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यहां 300 साल से हिन्दू-मुस्लिम कर रहे हैं राजा बाक्षर की पूजा, ऐसी है महिमा

इंटॉलरेंस के बीच ग्वालियर के राक्षा बाक्षर साहेब की दरगाह एक ऐसा स्थान है जहां हिन्दू और मुसलमान समुदाय के लोग साथ-साथ पूजा करते हैं।

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Shyamendra Parihar

Apr 02, 2016

hindu-muslim worship together

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ग्वालियर। देश के फैली इंटॉलरेंस के बीच ग्वालियर के राक्षा बाक्षर साहेब की दरगाह एक ऐसा स्थान है जहां हिन्दू और मुसलमान समुदाय के लोग साथ-साथ पूजा करते हैं। राजा बाक्षर के लोग बताते हैं कि राजा बाक्षर ने कभी भी हिन्दुओं और मुस्लिमों में कोई भेद-भाव नहीं किया इसलिए उनके भक्त भी कोई भेदभाव नहीं रखते।


सुबह होता है अभिषेक तो शाम को चादरपोशी
पीर साहेब राजा बाक्षर महाराज दरगाह पर तीन दिवसीय उर्स समारोह का आयोजन बाबा के अभिषेक और रूद्राभिषेक के साथ गुरुवार को शुरू हुआ। हुजरात नाला स्थित राजा बाक्षर दरगाह पर सुबह अभिषेक के साथ 11 ब्राह्मणों द्वारा वैदिक विधि विधान से रूद्राभिषेक कराया गया।
राजा बाक्षर साहेब का स्थान देश में मंदिर और दरगाह का मिला-जुला रूप कहा जा सकता है, जहां सुबह राजा बाक्षर का रूद्राभिषेक किया जाता है तो शाम को उनकी दरगाह पर चादरपोशी की जाती है।

उर्स में सुबह भजन तो शाम को होती है कव्वाली
पीर साहेब राजा बाक्षर की महिमा ही कुछ ऐसी है कि उनके उर्स में पूरा शहर चला आता है। सुबह भजन गायन होता है तो शाम को कव्वाली का आयोजन होता है।उर्स के जलसे में शुक्रवार को कुल का अभिषेक, भंडारा और रात 9 बजे से कव्वाली का आयोजन किया जाएगा। उर्स के समापन अवसर पर 2 अप्रैल को कुल की छींटा, गुस्ल संदल, नियाज का आयोजन किया जाएगा।

300 साल पहले सतारा से आए थे बाबा
राजा बाक्षर साहेब की सेवा करने वाले संजय इतापे बताते हैं कि उनका परिवार 300 सालों से बाबा की सेवा कर रहा है और वो चौथी पीढ़ी है, तो बाबा की सेवा में है। उन्होंने बताया कि वे उनके पूर्वज बाबा के साथ सतारा से ग्वालियर आए थे। उस समय से अभी तक इतापे परिवार राजा बाक्षर साहेब की सेवा करता आ रहा है।