
International Fraud in MP: माधवनगर (झांसी रोड) के होटल में बैठकर अमरीका के लोगों को ठगने वाली गैंग की कडिय़ां लंबी हो रही हैं। पकड़े गए फ्रॉडस्टर बता रहे हैं धंधे में मोटी कमाई तो सरगना मोंटी सिकरवार की थी। ठगी का पैसा सीधे दुबई में मोंटी के वॉलेट में जमा होता था। टीम को मोंटी एक कॉल पर 5 प्रतिशत कमीशन देता था। उन्हें रकम हवाला के जरिए मिलती थी। ठगों से पूछताछ के लिए गुरुवार को अमरीका होम लैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट की टीम भी ग्वालियर पहुंच रही है।
माधवनगर के होटल आशीर्वाद के रूम नंबर 204 से सात ठगों की टीम पकड़ी गई थी। यह लोग माइक्रो साॅफ्टवेयर कंपनी के कर्मचारी बनकर अमरीका के लोगों को फोन कर उनके कम्पयूटर, लैपटॉप में वायरस होना बताकर फंसाते थे। पकड़े गए फ्रॉडस्टर अब बता रहे हैं उन्हें अमरीका के लोगों के नंबर सरगना मोंटी सिकरवार वॉट्सऐप ग्रुप पर मुहैया कराता था। एक कॉल पर टीम मेंबर को 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था। ज्यादा पैसा कमाने के लिए टीम दनादन फोन ठोंकती थी। एक बार जो फंसता था उससे कम से कम 1500 डॉलर तो ऐंठते थे। यह रकम सीधे दुबई में मोंटी सिकरवार के वॉलेट में पहुंचती थी। उसे भुगतान गिफ्ट कार्ड के जरिए होता था।
विदेशियों को ठगने वाली देसी टीम धंधे के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं कर पाई है। इन लोगों का कहना है सरगना मोंटी के अलावा करण गैंग को ऑपरेट करता था। उसने ही कॉल सेंटर में काम करने हवाला देकर टीम तैयार की थी। उसे पुलिस नहीं पकड़ पाई। करण को धंधे के सारे राज पता हैं।
- फ्रॉड टीम में मुुंबई, मेघालय, गोरखपुर और ओरछा के लोग शामिल है। इन्हें कैसे इकट्ठा किया गया है।
- टीम को हवाला के जरिए कमीशन किन लोगों के जरिए पहुंचाता था।
- लोकल स्तर पर ठगों के किन बैंक में खाते हैं उनमें कितना पैसा आता था।
अभय पुत्र रणवीरसिंह राजावत 31 वार्ड नंबर 07 ओरछा, नीतेश कुमार पुत्र राधाकृष्ण प्रसाद 26 कटकुईया (गोरखपुर), दीपक पुत्र सुनील कुमार थापा 29 विष्णुपुर (मेघालय), परवेज पुत्र मकसूद आलम 22 रशूलपुर (गोरखपुर), श्वेता पुत्री महेश कुमार 24 (गोरखपुर), राज पुत्र सरेजराव कैलाशकर 28 वेस्ट मुम्बई, सुरेश वासेल पुत्र शिबू वासेल 29 शिलांग मेघालय ।
इंटरनेशनल फ्रॉड में जांच के लिए गुरुवार को अमरीका की होम लैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट की टीम ग्वालियर आ रही है। उसके जरिए पता चलेगा कि देसी ठगों का अमरीका में किन लोगों से कनेक्शन है। इन्हें वहां रहने वालों के बारे में जानकारियां कैसे मिलती थीं।
- हिना खान, सीएसपी विश्वविद्यालय सर्किल
Updated on:
04 Apr 2024 08:06 am
Published on:
04 Apr 2024 08:02 am

बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
