पीर साहेब राजा बाक्षर की महिमा ही कुछ ऐसी है कि उनके उर्स में पूरा शहर चला आता है। सुबह भजन गायन होता है तो शाम को कव्वाली का आयोजन होता है।उर्स के जलसे में शुक्रवार को कुल का अभिषेक, भंडारा और रात 9 बजे से कव्वाली का आयोजन किया जाएगा। उर्स के समापन अवसर पर 2 अप्रैल को कुल की छींटा, गुस्ल संदल, नियाज का आयोजन किया जाएगा।