28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

90 मिनट में 50 कलाकारों ने वीर मधुकर शाह बुंदेला के साथ स्वतंत्रता आंदोलन को किया जीवंत

- राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में बीस दिवसीय नाट्य एवं अभिनय कार्यशाला के अंतिम दिन बुंदेला विद्रोह नाटक का हुआ मंचन

2 min read
Google source verification
90 मिनट में 50 कलाकारों ने वीर मधुकर शाह बुंदेला के साथ स्वतंत्रता आंदोलन को किया जीवंत

90 मिनट में 50 कलाकारों ने वीर मधुकर शाह बुंदेला के साथ स्वतंत्रता आंदोलन को किया जीवंत

ग्वालियर. आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर और राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के नाट्य एवं रंगमंच संकाय की ओर से चल रही बीस दिवसीय नाट्य एवं अभिनय कार्यशाला के अंतिम दिन मंगलवार को बुंदेला विद्रोह नाटक का मंचन किया गया। 50 युवा कलाकारों ने मधुकर शाह बुंदेला और उनके साथियों की वीरता को मंच से प्रदर्शित किया। 10 कलाकार बैक स्टेज रहे। बेहतर म्यूजिक और साउंड इफेक्ट्स के साथ 90 मिनट के इस नाटक के मंचन ने बुंदेलखंड के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन और उसके नायक मधुकर शाह को जीवंत कर दिया।

अंतिम सांस तक नहीं स्वीकारी गुलामी
बुंदेला विद्रोह नाटक के मंचन में कलाकारों ने वीर मधुकर शाह की कहानी के साथ आंदोलन को दर्शाया। अंग्रेजों की दमनकारी नीति के खिलाफ उठने वाला 1842 का बुंदेलखंड विद्रोह आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। बुंदेलखंड के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से जाना जाने वाले इस विद्रोह के नायक नारहट के जमीदार मधुकर शाह बुंदेला थे, जिन्होंने अंग्रेजों की कर वसूली और जनता पर किए गए अत्याचार के विरोध में विद्रोह का झंडा बुलंद किया। इसमें उनके साथ सारे बुंदेलखंड के कई जमीदार और राजा अंग्रेजों के खिलाफ एक होकर खड़े हो गए। हालांकि अंग्रेजों ने विद्रोह का दमन करते हुए 1843 में मधुकर शाह को गिरफ्तार कर सागर की जेल में फांसी दे दी गई और उनके अन्य साथियों पारीक्षत और विक्रम सिंह आदि की भी हत्या कर दी गई। गणेश जू को काला पानी की सजा दी गई। इसके बावजूद बुंदेलखंड विद्रोह के इस महान नायक ने अंतिम सांस तक अंग्रेजों की गुलामी को स्वीकार नहीं किया।

इनकी रही मुख्य भूमिका
लेखक-निर्देशक : डॉ.हिमांशु द्विवेदी
सूत्रधार-तरूण जलोटा, रितिका पिंगोरिया, मधुकर शाह-अखंड सिंह चौहान, गणेश जू- प्रतीक, मधुकर शाह की बहन- तान्या, जवाहर सिंह- अजीज, हिरदेय शाह- भूपेंद्र, राव साहब- कपिल, विक्रमजीत सिंह- सिद्धार्थ, मदन सिंह- अर्पिता आर्य, झांसी की रानी- नितिन वर्मा, फ्रेजर- कनिष्क, ओमनी- देव, अंग्रेज- विशाल, अनुराग, लल्ला रामसिंह- मुकेश, आरव- मुनादी, संदेश वाहक, कोरस- अनिकेत, कोरस- अलका वेदोरिया, हर्ष, रूबी, मोनिका, नैंसी, विनय, सिद्धार्थ, विवेक, गायक- आदित्य, ऐश्वर्य, अरविंद, यश, प्रतीक, अजीज, मुकेश, कनिष्क, रजत।

ये रहे मौजूद
नाटक मंचन के दौरान मुख्य अतिथि संभागायुक्त दीपक सिंह, विशिष्ट अतिथि देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर और उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक महेश प्रताप सिंह बुंदेला सहित दक्षिण मध्य सांस्कृतिक केंद्र नागपुर के कोऑर्डिनेटर जीएस प्रजापति मौजूद रहे। विवि की ओर से कुलपति प्रो.साहित्य कुमार नाहर, कुलसचिव प्रो.राकेश सिंह कुशवाह आदि मौजूद रहे।