
जेसी मिल्स मामला: लिक्विडेटर का अनुचित आचरण माफ, अब अंतिम सुनवाई होगी, टालमटोल नहीं चलेगा
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बहुचर्चित जेसी मिल्स लिमिटेड मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए आधिकारिक परिसमापक (ऑफिशियल लिक्विडेटर) पर लगाए गए अनुचित आचरण के आरोपों को समाप्त मान लिया है। कोर्ट ने कहा कि परिसमापक द्वारा दायर जवाब और बैंकों को नोटिस देने वाले व्यक्ति का शपथपत्र संतोषजनक है, इसलिए इस मुद्दे पर अब कोई सुनवाई आवश्यक नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब मामले की अंतिम सुनवाई होगी और टालमटोल नहीं चलेगा। इसके लिए 22 अप्रैल की तारीख निर्धारित की गई है। कोर्ट ने कहा कि अब किसी भी पक्ष, विशेष रूप से राज्य की ओर से, अनावश्यक स्थगन नहीं लिया जाना चाहिए। 1997 से जेसी मिल्स का विवाद हाईकोर्ट में लंबित है। मिल बंद होने के बाद आधिकारिक परिसमापक नियुक्त कर दिया गया था। मिल की संपत्तियां परिसमापक के अधीन हैं, जिसके कारण मजदूरों और बैंकों की देनदारियों का निर्णय नहीं हो पा रहा है। करीब 29 साल से यह याचिका हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन अब मोशन स्टेज पर ही अंतिम सुनवाई की जाएगी।
संभावना जताई जा रही है कि जेसी मिल्स का यह विवाद गर्मियों की छुट्टियों से पहले समाप्त हो सकता है। इस दौरान बार-बार तारीख नहीं दी जाएगी और सभी पक्षों को अपनी-अपनी बहस पूरी करनी होगी।
इसलिए लगा था अनुचित आचरण का आरोप
राज्य शासन द्वारा जेसी मिल्स की जमीनों को अपने खाते में दर्ज किया जा रहा था। इसकी जानकारी बैंकों को मिली तो उन्होंने अपनी देनदारियों के संबंध में हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन दायर किए। बैंकों को जो सूचना दी गई थी, वह परिसमापक कार्यालय से भेजी गई थी। यह जानकारी कैसे भेजी गई, इसकी स्पष्टीकरण परिसमापक से मांगा गया। परिसमापक ने बताया कि सूचना ट्रांसपोर्ट के माध्यम से भेजी गई थी। इस पर कोर्ट ने परिसमापक से शपथपत्र प्रस्तुत करने को कहा था। शपथपत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद कोर्ट संतुष्ट हो गया।
Updated on:
18 Mar 2026 06:06 pm
Published on:
18 Mar 2026 06:04 pm
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