निजी मेडिकल हटाने और अमृत का स्टाफ हटाने के लिए अधीक्षक ने लिखा पत्र
ग्वालियर. अंचल के सबसे बड़ा अस्पताल जेएएच में आने वाले मरीजों को दवाएं पूरी नहीं मिल रही है। इसमें ओपीडी में आने वाले मरीजों को मजबूरी में बाहर से दवाएं खरीदना पड़ रही है। हालात यह हो गए है कि डॉक्टर मरीजों के पर्चे पर छह दवाएं लिख रहे है। लेकिन मरीजों को उनमें से सिर्फ तीन ही दवाएं मिल रही है। जेएएच प्रबंधन कुछ दवाएं कम होने की बात कह रहा है। लेकिन हालात यह है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को डॉक्टर बाहर से दवाएं लेने के लिए मजबूर कररहे है। डॉक्टर ऐसी दवाएं लिख रहे है। यह दवाएं स्टोर में है ही नहीं । उसके बाद मरीज लंबी- लंबी लाइनों में लगने के बाद आधी दवाएं बाहर से ही लेने को मजबूर है। इस समय मरीजों की संख्या बढऩे लगी है। उसके बावजूद भी मरीजों को दवाएं कम पडऩे लगी है।
- मालनपुर से आए नहीं मिली दवाएं
मालनपुर से आए आशीष पिछले कई दिनों से छालों के चलते काफी परेशान है। इसके बावजूद भी उन्हें ६ में ३ ही दवाएं यहां से मिल सकी।
- बाहर से खरीदेंगे दवाएं
हजीरा निवासी मीनू सिकरवार को डॉक्टर ने पर्चे में ५ दवाएं लिखी। लेकिन आधा घंटे तक लाइन में लगने के बाद सिर्फ दो ही दवाएं मिल सकी।
- दवाएं नहीं देते
तारागंज निवासी दिनेश कुमार को कई दिनों से चक्कर के साथ सिर में दर्द है। डॉक्टर ने पर्चे पर पांच दवाएं दी है। उसमें से दो बाहर से खरीदने पड़ेगी।
निजी मेडिकल हटाने अधीक्षक ने लिखा पत्र
तीन दिन पहले जेएच का निरीक्षण करने आए चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कैंपस में चल रहे निजी मेडिकल स्टोर को हटाने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही यहां अमृत के मेडिकल स्टोर पर पदस्थ कर्मचारियों को भी हटाने की बात अधीक्षक से कहीं थी। इसको लेकर अधीक्षक डॉ आरकेएस धाकड़ ने निजी मेडिकल स्टोर हटाने और अमृत का मेडिकल से स्टाफ हटाने को लेकर डीन के साथ संभागा आयुक्त को पत्र लिख दिया है।
इनका कहना है
जेएएच के स्टोर में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध है। जो दवाएं है उनकी जानकारी सभी एचओडी को मालूम है। अगर डॉक्टर उसके बाद भी पर्चे में दवाएं लिख रहे है। तो यह गलत है। डॉक्टर को दवाएं ऐसी नहीं लिखनी है जो मरीज बाहर से खरीदें।
डॉ. आरकेएस धाकड़, अधीक्षक जेएएच