
ग्वालियर। विधानसभा चुनाव से ठीक छह महीने पहले सोमवार को व्यापक पुलिस फेरबदल में २३ आइपीएस के तबादले कर दिए गए। इनमें १२ जिलों के एसपी हटा दिए गए हैं। भारत बंद के दौरान ग्वालियर-चम्बल संभाग में हिंसा पर काबू नहीं कर पाने के लिए जिम्मेदार भिण्ड,मुरैना और ग्वालियर के एसपी भी हटाए गए हैं।
तीनों एसपी में सिर्फ भिण्ड एसपी प्रशांत खरे को सिवनी एसपी की जिम्मेदारी दी गई है। ग्वालियर एसपी डा.आशीष और मुरैना एसपी आदित्य प्रताप सिंह को मैदानी ड्यूटी से हटाकर कार्यालयों में बैठा दिया गया है। जिन १२ जिलों में एसपी बदले गए हैं, उनमें से ७ को ही वापस दूसरे जिले की कमान सौंपी गई है।
हिंसा के बाद से थे हसिए पर
दो अप्रैल को एससी एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में भारत बंद के दौरान ग्वालियर और डबरा में जमकर हिंसा और उपद्रव हुआ था। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे। इस दौरान ग्वालियर शहर में करीब पांच दिन तक धारा 144 और कफ्र्यू लगाया गया था।
यह हिंसा शहर के मुरार,थाटीपुर,गोला का मंदिर व दीनदयाल नगर और डबरा में हुई थी। हिंसा और उपद्रव को रोकने के लिए केंद्र और राज्य शासन की ओर से भारी संख्या में पुलिस बल ग्वालियर में भेजा गया था,तब कहीं जाकर स्थिति को कंट्रोल किया गया था। इस हिंसा के बाद से ही कायास लगाए जा रहे थे कि एसपी डॉ.आशीष का तबादला हो सकता है।
शालीनता और सरलता का दामन नहीं छोड़ा
एसपी नवनीत भसीन का जन्म शिवपुरी में हुआ था और आज भी उनकी फैमली शिवपुरी में ही रहती है। जब वह भिण्ड एसपी थे तो उन्होंने नकल और रेत उत्खनन सहित कई कार्यों पर लगाम लगाई थी। उन्होंने भिंड के एसपी के रूप में न केवल अपराधों पर नियंत्रण लगाने में सफलता पाई,बल्कि नक़ल माफिया पर अंकुश लगाकर, प्रतिभावान छात्रों के हक़ पर डाका डालने वालों के मंसूबों को भी विफल किया।
ख़ास बात यह है कि यह सब करते हुए भी उन्होंने शालीनता और सरलता का दामन नहीं छोड़ा। आपको बता दें कि एसपी नवनीत भसीन खंडवा से पहले भिण्ड एसपी थे। भिण्ड से खंडवा उनके तबादले का आदेश जारी हुआ तो लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया और युवाओं ने इस आदेश को निरस्त कराने के लिए बाजार बंद का ऐलान कर दिया था और वह सड़कों पर उतर आए थे। हालांकि एसपी के समझाने के बाद प्रदर्शनकारी मान गए थे।
Published on:
15 May 2018 03:00 pm

बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
