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जीवन जीने की कला सिखाते हैं कल्प सूत्र

- पर्युषण पर्व में भगवान महावीर जन्मवाचन 7 सितंबर को

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जीवन जीने की कला सिखाते हैं कल्प सूत्र

जीवन जीने की कला सिखाते हैं कल्प सूत्र

ग्वालियर. पर्युषण पर्व के चौथे दिन सोमवार को सराफा बाजार स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर एवं उपाश्रय भवन में दर्शन मारू ने कल्प सूत्र का वाचन करते हुए भगवान महावीर के 27 भवों का विस्तार से वर्णन किया। कल्पसूत्र में बताते हैं कि कैसे महावीर स्वामी की माता देवानंदा चौदह स्वपन देखती है और स्वप्नों का क्या फल होता है और यह भी बताया गया की कल्पसूत्र हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। कल्पसूत्र में बताया गया की इस अवसर्पिणी काल में दस आश्चर्य हुए। इन दस आश्यर्च में एक आश्चर्य परमात्मा महावीर स्वामी के गर्भापहार का भी आता है। कल्पसूत्र में बताते है कि इंसान जहां रहता है, उसकी सोच वैसी हो जाती है। जैसे एक कुंए में रहने वाला मेंढक समझता है कि इससे बड़ा कुछ होता ही नहीं लेकिन समुद्र में रहने वाला मेंढक जानता है कि दुनिया कितनी बड़ी है। सिर्फ सोच का फर्क है क्योंकि हम जहां रहते है हमारी सोच वैसी हो जाती है। उन्होंने कहा कि जप, तप, आराधना सम्यक भाव जागृत करता है। सम्यक भाव जागृत होने पर सम्यक दर्शन संभव है। इसके लिए ईश्वर के प्रति अटूट आस्था जरूरी है। उन्होंंने आगे कहा कि जिनवाणी को आत्मसात तभी किया जा सकता है जब सम्यक भाव हमारे अंदर हों। एकबार जब यह भाव जाग जाता है तो सम्यक दर्शन से उसे कोई रोक नहीं सकता है। सम्यक भाव ही मोक्ष प्रदान करता है, लेकिन आज हमारे भावों में स्वार्थ भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ दस श्लोक याद कर लेने मात्र से कोई ज्ञानी या पंडित नहीं हो जाता है। विद्धता तो भावों की निर्मलता है। मारू जी ने कहा कि यह काया शाश्वत नहीं है। क्योंकि यह काया भी छूट जाती है। इसी तरह भी माया भी शाश्वत नहीं है। यह कभी किसी को धनवान तो कभी किसी को कंगाल बना देती है। शाश्वत अगर कुछ है वह है प्रभु। शाश्वत को समझना है तो प्रभु के प्रति वीत राग जगाना है।

रात्रि जागरण में गूंजा मेरे सर पे रख दो दादा अपने हाथ...
जिनचन्द्र सुरिश्वर महाराज की स्वर्गारोहण तिथि के निमित उपाश्रय भवन में भक्ति भरा रात्रि जागरण भी किया गया। मेरे सर पे रख दो दादा अपने दोनों हाथ, छाई काली घटाऐं तो क्या उसकी छतरी के नीचे हूं मैं, दादा तेरे चरणों की धूली जो मिल जाये आदि भजनों के माध्यम से भक्तजनों ने अर्धरात्रि तक भक्ति संगीत की गंगा बहाई। पयूर्षण पर्व के पांचवे दिन मंगलवार 7 सितम्बर को सुबह 9 बजे कल्पसूत्र का वाचन एवं दोपहर 2 बजे से उपाश्रय भवन में भगवान महावीर स्वामी जन्मवाचन किया जायेगा।

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