
ग्वालियर। प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हो या भाजपा,चुनाव केंद्र में आमने-सामने ग्वालियर के नेताओं के बीच ही टक्कर होगी और ग्वालियर में ही चुनाव के हार जीत की कहानी लिखी जाएगी। भाजपा की ओर से जहां केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के हाथ में कमान होगी। वहीं कांग्रेस की ओर से चुनाव के मुखिया के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सामने होंगे। ऐसे में जीत किसी की भी हो पर पलड़ा ग्वालियर का ही भारी रहने वाला है।
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी कार्यालय से राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत की तरफ से गुरुवार को इस संबंध में पत्र जारी किया गया जिसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री और वर्तमान छिंदवाड़ा सांसद कमलनाथ को मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व सौंप दिया गया है। पार्टी ने इस बारे में औपचारिक ऐलान भी कर दिया है। इसके अलावा चार वर्किंग प्रेसिडेंट भी बनाए गए हैं।
मध्यप्रदेश कांग्रेस ने वर्किंग प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी बाला बच्चन, रामनिवास रावत, जीतू पटवारी और सुरेन्द्र चौधरी को सौंपी है। आपको बता दें कि लम्बे समय से कांग्रेस में इस परिवर्तन के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार आज इस बारे में पार्टी ने औपचारिक ऐलान कर दिया। जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।
नेताओं को साधा
कांग्रेस ने कमलनाथ को मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपकर और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव कैंपेन कमेटी के चेयरमैन बनाकर पार्टी ने नेताओं को साधने की कोशिश की है। वर्ष २०१८ मिशन को लेकर कांग्रेस में लंबे समय से मांग चल रही है कि सीएम के लिए चेहरा घोषित किया जाए। लेकिन उस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
अपनी-अपनी ताकत दिखाने में लगे है नेता
पार्टी के सभी प्रमुख धड़े अपनी-अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा के साथ यह जताने की कोशिश की है कि प्रदेश में उनकी पकड़ अभी कम नहीं हुई है। वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ विधानसभा के उपचुनाव के दौरान विभिन्न सभाओं में अपनी दावेदारी जता चुके है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और अरुण यादव भी किसी से पीछे नहीं है। ये सभी नेता हर बार यही कहते रहे है कि कांग्रेस में सीएम की घोषणा की परम्परा नहीं है। हमारे यहां लोकतंत्रत्रिक पद्धति से सीएम का चुनाव होता है।
प्रदेश में इसी साल होना है चुनाव
मध्यप्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसको लेकर दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी जीत के लिए सभी तरह के दाव पेंच लगाने में जुट गई है। वहीं जानकारों का कहना है कि कमलनाथ की नियुक्ति के दम पर कांग्रेस प्रदेश में सत्ता में लौटना चाह रही है। लेकिन कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी ने अभी तक मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तय नहीं किया है। फिलहाल कमलनाथ और सिंधिया दोनों ही इस रेस में आगे हैं।
ग्वालियर रहेगा भारी
कांग्रेस की ओर से गुना शिवपुरी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। वहीं भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों ही नेता अपनी अपनी पार्टी को विधानसभा चुनाव जिताने के लिए जो भी रणनीति बनाएंगे वह सब ग्वालियर के द्वारा ही बनाई जाएगी। क्योकि दोनों ही नेताओं का निवास ग्वालियर में है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री तोमर जहां ग्वालियर से सांसद है वहीं सिंधिया का ग्वालियर में गढ़ है। जिससे चुनाव में किसी भी पार्टी की हार जीत हो चाहे वह भाजपा या कांग्रेस हो लेकिन पलड़ा ग्वालियर का ही भारी रहने वाला है।जिससे यहां देश और प्रदेश की नजरे टिकी हुई है।
Published on:
26 Apr 2018 08:09 pm

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