और सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं करना।

यहां रहता सबसे अधिक प्रदूषण

शहर के बहोड़ापुर, 7 नंबर चौराहा, महाराज बाड़ा, फूलबाग, बारादरी चौराहा, गोला का मंदिर, कंपू, सिकंदर कंपू, चार शहर का नाका, किला गेट, सिटी सेंटर, गिरवाई क्षेत्र, डीडी नगर।

प्रदूषण में स्थिति

जबलपुर-164 एक्यूआइ
ग्वालियर-157 एक्यूआइ
सागर-146 एक्यूआइ
भोपाल-113 एक्यूआइ
सिंगरोली-111 एक्यूआइ
इंदौर-64 एक्यूआइ

प्रदूषण की स्थिति

सिटी सेंटर : : पीएम 10-107, पीएम 2.5-37, एक्यूआइ-115
महाराज बाड़ा : : पीएम10-115, पीएम 2.5-36, एक्यूआइ-142
फूलबाग : : पीएम 10-135, पीएम 2.5-84, एक्यूआइ-156
डीडी नगर : : पीएम10-152, पीएम 2.5-92, एक्यूआइ-166
पीएम-10 : यह कण शहर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों व लैंडफिल साइट, जर्जर सड़कों से निकलने वाले धूल के कण, कचरा जलाने से होने वाले धुएं, औद्योगिक स्त्रोत व हवा में उड़ने वाली धूल में होते हैं।
पीएम-2.5 : यह कण तेल, गैसोलीन, डीजल, ईधन अथवा लकड़ी के दहन से होने वाले उत्सर्जन से निकलते हैं।

एक्सपर्ट व्यू... सड़कों पर छिड़काव, निर्माण कार्य ढंककर हों

शहर में अधिकतर स्थानों पर निर्माण कार्य जारी हैं और वह खुले में हो रहे हैं। साथ ही शहर की जर्जर सड़कों, वर्षों पुराने वाहन से निकलने वाला धुआं व उड़ती धूल से प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिम्मेदार अफसरों को सड़क पर छिडकाव करने के साथ ही निर्माण कार्य ढंककर करने से कुछ हद तक प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ.अनीश पाण्डे, पर्यावरण विशेषज्ञ साइंस कॉलेज

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