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@ ग्वालियर
लॉकडाउन-1,2,3 में जारी प्रतिबंधों के बाद लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। अब सभी को लॉकडाउन-4 में प्रतिबंधों से कुछ हद तक मुक्ति की आस है। कारण यह है कि 55 दिन हो चुके हैं और अब सबसे बड़ी समस्या निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों की है, सीमित आमदनी वाले घरों की क्षमता जवाब देने लगी है। प्राइवेट नौकरी करने वाले, दुकानदार, डेली कमाने खाने वाले लोगों की परेशानी लगातार बढ़ी है। कमाई का जरिया खत्म होने से आर्थिक संकट तो बढ़ा ही है अब बेरोजगारी भी दिखने लगी है।
आज तक जारी रहने वाले लॉकडाउन-3 के बाद अब कल से नई गाइडलाइन के अनुसार बाजार सहित अन्य कामों के खुलने की संभावना है।प्रशासन इसके लिए आज फाइनल तैयारी करके शाम को या देर रात ऑर्डर जारी करेगा। इससे पहले कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने आज शहर के सभी स्कूली छात्रों की सुविधा के लिए किताब-स्टेशनरी सहित अन्य स्टडी मटेरियल लेने के लिए होम डिलेवरी की अनुमति दी है, यानि संबंधित दुकान संचालक किसी अभिभावक या छात्र को बुलाकर स्टेशनरी आदि नहीं देंगे बल्कि फोन पर ऑर्डर लेकर घर तक पहुंचाएंगे।
इन क्षेत्रों सबसे ज्यादा प्रभाव
ऑटो-टैक्सी
-दो महीने से ऑटो-टैक्सी-टैंपों बंद हैं। इससे करीब 10 हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं। ऑटो चालक सुरेश परिवार का पेट पालने के लिए अब ऑटो मेे सवारी की बजाय सब्जी लेकर आते हैं। सुरेश ने बताया कि बहुत से चालकों की माली हालत बेहद खराब हो गई है। मूल काम बंद हो जाने के बाद कुछ ने ही दूसरा काम शुरू किया है, बाकी के सब इस आस में है कि लॉक डाउन खुलने के बाद सब ठीक हो जाएगा।
प्राइवेट जॉब
-शहर की दुकानें, प्रतिष्ठान,संस्थान सहित अन्य जगहों पर काम करने वाले करीब 50 हजार लोग दो महीने से काम पर नहीं गए हैं। इनमें से अधिकतर की आय 8 से 15 हजार रुपए के बीच है। इन सभी को अब सोमवार से काम मिलने या काम के कुछ अन्य संसाधन मिलने की आस है।
मजदूर-बेलदार-मिस्त्री
-20 हजार से अधिक पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। लॉकडाउन से पहले तक हर दिन करीब 5 हजार मजदूर महाराजबाड़ा,मुरार सदर बाजार, गोला का मंदिर, हजीरा सहित अन्य जगहों पर सुबह पहुंचते थे, यहां से डेली मजदूरी मिलने की संभावना रहती थी। यह स्थान अभी प्रतिबंधित हैं। मकान बनाने वाले मिस्त्री और बेलदार दो महीने से घर पर बैठे हैं। कांट्रैक्ट बेस पर मिलने वाला काम भी लगभग बंद है। जो काम अभी शुरू हुए हैं, उनमें भी बमुश्किल एक हजार लोगों को ही काम मिल पा रहा है।
स्ट्रीट फूड
शहर की चौपाटी से लेकर लगभग हर गली-मौहल्ले, चौराहे, स्कूल-कॉलेजों के आसपास स्ट्रीट फूड के स्टॉल लगते थे। करीब 10 हजार स्टॉल बंद हैं, इनकी वजह से 15 हजार से अधिक लोग सीधे बेरोजगार हो गए हैं। स्ट्रीट फूड स्टॉल लगाने वालों को भी प्रशासन से राहत मिलने की उम्मीद है।
गैराज-मैकेनिक-धुलाई सेंटर
-तीनों उपनगर में करीब 5 हजार वाहन मरम्मत के गैराज हैं। इन गैराजों में करीब 15 हजार कुशल-अर्ध कुशल मैकेनिक काम करते हैं। इनका काम बंद है। बीते तीन दिन से सभी मैकेनिक यही आस लगाए हैं कि 18 मई से गैराज खुलेंगे और काम पर वापसी होगी।
इतने लोगों को चाहिए काम
बाहर से आए करीब 50 हजार लोग जिले में वापस आए हैं। यह सभी फिलहाल वापस अपने काम पर नहीं लौटेेगे। इनको स्थानीय स्तर पर काम उपलब्ध कराने की चुनौती प्रशासन के सामने है।
इन सैक्टर्स में सावधानी जरूरी
-किराना सहित अन्य बाजारों में सावधानी बरतना पड़ेगी।
-चौपाटी सहित अन्य फूड मार्केट जहां भीड़ इकट्ठी होती है।
-महाराजबाड़ा के आसपास संकरे क्षेत्र में स्थित मार्केट में भीड़ इकट्ठी होती है।
-सब्जी,अनाज,फल मंडी में भीड़ इकट्ठी होती है।
-लोहिया बाजार, जयेन्द्रगंज,इंदरगंज, शिंदे की छावनी, फालका बाजार जैसे क्षेत्रों में भीड़ रहती है।
Updated on:
17 May 2020 06:00 pm
Published on:
17 May 2020 05:21 pm
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