
ग्वालियर। शहर का मावा शंका के घेरे हैं। मिलावट को लेकर सवाल उठ रहे हैं।पांच लीटर दूध में एक किलो मावा बन रहा है। उस पर सब खर्च जोडऩे के बाद दूध के भाव से भी मावा सस्ते दाम पर बेचा जा रहा है। आखिर यह सब संभव कैसे हो रहा है। इसकी पड़ताल के लिए पत्रिका ने मावा बाजार पहुंचकर हकीकत जानने की कोशिश की। एक दुकानदार से जब सस्ता मावा बेचने का सवाल किया गया, तो उसने कहा कि जहां मावा बनता है वहां दूध के दाम कम है। जाहिर सी बात है किडिमांड को पूरा करने के लिए मिलावटी मावा बनाया जाता है।
पड़ताल में पता चला कि बाजार में मावा का रेट 180 से 220 रुपए किलो चल रहा है। जबकि दूध का बाजार भाव 55 रुपए किलो तक है। एक किलो दूध में मुश्किल से 200 से 240 ग्राम तक मावा निकलता है। इस लिहाज से एक किलो मावा तैयार करने के लिए करीब 300 रुपए का दूध खरीदना होगा। इसके बाद उसे तैयार करने में ईंधन खर्च अलग से होता है। ऐसे में फिर 180 से 2२0 रुपए में शुद्ध मावा कैसे मिल सकता है। शहर के मोर बाजार में थोक एवं खेरीज में मावा मिलता है। जो भिण्ड व मुरैना से आता है। इन दोनों शहरों में काफी तादाद में मिलावटी मावा तैयार किया जाता है।
दीप पर्व पर घर में मावे की बनी मिठाईयों का विशेष चलन है। इसके लिए आमजन मावे की खरीदी करते हैं। पिछले कुछ समय से मिलावटी मावे के डर से शहरवासियों को सामने खड़े होकर ही मावा बनवाना रास आ रहा है। भले ही इसके लिए कुछ समय और कुछ अतिरिक्त रुपए देना पड़ जाए पर फिर भी लोग सेहत की सुरक्षा के चलते इस मावे का लेना पसंद कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में इस तरह के मावे की बिक्री काफी बढ़ जाती है।
यहां मिलता है ये मावा
शहर के दही मंडी, छत्री मंडी, माधौगंज, उपनगर ग्वालियर, हजीरा, मुरार आदि जगहों पर ग्राहक के सामने ही मावा बनाकर तैयार करके दिया जाता है। अभी तक तो इस तरह का मावा दुकान में काम करने वाले लोग ही करते थे, पर कुछ दुकानदारों ने खपत बढऩे के कारण इस तरह का मावा मशीनों से बनाना भी शुरू कर दिया है।
दामों का अंतर
बाजार में बिकने वाला मावा - 220 से 240 रुपए प्रति किलो
सामने बनाकर डेयरियों पर बिकने वाला मावा - 300 से 320 रुपए प्रति किलो
त्योहारी सीजन में खपत
आम दिनों में शहर में इस तरह के मावे की रोजाना की खपत करीब 150 किलो रहती है, जो त्योहारी सीजन में 350 किलो तक जा पहुंचती है।
बाजार में मांग
आम दिनों में भी इस मावे की अच्छी बिक्री होती है, त्योहारी सीजन में तो इसकी बिक्री और अधिक बढ़ जाती है। लोग अधिक रुपए देकर भी अच्छी चीज लेना पसंद करते हैं।
सुरजीत सिंह, मावा कारोबारी
मिलावट के संदेह पर हमने हाल ही में मावा के सैंपल लिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हकीकत सामने आएगी।
लखनलाल कोरी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
Published on:
16 Oct 2017 03:16 pm
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